जबलपुर। सत्यप्रकाश पब्लिक स्कूल में एक गतिविधि के दौरान कई छात्रों के घायल होने के मामले ने तूल पकड़ लिया है। पीड़ित छात्र अथर्व उपाध्याय की मां द्वारा थाने से लेकर कलेक्टर की जनसुनवाई तक शिकायत किए जाने के बावजूद अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने पर अब एनएसयूआई ने मामले को गंभीरता से उठाया है।
एनएसयूआई के राष्ट्रीय प्रवक्ता विराज यादव ने राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग, पुलिस महानिदेशक मध्यप्रदेश, प्रमुख सचिव स्कूल शिक्षा, आयुक्त लोक शिक्षण संचालनालय सहित संबंधित अधिकारियों को शिकायत भेजकर मामले में तत्काल कार्रवाई की मांग की है।
यादव के मुताबिक घटना में छात्र अथर्व उपाध्याय भी घायल हुआ है। उसकी मां ने गौरीघाट थाने में लिखित शिकायत देने के साथ कलेक्टर की जनसुनवाई में भी आवेदन दिया, लेकिन अब तक अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। पीड़ित परिवार की सुनवाई नहीं होने पर एनएसयूआई को हस्तक्षेप करना पड़ा।
यादव ने सवाल उठाया कि यदि शिकायत के बावजूद एफआईआर दर्ज नहीं हुई है तो इसकी वजह क्या है? और यदि एफआईआर दर्ज हो चुकी है तो उसकी प्रति पीड़ित परिवार को उपलब्ध क्यों नहीं कराई गई?
उन्होंने कहा कि निजी स्कूल अभिभावकों से फीस लेते हैं, इसलिए बच्चों की सुरक्षा के लिए पर्याप्त सुरक्षा उपाय, प्रशिक्षित निगरानी व्यवस्था और आपातकालीन इंतजाम सुनिश्चित करना स्कूल प्रबंधन की जिम्मेदारी है। स्कूल शिक्षा का संस्थान है, केवल फीस वसूलने का माध्यम नहीं।
एनएसयूआई ने स्कूल के प्रिंसिपल और डायरेक्टर की भूमिका की निष्पक्ष जांच कराने, आपराधिक लापरवाही पाए जाने पर एफआईआर दर्ज करने, घटना के सीसीटीवी फुटेज एवं संबंधित रिकॉर्ड सुरक्षित रखने तथा घायल बच्चों के उपचार का पूरा खर्च स्कूल प्रबंधन से दिलाने की मांग की है। अभिभावकों के साथ कथित गाली-गलौज और बदसलूकी की भी जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की मांग की गई है।
विराज यादव ने कहा कि जब एक मां अपने घायल बच्चे के लिए थाने से लेकर कलेक्टर की जनसुनवाई तक न्याय की गुहार लगा रही हो और फिर भी सुनवाई न हो, तो यह केवल एक परिवार का मामला नहीं रह जाता। बच्चों की सुरक्षा से जुड़े मामलों में प्रशासन की जवाबदेही तय होना जरूरी है।
एनएसयूआई ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने शीघ्र कार्रवाई नहीं की तो संगठन अभिभावकों के साथ सत्यम प्रकाश पब्लिक स्कूल के सामने आंदोलन करेगा। आवश्यकता पड़ने पर तालाबंदी भी की जाएगी। संगठन ने स्पष्ट किया कि बच्चों की सुरक्षा से किसी भी कीमत पर समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।