जो सबमें रमे और सबको खुद में रमाए वो हैं श्रीराम



अवधपुरी गौरीघाट में  रामभद्राचार्य  ने की राम जनम के हेतू की व्याख्या*

जबलपुर। मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम का जन्म सिर्फ विप्र-धेनु, सुर-संत हित के लिए नहीं है, उनका जन्म पूरे जगत के मंगल के लिए है। श्रीरामचरित मानस में गोस्वामी तुलसी दास जी ने ‘राम सत्यसंध पालक श्रुति श्रेतू-राम जनमु जग मंगल हेतू’ चौपाई में इसकी व्याख्या भी की है। इस आशय के मंगल वचन पद्म विभूषण, रामानंदाचार्य जगदगुरु श्री रामभद्राचार्य जी मजाराज ने आयुर्वेद कॉलेज मैदान गौरीघाट स्थित अवधपुरी में नौ दिवसीय श्रीराम कथा के मंगलाचरण में कही।

श्रीराम जनम के मांगल्य को अनेक उद्धरणों के माध्मम से बताते हुए महाराजश्री ने कहा कि जगत में सब कुछ मंगल हो, इस कारण रामजी का जन्म हुआ है। उन्होंने मानस चौपाई ‘चिदानंद मय देह तुम्हारी’ के माध्यम से भगवान के प्रकट होने संबंधी दिव्यता का वर्णन करते हुए कहा कि भगवान में विकार नहीं होता। निज इच्छा निर्मित तनु में निर्मित का अर्थ उन्होंने प्रकटित बताते हुए कहा कि भगवान श्रीराम ने भक्तों की इच्छा से वसीभूत होकर अपने शरीर को प्रकट किया। वस्तुत: जगत में जितने लोग और जीव हैं, सभी का मंगल करने के लिए राम का जन्म हो रहा है। उन्होंने कहा कि प्रभु श्रीराम माया, तीनों गुण और गो यानी इंद्रिया से परे हैं। उन्होंने कहा कि रावण ने जगत का मंगल जब समाप्त कर दिया। सब कुछ जगत में अमंगल हो रहा था, तब भगवान का जन्म हुआ।

*जगत की वासना खंडित करती हैं नर्मदा -*

मां नर्मदा की निर्मलता और श्रीराम की सुंदरता का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि ये सारा संसार जानता है कि नर्मदा ऐसी महारानी नदी है कि किसी में मोहित नहीं होती। नर्मदा का अर्थ है नर्माणि। निर्मलता उनकी पहचान है। वस्तुत: जो जगत की वासना को खंडित कर दे उसे कहते हैं नर्मदा। समुद्र से भी इनका कोई संपर्क नहीं। पर रामजी इतने सुंदर हैं, कि इनको देख कर नर्मदाजी भी मोहित हो गर्इं। नर्मदा ने कहा मेरे तट पर आपको कुटी बनानी ही पड़ेगी। उन्होंने कहा कि रामजी के चरित्र का जादू ही ऐसा है कि कोई कितना भी कोई दुष्ट हो, वो मोहित हो ही जाता है। उन्होंने कहा कि जो सबको खुद में रमाए और खुद सबमें रमें वो हैं श्रीराम।

*राम को समझने चाहिए आठ सिद्धांत -*

महाराजश्री ने कहा कि परमात्मा श्रीराम को समझने के लिए आठ सिद्धांत चाहिए। ये हैं, व्याकरण उपमाना कोष, आप्तवाक्य व्यवहार, वाक्य शेष, विव्रत्ति और सानिध्य। इन आठ सिद्धांतों के आधार पर हम सिद्ध पदों के अर्थ का निर्धारण करते हैं। वशिष्ठ जी ने श्रीभरत को अयोध्या कांड में बताते हुए कहा कि राम शब्द सिद्ध पद है। हमने इसे नहीं बनाया, अनादि काल से अपौरुषेय राम शब्द की व्याख्या कर रहे हैं। रा का अर्थ हैं देना और म का अर्थ हैं मंगल। तो जो सबको सदा मंगल ही देते रहते हैं उनका नाम है राम। तभी उनके चरित का गायन मंगल भवन अमंगल हारी है। महाराज श्री ने गाइये गणपति जगवंदन, शंकर सुमन भवानी नंदन..स्तुति से कथा का श्रीगणेश किया। उनकी सरस मृदुल मीठी वाणी से गणपति स्तुति सुन श्रोता भाव विभोर हो गए। इसके उपरांत उन्होंने नीलांभुजग श्यामल कोमलांगं..नमामि रामं रघुवंश नाथम स्तुति से अपने आराध्य भगवान श्रीराम का स्मरण किया। और फिर श्रीगुरु चरण सरोज रज..कहते हुए गुरु वंदन किया।

