गढ़ा की सडक़ अब बन रही है विकास का उदाहरणचुनौती और इतिहास पर चल रही चर्चा

जबलपुर। शहर के पुराने क्षेत्र गढ़ा की सडक़ बन कर अब लोकापर्ण के लिए तैयार है। तमाम चुनौतियों और कठिनाईयों के बाद सडक़ के लोकापर्ण को लेकर लोगों में उत्साह का वातावरण है। नतीजा गढ़ा के ऐतिहासिक परिदृश्य से लेकर उपेक्षा के सालों और अब बदलती तस्वीर को लेकर चर्चाओं का दौर चल रहा है। चूंकि इस मार्ग के विकास में क्षेत्रीय जनों के मकान,दुकान,अति प्राचीन पेड़, नाली,पानी की पाइप लाइन आदि अनेक चुनौतियां थीं लेकिन स्थानीय विधायक और वर्तमान में राज्य शासन के लोक निर्माण मंत्री राकेशसिंह के प्रयासों से यह दिन आ गया है इसलिए लोग इस सडक़ को उनकी ड्रीम रोड तक बोल रहे हैं। बता दें कि गढ़ा क्षेत्र में आनंद कुंज से पंडा की मढिय़ा मार्ग में कई ऐतिहासिक स्थल जैसे पंडा की मडिया, राधा कृष्ण मंदिर, भैरव बाबा मंदिर और एक अति प्राचीन जल कुंभ बावली आज भी संरक्षित है। यही मार्ग जबलपुर के और भी कई प्राचीन ऐतिहासिक स्थल जैसे, त्रिपुरी, मदनमहल किला,पचमठा मंदिर ,शारदा मंदिर आदि को भी जोड़ता है। इसीलिए इस अति प्राचीन मार्ग को अति संकीर्ण और जर्जर महसूस किया जा रहा था। महानगर की तर्ज पर पर्यावरण एवं ऐतिहासिक स्थलों को बचाते हुए इसका चौड़ीकरण, दोनों तरफ आकर्षक फुटपाथ, नाली एवं लाइट लगाई गई है।
इस मार्ग के विकास हो जाने से  आवागमन सुगम हो जाएगा और ,पार्किंग की असुविधा दूर होने से  व्यवसाय में वृद्धि हुई है। जिससे यह क्षेत्र भविष्य में विकास के नए आयाम स्थापित करेगा।बता दें कि जबलपुर का गढ़ा मध्य भारत के ऐतिहासिक और शक्तिशाली गढ़ या गढ़ा गोंड साम्राज्य का मुख्य केंद्र था। यह क्षेत्र 13वीं से 16वी शताब्दी के बीच अपने स्वर्ण युग में पहुंचा और इसे गोंड राजाओं की गौरवशाली राजधानी होने का दर्जा प्राप्त है। जबलपुर का गढ़ा क्षेत्र आज भी अपनी पुरानी वास्तुकला, महलों और स्मारकों के लिए जाना जाता है जो मध्य प्रदेश के समृद्ध गोंड राजवंश की याद दिलाता है।