जबलपुर। पावर मैनेजमेंट कंपनी तथा वितरण कंपनियों ने बिजली के रेट बढ़ाने के संबंध में नियामक आयोग के समक्ष याचिका (पीटिशन नंबर 140/2025) दायर की है, जिस पर 9 दिसंबर को सुनवाई हुई है| किंतु इस याचिका को अभी तक सार्वजनिक नहीं किया गया| उपभोक्ताओं को अंधेरे में रखा गया है|
22 सितंबर को जीएसटी 2.0 तथा कोयलले से 400 रुपए प्रतिटन केम्पेनसेशन सेस हटाने की कार्रवाई की गई| सेस हटाने से बिजली उत्पादन लागत घटी| ऐसे में बिजली सस्ती होना चाहिए थी, किन्तु इसी के उल्टे बिजली के रेट बढ़ाने को प्रस्तावित किया गया है|
इससे आक्रोशित होकर आज जनसंगठनों ने घंटाघर के पास प्रदर्शन किया, तथा जिला प्रशासन के माध्यम से अध्यक्ष, मप्र विद्युत नियामक आयोग तथा ऊर्जा मंत्री पीएस तोमर को ज्ञापन सौंपा|
संगठनों ने आरोप लगाया कि ऊर्जा मंत्री पीएस तोमर ने पत्रकारों के समक्ष घोषणा की थी, कि जीएसटी तथा कोयले पर सेस घटाने का लाभ उपभोक्ताओं तक पहुंचाया जायेगा, तथा बिजली सस्ती की जाएगी| किन्तु बिजली के रेट बढ़ाने को प्रस्तावित करने से ऊर्जा मंत्री की घोषणा गलत साबित हो रही है|
प्रदर्शन में डॉ.पीजी नाजपांडे, रजत भार्गव, टीके रायघटक, डीके सिंह, वेदप्रकाश अधौलिया, डीआर लखेरा, संतोष श्रीवास्तव, सुशीला कनौजिया, गीता पांडे, व्हीएन कमलाकर, केसी सोनी, अर्जुन कुमार परोरा, दिलीप कुंडे, उमा दाहिया, यशवंत कोष्टा, एड.ब्रजेश साहू, तथा राममिलन शर्मा आदि शामिल थे|