*मानस को समझने संस्कृत आवश्यक -*

महाराजश्री ने कहा कि मानस को समझने के लिए संस्कृत पढ़ना आवश्यकता है। व्याकरण न समझने के कारण राम के उदात्त चरित के अर्थ का भी अनर्थ हो जाता है। उन्होंने कहा कि संस्कृत का प्रसार-प्रचार और विस्तार हो, इसके लिए वे चित्रकूट में संस्कृत संस्कृति गुरुकुलम की स्थापन कर रहे हैं। इसका भवन तैयार है, जिसका शुभारंभ वे आगामी 14 जनवरी को करेंगे। इससे पूर्व वे 6 माह के अज्ञात वास में रहकर चिंतन करेंगे। उन्होंने बताया कि भारतीय वैदिक संस्कृति की प्रत्येक विधा को इस गुरुकुल में पढ़ाया जाएगा। हम अपने छहो दर्शन, साहित्य न्याय, वैशेषिक, पूर्व मीमांशा और मानसजी, भागवतजी इस गुरुकुृल में पढ़ाएंगे। यही नहीं संस्कृत के साथ विद्यार्थियों को अंग्रेजी का भी अच्छा अभ्यास कराएंगे, ताकि बटुक विदेशों में जाकर भारतीय वैदिक संस्कृति का प्रचार कर सकें। उन्होंने कहा कि इसके लिए संस्कारधानी से मुझे बहुत सहयोग चाहिए।

*संतो का मिला सानिध्य -* श्रीराम कथा में जगद्गुरु भगवान का पूज्य संत सुखानंद द्वाराचार्य जगद्गुरु स्वामी राघवदेवाचार्य जी महाराज, आचार्य रामचंद्र दास जी युवराज, दादा पगलानंद जी महाराज, गिरिजानंद जी महाराज, स्वामी रामबहादुर जी महाराज,चंद्रशेखरानंद जी महाराज, योगी राजेश दास, स्वामी सुरेन्द्र दास, का सानिध्य रहा।



*मंच पर हुए समरसता के दर्शन -*

कथा जिस समररसता के पावन उद्देश्य के लिए हो रही है, उसके सजीव दर्शन मंच पर हुए। ऐसा अवसर प्रथम बार देखने मिला कि किसी भी धार्मिक कथा या आयोजन में समरसता की अलख जगाते हुए सर्व समाज की सहभागिता हो।

राज्यसभा सांसद श्रीमती सुमित्रा वाल्मीकी, विधायक सुशील तिवारी इंदु, अभिलाष पांडे, भाजपा जिला अध्यक्ष रत्नेश सोनकर, नगर निगम अध्यक्ष रिंकूज विज, लेखराज सिंह मुन्ना, प्रो आशुतोष दुबे ने जगद्गुरु का पूजन किया।

आयोजक समरसता सेवा संगठन के अध्यक्ष संदीप जैन, आयोजन समिति अध्यक्ष डॉ जितेंद्र जामदार, सचिव अखिल मिश्रा, स्वागत समिति अध्यक्ष गुलशन मखीजा, मुख्य यजमान डॉ राजेश धीरावाणी, पं. रोहित दुबे, पं ब्रजेश दीक्षित ने विधि विधान से पादुका पूजन किया।

सभी यजमानों ने भी पूजन का विधान किया। संदीप जैन ने व्यास पूजन के बाद महाराजश्री का माल्यार्पण कर स्वागत किया। श्री जैन ने मंच पर उपस्थित द्वाराचार्य राघवदेवाचार्य सहित सभी संतों का पूजन किया।

