60 वर्ष पुराने सबस्टेशन में तकनीकी समस्या का समाधान, एमपी ट्रांसको के सबस्टेशनों में 33 केवी फीडरों को किया गया अंडरग्राउंड


जबलपुर। मध्य प्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी (एमपी ट्रांसको) के इंदौर स्थित 132 केवी चंबल सबस्टेशन में 33 केवी फीडरों की सभी क्रॉसिंग समाप्त कर उन्हें अंडरग्राउंड केबल प्रणाली में परिवर्तित कर दिया गया है। लगभग 60 वर्ष पुराने इस सबस्टेशन में लंबे समय से चली आ रही एक महत्वपूर्ण तकनीकी समस्या के समाधान से अब विद्युत आपूर्ति व्यवस्था की विश्वसनीयता, सुरक्षा एवं स्थिरता में उल्लेखनीय सुधार होगा। 132 केवी चंबल सबस्टेशन इंदौर का सबसे पुराना तथा मालवा क्षेत्र का दूसरा सबसे पुराना अतिरिक्त उच्च दाब (ईएचवी) सबस्टेशन है। इस सबस्टेशन में आवश्यकता के अनुसार पिछले 60वर्षों में सबस्टेशन यार्ड में 33 के वी फीडरों की संख्या बढकर 16 हो गई थी। लेकिन 33 केवी फीडर एक-दूसरे को क्रॉस करते हुए गुजरते थे। समय के साथ यह व्यवस्था संचालन एवं अनुरक्षण (ऑपरेशन एवं मेंटेनेंस) की दृष्टि से चुनौतीपूर्ण होती गई थी।

क्रॉसिंग के कारण होते थे ट्रिपिंग एवं विद्युत व्यवधान……..


कई बार कंडक्टर गिरने अथवा अन्य तकनीकी कारणों से इन क्रॉसिंग के कारण ट्रिपिंग एवं विद्युत व्यवधान की स्थिति निर्मित हो जाती थी। अब सभी 16 फीडर क्रॉसिंग को 33 केवी अंडरग्राउंड केबल प्रणाली में परिवर्तित किए जाने से ऐसी घटनाओं की संभावना लगभग समाप्त हो गई है। इससे सबस्टेशन की आपरेशनल सुरक्षा भी बढ़ी है।

वेस्ट डिस्कॉम ने वहन की परियोजना लागत………..

इस कार्य के लिए आवश्यक निर्माण राशि मध्यप्रदेश पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी (पश्चिम डिस्कॉम) द्वारा व्यय की गई है। परियोजना को एमपी ट्रांसको एवं पश्चिम डिस्कॉम के समन्वित प्रयासों से सफलतापूर्वक पूरा किया गया। मध्यप्रदेश पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी, इंदौर के प्रबंध निदेशक अनूप कुमार सिंह तथा एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर (प्रोजेक्ट एवं वर्क्स) एस.एल. करवाडिया के विशेष प्रयासों से यह महत्वपूर्ण कार्य समयबद्ध रूप से संपन्न हो सका।