जबलपुर। पांच दिवसीय दीपोत्सव पर्व की शुरूआत शनिवार को धनतेरस के साथ हो गई। पहले दिन स्वास्थ्य के देवता भगवान धनवंतरी की पूजा अर्चना कर लोगों ने स्वस्थ रहने की प्रार्थना की। वहीं धनतेरस पर शुभ खरीदी के मुहूर्त और परंपरा को लेकर बाजारों में खासी भीड़ रही।
एक दिन पहले ही बाजार ग्राहकों के लिए सजधज कर तैयार हो गये थे। मंहगाई की मार के बावजूद लोगों ने खासकर केन्द्रीय कर्मचारियों को बोनस और राज्य कर्मचारियों को वेतन समय से पूर्व हो जाने से जमकर खरीददारी की।
स्वर्ण आभूषण वालों के बाद बर्तन वालों ने जमकर चांदी काटी। जबकि मेवा मिष्ठान और कपड़े वालों की ग्राहकी में मंदी रही। धनतेरस की पूर्व संध्या से ही बाजारों में भीड़ उमड़ने लगी थी। शाम ढलने के साथ-साथ भीड़ और बढ़ने लगी।
रात में बाजारों में पैर रखने की जगह नहीं थी। शाम के वक्त चौपाया वाहन, हाथ ठेला और ई-रिक्शा ने नगर के तंग गली बाजार फुहारा, कमानिया, गंजीपुरा, गढ़ाफाटक मेन रोड, सिविक सेंटर के चारों ओर, ब्लूम चौक, गोरखपुर मार्केट, अंधेरदेव, मुकादमगंज, करमचंद चौक से घंटाघर मार्ग, अधारताल, रद्दी चौकी, दमोहनाका, आदि क्षेत्रों में यातायात व्यवस्था चरपट कर दी।
लोग घंटो जाम में फंसे रहे, कही जगह वाद विवाद स्थिति बनी| दिनभर पुलिस नदारद रही, शाम 7 बजे के बाद प्वाइंटों पर पुलिस तैनात हुई, तब तक ई-रिक्शा, कार चालक , मालवाहक आटो, कोहराम मचा चुके थे| सड़कों पर दुकानें पसरी रही|
चलने के लिए मुख्य बाजारों में सड़के कम पड़ गई थी| शाम ढलने से लेकर देर रात तक बाजार गुलजार रहे। लोगों ने जी भरकर खरीददारी की। बर्तनों की खनक और सोने की चमक से खरीददारों को खासा प्रभावित किया।
शुभ मुहूर्त पर बर्तन खरीदने की परम्परा का निर्वाहन करते हुये थाली कटोरी, गिलास, डिनर सेट, चम्मच खरीदने के लिये दुकानों पर खासी भीड़ लगी रही। ऐसी मान्यता है कि धनतेरस पर खरीदी करने से साल भर खरीदी का योग बना रहता है।
सामान्य आय वर्गीय लोग बर्तन खरीदकर धनतेरस की खरीदी की परम्परा का निर्वाह कर रहे थे, वहीं धनाढ्य वर्गीय लोग हर तरह से बाजार की चकाचौंध में प्रभावित नजर आये। खरीदने वालों ने सवा-सवा लाख रूपये के डायमंड ज्वेलरी और सोने-चांदी के जेवरात खरीदकर धनतेरस मनाई।
वहीं समस्याओं से बेजार व सामान्य आयवर्गीय लोगों ने सामान्य घरेलू वस्तुओं, इलेक्ट्रॉनिक्स उपकरणों की खरीदी कर धनतेरस की रस्म निभाई। बाजारों में भीड़ का फायदा चाट-चटौनी व चाय पान की दुकान लगाने वालों ने भी खूब उठाया। बाजार हाट कर हारी थकी जनता ने चाय नाश्ता कर घरों की ओर रूख किया।