विहंगम योग साधना और सदगुरु सदाफल देवजी का ज्ञान शिविर संपन्न

राजीव दीक्षित स्वदेशी धाम के तावधान*  में ग्राम सहसन पड़रिया में बच्चों एवं अभिभावकों के आध्यात्मिक, सांस्कृतिक विकास हेतु
विहंगम योग साधना और सदगुरु सदाफल देवजी ज्ञान शिविर का आयोजन किया गया।
      कार्यक्रम का शुभारंभ माता सरस्वती, सदगुरु सदाफल देवजी महाराज जी एवं स्वदेशी के पुरोधा भाई राजीव दीक्षित के चित्र पर माल्यार्पण करके किया गया। शिविर में मुख्य अतिथि के रूप में सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक नगरी बनारस से पधारे आचार्य श्री सत्येंद्र कुमार स्वर्वेदी ने विहंगम योग की अदभुत साधना और सदगुरु सदाफल देवजी के ज्ञान से सभी को परिचित करवाया इस ज्ञान से जहां एक ओर मन को नियंत्रित करने की शक्ति तो प्राप्त होती ही जिससे हमारा सांसारिक कल्याण होगा। वहीं दूसरी ओर सदगुरुदेव की आध्यात्मिक शक्ति को प्राप्त कर व्यक्ति अपना आध्यात्मिक कल्याण भी कर सकता है।
स्वर्वेदी जी ने शिविर में उपस्थित बच्चों, अभिभावकों, शिक्षक शिक्षिकाओं आदि को सदगुरु सदाफल देवजी महाराज जी का जीवन परिचय बताए हुए उनकी शिक्षाओं को अपनाने हेतु प्रेरित किया। उन्होंने बच्चों को समझाया कि वे किस तरह से अपने समय का सदुपयोग करके अपने जीवन को सार्थक बना सकते है। आज के परिदृश्य को देखते हुए उन्होंने कहा कि स्क्रीन टाइम (मोबाइल पर बिताने वाले समय) को स्किल टाइम में लगाना चाहिए, अपने समय का सदुपयोग कार्टून में नहीं कोडिंग में करनी चाहिए अर्थात धर्म, संस्कृति, अध्यात्म के साथ विज्ञान को भी सीखना अति आवश्यक है। अपने आशीर्वचन में उन्होंने संस्कारयुक्त शिक्षा ही असल मायने में शिक्षा है। आध्यात्म और मेडिटेशन की उपयोगिता बताते हुए उन्होंने कहां कि मेडिटेशन व्यक्ति की हर तरह की चिंता को दूर करता है। इस अवसर पर उन्होंने सभी को विहंगम योग साधना की विभिन्न विधियों से भी परिचित कराया एवं नियमति अपनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। स्वर्वेदी जी राजीव दीक्षित को याद करते हुए कहा कि स्वदेशी अपनाना हमारी आज के सबसे बड़ी आवश्यकता और मजबूरी दोनों है और सिर्फ स्वदेशी के मार्ग से ही हम पुनः भारत को विश्वगुरु बना सकते है।

शिविर आयोजन की मुख्य सूत्रधार श्रीमती सीमा श्रीवास्तव ने अपने अनुभवों को साझा करते हुए विहंगम योग साधना एवं सदगुरु के ज्ञान के व्यवहारिकता, प्रमाणिकता की पुष्टि करते हुए इसे अपनाने का आग्रह किया।

राजीव दीक्षित स्वदेशी धाम के जितेन्द्र देसी ने राजीव दीक्षित को याद करते हुए कहा कि सदगुरु सदाफल देवजी महाराज जी के बताए मार्ग पर चलकर हम राष्ट्र, समाज और मानवता को एक नई दिशा में ले जा सकते है। राजीव दीक्षित के सपनो का भारत निर्माण सदगुरू महाराज जी के पद चिन्हों पर चलकर आसानी से प्राप्त किया जा सकता है और स्वदेशी स्वराज्य स्थापित किया जा सकता है।
सत्येंद्र स्वर्वेदी जी ने स्वर्वेद भेंट स्वरूप प्रदान किया।
सोनम ठाकुर ने आभार प्रदर्शन करते हुए स्वर्वेदी जी द्वारा बताई गई विहंगम योग साधना की विधियों को दिनचर्या में अपनाने का वादा किया।

इस अवसर पर वरिष्ठजनों में केशव प्रसाद विश्वकर्मा, के के विश्वकर्म, स्वर्वेदी जी के सहयोगी मदन प्रसाद, 
अशोक जायसवाल, नेहा पटेल, शिवानी पटेल, भागवती सेन, अनुश्री पटेल, प्रमोद तिवारी, अभिभावक घनश्याम पटेल, मालती पटेल, नितिन पटेल, रेशमा बेन, श्रीमती शर्मा आदि उपस्थित थें।

ज्ञात हो कि विहंगम योग एक अति प्राचीन ध्यान  की पद्धति है जिसका वर्णन हमारे महापुराण श्रीमद् भागवत गीता में श्री कृष्ण के द्वारा किया गया है।
इसी वैज्ञानिक पद्धति को सदगुरु सदाफल देव जी महाराज ने आगे बढ़ाते हुए इस ध्यान साधना के विभिन्न पड़ाव एवं शिखरतम स्तर पर परमात्मा की प्राप्ति का विज्ञान हम सभी के बीच में प्रस्तुत किया हैं।
सदगुरु सदाफल देव जी महाराज ने अपने शरीर छोड़ने के समय इस बात की घोषणा की कि वे जीवन- मृत्यु के विज्ञान के पार वर्तमान में भी सभी को दर्शन देते हैं। उनके ऐसे विज्ञान के एक प्रयोगशाला के स्तंभ के रूप में वर्तमान सदगुरु आचार्य श्री स्वतंत्र देव जी महाराज द्वारा बनारस में स्वर्वेद महामंदिर का निर्माण किया गया  है।
इस स्वर्वेद महामंदिर में के उद्घाटन के कार्यक्रम में दो बार मुख्य अतिथि के रूप में हमारे माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने अपनी उपस्थिति दर्ज की है। अन्य कार्यक्रमों में श्री योगी जी लगातार उपस्थित रहे हैं।

स्वर्वेद महामंदिर धाम विश्व के सबसे बड़े ध्यान योग केंद्र के रूप में जाना जाता है।