जबलपुर। जबलपुर की राइट टाउन स्थित ऐतिहासिक टेलीकॉम फैक्ट्री को बेचने की किसी भी योजना का जबलपुर संघर्ष समिति ने कड़ा विरोध किया है। समिति एवं सभी हितधारकों का मानना है कि फैक्ट्री को बेचने की बजाय इसे टेलीकॉम क्लस्टर के रूप में विकसित किया जाए, जिससे क्षेत्रीय औद्योगिक विकास को नई दिशा मिले और रोजगार के अवसर बढ़ें। उल्लेखनीय है कि उक्त फैक्ट्री को बेचने के लिए सरकार ने सूचना जारी की है।
फेडेरेशन ऑफ मध्यप्रदेश चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के उपाध्यक्ष एवं जबलपुर संघर्ष समिति के संयोजक हिमांशु खरे ने बताया कि जबलपुर टेलीकॉम फैक्ट्री दशकों से देश की दूरसंचार जरूरतों को पूरा करने में अग्रणी रही है। यहां उपलब्ध विशाल भूमि, तकनीकी आधारभूत सुविधाएँ, प्रशिक्षित मानव संसाधन और रणनीतिक लोकेशन इसे टेलीकॉम एवं इलेक्ट्रॉनिक विनिर्माण क्लस्टर में बदलने के लिए उपयुक्त बनाती हैं।
हिमांशु खरे के अनुसार फैक्ट्री को आधुनिक तकनीक, 5जी एवं आईओटी आधारित उत्पाद निर्माण की दिशा में अपग्रेड किया जा सकता है।
एमएसएमई, स्टार्टअप और बड़े औद्योगिक समूहों को एक ही परिसर में उत्पादन सुविधा मिलने से जबलपुर मध्य भारत का प्रमुख टेलीकॉम हब बन सकता है।
क्लस्टर मॉडल से हजारों प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होंगे और शहर की औद्योगिक पहचान मजबूत होगी।
समिति ने रखी ये प्रमुख माँग…….
जबलपुर टेलीकॉम फैक्ट्री को किसी भी प्रकार की बिक्री प्रक्रिया से बाहर रखा जाए।
यहाँ टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर विकसित कर 4जी, 5जी उपकरण, ऑप्टिकल फाइबर, इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम, और वायरलेस टेक्नोलॉजी निर्माण को बढ़ावा दिया जाए।
निवेश आकर्षित करने के लिए विशेष औद्योगिक नीति और स्टार्टअप-इनोवेशन सेंटर स्थापित किए जाएँ।_
फैक्ट्री परिसर का उपयोग “मेक इन इंडिया” और “आत्मनिर्भर भारत” के अनुरूप तकनीकी उत्पादन केंद्र के रूप में किया जाए।
समिति के बलदीप मैनी, मनु शरत तिवारी, हिमांशु राय, सोहन परोहा, आई के खन्ना, प्रीति चौधरी, सुनील श्रीवास्तव का कहना है कि फैक्ट्री को बेच देना न केवल शहर के औद्योगिक भविष्य को नुकसान पहुँचाएगा बल्कि राष्ट्रीय दूरसंचार निर्माण क्षमता को भी कमजोर करेगा। समिति के संदेश जैन, जितेंद्र पचौरी, दीपक सेठी ने कहा कि यह आवश्यक है कि सरकार दूरदर्शी निर्णय लेते हुए जबलपुर को भारत का महत्वपूर्ण टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने की दिशा में कदम उठाए। इस आशय हेतु केंद्रीय दूरसंचार विभाग, एमएसएमई विभाग तथा प्रदेश के मुख्यमंत्री से भी चर्चा की जाएगी।