जबलपुर। शहर तेजी से फैल रहा है, नई कॉलोनियां बस रही हैं, बड़े प्रोजेक्ट आ रहे हैं और जबलपुर को संभागीय मुख्यालय से आगे एक बड़े शहर के रूप में विकसित करने की बातें लगातार हो रही हैं। लेकिन दूसरी तरफ रोजमर्रा की जिंदगी में आम आदमी उन्हीं पुरानी समस्याओं से जूझ रहा है—कहीं सड़क पर गड्ढे हैं, कहीं नालियां जाम हैं, कहीं बिजली की आंख-मिचौली है तो कहीं पीने के पानी को लेकर शिकायतें।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि शहर का विस्तार तो तेजी से हो रहा है, लेकिन क्या उसकी बुनियादी व्यवस्थाएं भी उसी रफ्तार से मजबूत हो रही हैं?
बारिश के मौसम में यह सवाल और गंभीर हो जाता है। जलभराव वाले इलाकों में लोगों की परेशानी बढ़ती है, ट्रैफिक व्यवस्था पर दबाव आता है और खराब सड़कों की स्थिति और ज्यादा उजागर हो जाती है। बिजली की समस्या हो तो घर से लेकर कारोबार तक प्रभावित होता है और पानी की शिकायत सामने आए तो सीधे लोगों की सेहत का सवाल खड़ा हो जाता है।
शहर में बड़े संस्थान, हाईवे, रेलवे और एयर कनेक्टिविटी जैसी सुविधाएं जबलपुर को नई पहचान दे रही हैं। हाल में जबलपुर से नई हवाई कनेक्टिविटी को लेकर भी विस्तार हुआ है। लेकिन शहर के भीतर नागरिक सुविधाओं की तस्वीर अभी भी कई जगह सवाल खड़े करती है।
असली परीक्षा अब घोषणाओं की नहीं, डिलीवरी की है…….
आम नागरिक को यह जानना है कि जिस सड़क के लिए टैक्स लिया जा रहा है, वह समय पर क्यों नहीं सुधरती? जिस नाली की सफाई का दावा होता है, पहली बारिश में वही क्यों उफन जाती है? शिकायत दर्ज कराने के बाद अधिकारी मौके पर कब पहुंचेंगे? और जिन योजनाओं पर करोड़ों रुपये खर्च हो रहे हैं, उनका असर जमीन पर कितना दिखाई दे रहा है?
यही वह सवाल जिसका लोगों को चाहिए जवाब………..
जबलपुर को सिर्फ स्मार्ट और विकसित बनाने की घोषणा काफी नहीं होगी। शहर को ऐसा बनाना होगा जहां नागरिक को सड़क, पानी, बिजली, सफाई और ट्रैफिक जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए रोज शिकायत लेकर दफ्तरों के चक्कर न लगाने पड़ें। क्योंकि शहर की असली तरक्की फ्लाईओवर, इमारतों और घोषणाओं से नहीं, आम आदमी की रोजमर्रा की जिंदगी आसान होने से दिखाई देती है।