भारतीय ज्ञान प्रणाली और सतत विकास के लिए अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन:

छिंदवाड़ा, मध्यप्रदेश | 18–22 फरवरी 2026
छिंदवाड़ा की धरती पर 18 से 22 फरवरी 2026 तक भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक सतत विकास के समन्वय को समर्पित एक ऐतिहासिक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है। IPS कॉलेज एवं छिंदवाड़ा विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित यह सम्मेलन “विकसित भारत – रोडमैप 2047” की अवधारणा को साकार करने की दिशा में एक सशक्त पहल है।
यह वैश्विक मंच विश्वभर के शिक्षाविदों, नीति-निर्माताओं, शोधकर्ताओं और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों को एक साथ लाकर भारतीय ज्ञान प्रणाली के बहुआयामी योगदान पर विचार-विमर्श का अवसर प्रदान करेगा। सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य प्राचीन भारतीय ज्ञान को समकालीन वैज्ञानिक दृष्टिकोण और नवाचारों के साथ जोड़कर एक समावेशी, आत्मनिर्भर और सतत भारत के निर्माण की रूपरेखा तैयार करना है।
प्रमुख विशिष्ट अतिथि एवं गणमान्य व्यक्तित्व
मध्यप्रदेश के माननीय राज्यपाल – जिनकी गरिमामयी उपस्थिति राज्य के शैक्षिक और सतत विकास के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
श्री कमलनाथ जी, मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री – जिनका दूरदर्शी नेतृत्व और विकास के प्रति समर्पण समाज के लिए प्रेरणास्रोत है।
पद्मश्री उमाशंकर जी पांडे जी – भारतीय सांस्कृतिक एवं सामाजिक क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान हेतु सम्मानित व्यक्तित्व।
श्री अरत्रारी दास, निदेशक, FDDI – कौशल विकास और उद्योग-शिक्षा समन्वय के क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभाने वाले प्रख्यात प्रशासक।
प्रो. डॉ. आई.पी. त्रिपाठी, कुलपति, छिंदवाड़ा विश्वविद्यालय।
डॉ. जामनी खवारे, प्राचार्य, IPS कॉलेज।
डॉ. युवराज पाटिल, रजिस्ट्रार, छिंदवाड़ा विश्वविद्यालय।
डॉ. एम. के. शर्मा एवं श्री केविन बजार्ड, इम्पीरियल कॉलेज ऑफ साइंस, इंग्लैंड।
डॉ. थॉमस कील, ज्यूरिख विश्वविद्यालय, स्विट्ज़रलैंड।
डॉ. कामेश सतीश पवार, शोध छात्र एवं अंतरराष्ट्रीय संबंध निदेशक, एडविन INC., नई दिल्ली तथा दक्षिण एशिया प्रबंधन संघ (SAMA) के उपाध्यक्ष।
डॉ. कामेश सतीश पवार के विशेष मार्गदर्शन और सक्रिय नेतृत्व में इस सम्मेलन को अंतरराष्ट्रीय स्वरूप प्रदान किया गया है। उन्होंने वैश्विक शैक्षणिक साझेदारियों को सुदृढ़ करते हुए भारतीय पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक सतत विकास मॉडल से जोड़ने की दिशा में उल्लेखनीय योगदान दिया है।
शोध एवं विमर्श के प्रमुख आयाम
सम्मेलन के लिए 400 से अधिक शोध-पत्र प्राप्त हुए हैं, जो सतत विकास, स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक नवाचार और नीति-निर्माण जैसे विविध विषयों को समाहित करते हैं। चयनित शोध-पत्रों का प्रस्तुतीकरण विशेषज्ञ सत्रों में किया जाएगा, जिससे अकादमिक गुणवत्ता और व्यावहारिक समाधान दोनों को बढ़ावा मिलेगा।
यह सम्मेलन न केवल बौद्धिक आदान-प्रदान का मंच बनेगा, बल्कि भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में ठोस नीतिगत सुझाव और कार्ययोजनाएँ भी प्रस्तुत करेगा।

भारतीय ज्ञान परंपरा की जड़ों से शक्ति लेकर और वैश्विक सहयोग की शाखाओं को विस्तार देते हुए, यह सम्मेलन सतत, समृद्ध और आत्मनिर्भर भारत की ओर एक निर्णायक कदम है। छिंदवाड़ा से उठी यह पहल राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई प्रेरणा का स्रोत बनेगी।