देश की पहचान ही हमारी पहचान है : प्रेमशंकर सीदार, आरएसएस शताब्दी वर्ष पर युवा संवाद कार्यक्रम


जबलपुर। “विश्व गगन पर फिर से गूंजे भारत माता की जय” के ओजस्वी विचारों के साथ जबलपुर महानगर में आयोजित युवा संवाद कार्यक्रम का शुभारंभ मंचासीन अतिथियों द्वारा भारत माता के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन कर किया गया।

दीप प्रज्वलन के साथ ही संपूर्ण वातावरण राष्ट्रभक्ति और उत्साह से ओतप्रोत हो गया।संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा पूरे भारतवर्ष के प्रत्येक जिले में हिंदू सम्मेलन एवं युवा संवाद कार्यक्रमों की श्रृंखला चलाई जा रही है।

इसी कड़ी में जबलपुर महानगर का यह युवा संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में युवाओं की सक्रिय सहभागिता रही।


कार्यक्रम में मंचासीन अतिथियों के रूप में जबलपुर विभाग के संघचालक डॉ. कैलाश गुप्ता, समाजसेवी एवं उद्योगपति, नर्मदा भाग सह कार्यवाह अनिरुद्ध कौरवार, प्रेम शंकर सीदार (मुख्य वक्ता), सह प्रांत प्रचारक श्रवण सैनी, सह महाविद्यालयीन कार्य प्रमुख गोपाल मीणा एवं विभाग प्रचारक आनंद अग्रहरि विशेष रूप से उपस्थित रहे।


कार्यक्रम में मुख्य वक्ता प्रेम शंकर सीदार ने युवाओं द्वारा प्रेषित प्रश्नों का उत्तर देते हुए उनकी जिज्ञासाओं का समाधान किया। उन्होंने राष्ट्र निर्माण, सामाजिक दायित्व, संगठनात्मक भूमिका और युवाओं की सक्रिय सहभागिता जैसे विषयों पर मार्गदर्शन प्रदान किया, जिससे उपस्थित युवाओं में विशेष उत्साह एवं प्रेरणा का संचार हुआ।


युवा सम्मान कार्यक्रम में मुख्य वक्ता प्रेम शंकर सीदार ने राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि “देश है तो हम हैं, और देश की पहचान ही हमारी पहचान है।” उन्होंने कहा कि जो युवा अपने पुरुषार्थ के बल पर राष्ट्र को नई ऊँचाइयों पर ले जाने का संकल्प रखते हैं, वही वास्तव में राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया में सबसे महत्वपूर्ण कड़ी होते हैं।


प्रेम शंकर ने कहा कि विश्व के मानचित्र में वही देश सम्मान प्राप्त करता है, जिसे शक्तिशाली माना जाता है। केवल अच्छे विचार या भावनाएँ पर्याप्त नहीं हैं, जब तक उनके पीछे संगठित और सक्षम शक्ति न हो। दुनिया शक्ति को सुनती है, और इसलिए राष्ट्र निर्माण के लिए आत्मविश्वासी, अनुशासित और संगठित समाज का निर्माण अनिवार्य है।


उन्होंने कहा कि इतिहास गवाह है कि देश के हर संकट—चाहे वह विभाजन हो, प्राकृतिक आपदाएँ हों, युद्धकाल या आपातकाल—में संघ के स्वयंसेवक सेवा और समर्पण के साथ खड़े रहे हैं। उन्होंने आज के सामाजिक सरोकारों जैसे सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण, स्वदेशी, परिवार व्यवस्था और नागरिक कर्तव्यों पर भी प्रकाश डाला।


कार्यक्रम के समापन अवसर पर सह विभाग कार्यवाह अखिलेन्द्र ने उपस्थित सभी अतिथियों, वक्ताओं एवं युवाओं का आभार व्यक्त किया। इसके पश्चात वंदे मातरम् के सामूहिक उद्घोष के साथ कार्यक्रम का गरिमामय समापन हुआ।