विधानसभा के बजट सत्र में विधायक लखन घनघोरिया ने सरकार को घेरा: जनसमस्याओं, अव्यवस्थाओं और अधूरे वादों पर उठाए तीखे सवाल

जबलपुर। मध्यप्रदेश विधानसभा के चालू सत्र में जबलपुर पूर्व से कांग्रेस विधायक लखन घनघोरिया ने प्रदेश की जनसमस्याओं, प्रशासनिक अव्यवस्थाओं और सरकार के अधूरे वादों को लेकर जोरदार तरीके से अपनी बात रखी। अपने विस्तृत उद्बोधन में उन्होंने कहा कि प्रदेश में कानून-व्यवस्था, महंगाई, पेयजल संकट, स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली और नगरीय निकायों की कार्यप्रणाली जैसे गंभीर मुद्दों पर सरकार संवेदनशीलता के बजाय आंकड़ों की आड़ में वास्तविकता को छिपाने का प्रयास कर रही है।

श्री घनघोरिया ने सदन में कहा कि आम जनता आज महंगाई से त्रस्त है। रोजमर्रा की आवश्यक वस्तुओं की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं, लेकिन सरकार इस विषय पर ठोस कदम उठाने के बजाय आत्मप्रशंसा में लगी है। उन्होंने आरोप लगाया कि गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों की आय में कोई वृद्धि नहीं हुई, जबकि खर्च कई गुना बढ़ चुका है। यह स्थिति प्रदेश के लाखों परिवारों को आर्थिक असुरक्षा की ओर धकेल रही है।

विधायक घनघोरिया ने पेयजल संकट का मुद्दा उठाते हुए कहा कि जबलपुर सहित कई शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी नागरिकों को नियमित और स्वच्छ पेयजल उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। उन्होंने कहा कि करोड़ों रुपये की योजनाओं की घोषणा तो की जाती है, लेकिन जमीनी स्तर पर उनका क्रियान्वयन अधूरा और अव्यवस्थित है। पाइपलाइन बिछाने और टंकियों के निर्माण के बावजूद कई मोहल्लों में पानी नहीं पहुंच रहा, जिससे जनता को टैंकरों पर निर्भर रहना पड़ रहा है।

प्रदेश में महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा के दावों के बीच आंकड़े कुछ और कहानी कहते हैं। उन्होंने उल्लेख किया कि प्रदेश में महिलाओं से जुड़े अपराधों के 54,803 मामले दर्ज हैं, जबकि केवल एक संभाग में ही यह संख्या 13,146 तक पहुंच गई है।

स्वास्थ्य सेवाओं पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि अस्पतालों में पर्याप्त डॉक्टर, पैरामेडिकल स्टाफ और मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। उन्होंने सदन में उदाहरण देते हुए कहा कि मेडिकल कॉलेजों और जिला अस्पतालों में संसाधनों की कमी के कारण मरीजों को समय पर उपचार नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने उल्लेख किया कि एक मेडिकल कॉलेज के निर्माण की लागत हज़ारों करोड़ रुपये तक बताई जा रही है, जबकि प्रदेश में कई अस्पतालों में मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ स्थानों पर स्वास्थ्य परियोजनाओं की लागत 2 लाख 883 करोड़ रुपये से अधिक बताई गई है, लेकिन आम नागरिकों को उसका अपेक्षित लाभ नहीं मिल रहा।

उन्होंने नगरीय निकायों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े किए और कहा कि सफाई, सड़क, सीवर और प्रकाश व्यवस्था जैसी बुनियादी सुविधाओं की स्थिति चिंताजनक है। जनता से टैक्स वसूला जा रहा है, लेकिन बदले में उन्हें गुणवत्तापूर्ण सेवाएं नहीं मिल रही हैं। उन्होंने यह भी कहा कि विकास कार्यों में पारदर्शिता का अभाव है और जनप्रतिनिधियों की बातों को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा।

अपने भाषण में श्री घनघोरिया ने सरकार द्वारा वर्ष 2047 तक प्रदेश को विकसित बनाने के दावों पर भी कटाक्ष किया। उन्होंने कहा कि जब वर्तमान की समस्याओं का समाधान ही नहीं हो पा रहा है, तो भविष्य के बड़े-बड़े वादे केवल घोषणाएं भर बनकर रह जाते हैं। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि वह जमीनी वास्तविकताओं को स्वीकार करे और जनहित के मुद्दों पर ठोस, समयबद्ध और पारदर्शी कार्यवाही सुनिश्चित करे।

कांग्रेस पार्टी सदन के भीतर और बाहर जनता की आवाज मजबूती से उठाती रहेगी और प्रदेश के नागरिकों के अधिकारों एवं हितों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखेगी। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि विपक्ष के सुझावों को सकारात्मक रूप से लेते हुए प्रदेश के सर्वांगीण विकास की दिशा में वास्तविक कदम उठाए जाएं।