टीईटी परीक्षा, शिक्षकों के सम्मान से खिलवाड़, राष्ट्रनिर्माताओं की पात्रता परीक्षा अनुचित : अटल


जबलपुर। 25 से 28 वर्ष की सेवा दे रहे शिक्षकों के लिए पुनःटीईटी परीक्षा, शिक्षकों के सम्मान से खिलवाड़ है। रिटायर होने वाले और शिक्षक सम्मान पाने वाले भी क्या अज्ञानी है। शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) अनिवार्य करने के निर्णय का शिक्षकों में भारी विरोध है।

ज्ञान प्रदान करने वाले शिक्षकों को परीक्षा में पास या फेल का प्रमाण पत्र देना अनुचित है। पुनः परीक्षा का अर्थ यह भी होगा कि पहले निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन नहीं हुआ, शिक्षकों ने पूर्व में निर्धारित पात्रता परीक्षाएं एवं चयन प्रक्रियाएं सफलतापूर्वक पूर्ण की थीं, तभी नियुक्ति हुई है।

जो शिक्षक सेवा निवृत होने की कगार में है क्या वह भी अज्ञानी है जो परीक्षा ली जाएगी, प्रश्न यह उठ रहा है कि यदि परीक्षा में फैल हो गए तो उन्हें सेवा से बर्खास्त कर दिया जाएगा। कर्मचारी हितैषी सरकार का दायित्व है कि वर्तमान समय में शिक्षकों के इस विषय पर सुप्रीम कोर्ट में अपनी याचिका दायर करे।


भर्ती के समय जो नियम थे, वे सरकार द्वारा बनाए गए थे, इसमें शिक्षकों की कोई गलती नहीं है। जिन शिक्षकों ने कम वेतन में भी राष्ट्र निर्माण का कार्य किया, उन्हें सम्मानित करने के स्थान पर ,टीईटी परीक्षा पास की कार्यवाही पर विचार होना चाहिए।


मध्य प्रदेश कर्मचारी संघ संघ के अटल उपाध्याय, नरेश शुक्ला, प्रशांत सौंधिया, के जी पाठक, दाल चंद पासी, बृजेश मिश्रा, रामदास बरकड़े, हरीश पचौरी, योगेंद्र मिश्रा, राम शंकर शुक्ला , मंसूर वेग, गगन चौबे, राहुल पांडेय, अर्जुन सोमवंशी, सांध्य पाठक, ममता दुबे, रीता खण्डेलवाल, सुनीता घंगोरिया, सुरेन्द्र जायसवाल, रेखा पवार,अर्जुन सोमवंशी, राकेश उपाध्याय, विनय नामदेव ने शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) अनिवार्य करने के निर्णय को निरस्त करने की मांग की है।