महाराजश्री का स्वागत नगर के स्वामी राजेश्वरानंद जी, राम बहादुर महाराज, गिरिजानंद महाराज चंद्रशेखरानंद महाराज, राज्यसभा सांसद सुमित्रा बाल्मीक, समाज सेवी लेखराज सिंह मुन्ना, नगर भाजपा अध्यक्ष रत्नेश सोनकर, आषुतोष दुबे ने महारजाश्री का माल्यार्पण कर स्वागत किया।

मंच पर 41 समाजों के प्रतिनिधि कथा के यजमान थे। इनमे डॉ. राजेश धीरावाणी (गुजराती समाज) मुख्य यजमान होंगे। साथ ही सुदर्शन जगदीश चौहटेल (सुदर्शन समाज), दास प्रसाद अहिरवार (अहिरवार समाज),  दीपक मेहरोलिया (बाल्मीक), डॉ अमीर चन्द्र सोनकर (सोनकर समाज), श्री बब्वल रजक (रजक समाज),  राजू चौरसिया (चौरसिया समा), सुशील सोनी (सोनी समाज),प्रवीण वर्मा (कायस्थ ), प्रदीप चौकसे, आशीष राय कल्चुरी समाज सहित सभी समाजों के प्रतिनिधि शामिल थे। मंच का सफल संचालन करते हुए ब्रजेश दीक्षित ने कहा कि गुरुदेव की कथा, कथा नहीं अनुष्ठान होती है। उन्होंने महाराजश्री के राम प्रेम, राष्ट्र प्रेम और चराचर जगत को लेकर गुरुदेव की जीवन तपस्या की भी चर्चा की।

*कलश शोभायात्रा ने रचा इतिहास -*

कथा के पूर्व समरसता सेवा संगठन की ‘नर्मदा कलश यात्रा’ ने इतिहास रच दिया। समरसता सेवा संगठन अपने आयोजनों के लिए तीन सालों से प्रशंसा का पात्र रहा है। कजलियां-रंगपंचमी की तरह ‘नर्मदा कलश यात्रा’ ने भी भव्यता-दिव्यता के कीर्तिमान रचे। नर्मदातट के गौरीघाट स्थित नावघाट में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच मां नर्मदा का पूजन-अनुष्ठान और अभिषेक किया गया। इसके उपरांत बाजे-गाजे के साथ नर्मदा कलश यात्रा अवधपुरी स्थित कथा स्थल के लिए रवाना हुई। यात्रा में 15 से अधिक झांकियां थीं। बैंड-धमाल-ढोल के अलावा बड़ी श्रद्धा के साथ ‘नर्मदा कलश’ की झांकी शोभायमान थी। भक्त मंडली द्वारा मधुर ध्वनि से संकीर्तन किया गया। इसके साथ ही भगवान भोलेनाथ, राम दरबार, निषाद प्रसंग, शबरी प्रसंग की चलित झांकी के सबने दर्शन किए। महाराजश्री कथाव्यास जगदगुरु श्री रामभद्राचार्य भी रथ पर सवार थे। उसके पीछे शहर के संतजनों के रथ थे। कथा में हजारों की संख्या में मातृशक्तिया सर पर कलश लेकर चल रहीं थीं।

*जब श्रीराम ने सुनाई नवधा भक्ति -*

कथा पूर्व नाट्य लोक सांस्कृतिक एवं सामाजिक संस्था द्वारा ‘भक्तिमती शबरी’ नाटिका प्रस्तुत की गई जिसमें प्रभु श्रीराम ने माता शबरी को नवधा भक्ति सुनाई। आज सोमवार को संस्था द्वारा ‘रानी दुर्गावती’ शीर्षक से नृत्य नाटिका प्रस्तुत की जाएगी। भक्तिमती शबरी नाटिका में प्रभु श्रीराम ने माता शबरी को नवधा भक्ति की कथा सुनाई। उन्होंने संतों का संग, भगवान की कथा सुनना, अभिमान रहित गुरु सेवा, प्रभु का गुणगान करना सहित सभी नौ भक्ति का वर्णन किया। इस अवसर पर समरसता का सार सुनाते हुए माता शबरी ने कहा कि ये भक्ति का ही प्रताप है कि मतंग के आश्रम में शेर-बकरी एक साथ बैठते हैं। वहां समरसता है, भेदभाव तो ज्ञान में छू नहीं जाते। प्रस्तुति में श्रीराम ने माता शबरी से कहा कि मैया, मैं ऊंच नीच का भेद भाव नहीं मानता। स्त्री पुरुष नाम रूप से गुण में भी रहा न कोई नाता-भक्ति भावना निर्मल हो जिसमें स्वीकार करूं हे माता।

