जबलपुर । उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच ने नगर निगम आयुक्त को एक वैधानिक नोटिस देकर कहा है कि जबलपुर के सभी सीवर ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) को पूर्ण क्षमता के अनुसार 100 प्रतिशत कार्यक्षमता विकसित की जाए| एसटीपी प्लांट जल गुणवत्ता मापदंडों के तहत सक्रिय होना चाहिए| तीन वर्ष पूर्व जबलपुर में 100 प्रतिशत क्षमता से काम कर रहे एसटीपी प्लांट अब बंद पड़े हैं| इसकी मुख्य वजह मेंटनेंस की अनदेखी सामने आई है| उपभोक्ता मंच ने मांग की है कि इस संदर्भ में समिति गठित कर शीघ्र ही जांच शुरु कराई जाए |
नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच के अध्यक्ष डॉ.पीजी नाजपांडे तथा रजत भार्गव ने मंगलवार को आयुक्त नगर निगम को यह नोटिस सौंपा| उन्होंने बताया कि एनजीटी के 28 जनवरी के आदेश के अनुसार वर्ष 2023 में एसटीपी 100 प्रतिशत कार्य कर रहे थे| लेकिन अब वर्ष 2026 में 16 में से 12 कार्यरत है तथा 4 प्लांट बंद हैं|
ये प्लांट हैं बंद ……..
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के हवाले से कहा गया है कि उमाघाट (गौरीघाट)- क्षमता 0.55 एमएलडी बंद पड़ा हैं, इसी तरह ललपुर (तहसील गोरखपुर)- क्षमता 34 एमएलडी तथा रानीताल तालाब- क्षमता 5 एमएलडी, गुलौआ तालाब- क्षमता 0.50 एमएलडी बंद पड़े हैं|
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा प्रस्तुत इस रिपोर्ट से यह तथ्य सामने आया है कि वर्ष 2023 तथा 2026 के बीच पिछले तीन वर्षों में मेंटनेंस की अनदेखी की गई है|
पुन: एनजीटी की शरण लेंगे…….
एडवोकेट प्रभात यादव ने बताया कि यदि 24 घंटों के भीतर कार्रवाई नहीं की गई तो नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल में पुन: शरण लेंगे|