*नगर आगमन पर हुआ आत्मीय स्वागत -*

इससे पूर्व रविवार सुबह महाराजश्री का सड़क मार्ग से आगमन होने पर रामानंद परंपरा के राघव देवाचार्य, कथा आयोजक समरसता सेवा संगठन के अध्यक्ष संदीप जैन, कथा समन्वयक अखिल मिश्रा सहित अन्य ने उनका विधि विधान से पूजन-अर्चन किया। राघव देवाचार्य सहित, संदीप जैन, डॉ. जितेन्द्र जामदार सहित संगठन के पदाधिकारियों महाराजश्री का पूजन-अर्चन किया। कथा स्थल पर अयोध्या में विराजित प्रभु श्रीराम लला की अनुपम झांकी ने सबका मन मोह लिया। कथा का शुभारंभ स्वस्ति वाचन से हुआ। आचार्य पं. रोहित दुबे, पं सौरभ दुबे सहित अन्य आचार्यों ने स्वस्ति वाचन किया।

*लोक निर्माण मंत्री ने लिया जगद्गुरु का आशीर्वाद -* मप्र के लोक निर्माण मंत्री श्री राकेश सिंह ने कथा स्थल पहुंचकर जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य जी महाराज का आशीर्वाद लिया।

*चीफ जस्टिस ने लिया आशीर्वाद*

महाराजश्री के आगमन पर रविवार सुबह एमपी हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस श्री संजीव सचदेवा सपरिवार उनसे मिलने पहुंचे। चीफ जस्टिस श्री संजीव सचदेवा के साथ आई उनकी अर्धांगिनी श्रीमती रश्मि सचदेवा से महराजश्री ने कहा कि आप के पति आदर्श पति हैं। उन्होंने कहा कि अमूमन यही सुनने में आता है कि पत्नी ही पति के लिए किडनी दान करती है। लेकिन ये जानकर मैं अति प्रसन्न हूं कि श्री सचदेवा ने अपनी पत्नी के लिए किडनी दान की है। ऐसा करके उन्होंने दांपत्य संस्कार के प्रति गहन आस्था का संदेश समाज को दिया है। महाराजश्री ने कहा कि सनातन धर्म में ही ऐसे संस्कार हैं। जो न सिर्फ परिवार को सुखद बनाते हैं, बल्कि समाज में भी एकता का संचार करते हैं।

*लोक निर्माण मंत्री ने लिया जगद्गुरु का आशीर्वाद -* मप्र के लोक निर्माण मंत्री श्री राकेश सिंह ने कथा स्थल पहुंचकर जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य जी महाराज का आशीर्वाद लिया।

*प्रभु प्रेमियों का उत्साह देख कर हुए प्रसन्न -*

महारज श्री समरसता जैसे पावन उद्देश्य के लिए शहर में हो रही राम कथा के प्रति आयोजक संस्था के सदस्यों का उत्साह देख कर खुश हुए। उन्होंने अध्यक्ष संदीप जैन की तारीफ करते हुए कहा कि वे अपने नाम के अनुरूप एक दीप की तरह समाज को रोशन कर रहे हैं। मैं उन्हें और उनकी टीम को बहुत-बहुत आशीर्वाद देता हूं। महाराजश्री को सुनने कथा पंडाल में अपार जनमेदिनी उमड़ी। पंडाल के बाहर सभी भक्तजनों को भोग प्रसादी का वितरण किया गया।

आयोजन समिति, स्वागत समिति, समरसता सेवा संगठन  ने संस्कारधानी वासियों से नित्य प्रति सायं 4.30 बजे से 7.30 बजे तक हो रही श्रीराम कथा में अधिकाधिक संख्या में पहुंच कर कथा श्रवण लाभ लेने की अपील की है