नया शिक्षण सत्र आज से, महंगाई से बढ़ी अभिभावकों की चिंता


जबलपुर। गर्मी की छुट्टियों के बाद मंगलवार से शहर के अधिकांश स्कूलों में नया शैक्षणिक सत्र शुरू होने जा रहा है। एक ओर बच्चे नए बैग, नई किताबों और नए दोस्तों से मिलने को लेकर उत्साहित हैं, वहीं दूसरी ओर अभिभावकों के सामने बढ़ते शैक्षणिक खर्चों की चुनौती खड़ी है। स्कूल फीस, किताबें, यूनिफॉर्म, जूते, स्टेशनरी और परिवहन शुल्क ने मध्यम वर्गीय परिवारों का बजट बिगाड़ दिया है।
शहर के कई अभिभावकों का कहना है कि हर साल शिक्षा का खर्च लगातार बढ़ रहा है। एक बच्चे की पढ़ाई पर ही हजारों रुपये खर्च हो जाते हैं। जिन परिवारों के दो या तीन बच्चे स्कूल में हैं, उनके लिए नया सत्र किसी आर्थिक परीक्षा से कम नहीं है।

किताबों और यूनिफॉर्म पर सबसे ज्यादा खर्च………

जबलपुर के विभिन्न बाजारों में पिछले एक सप्ताह से स्कूल सामग्री खरीदने वालों की भीड़ देखी जा रही है। किताबों, कॉपियों और यूनिफॉर्म की दुकानों पर अभिभावकों की लंबी कतारें लग रही हैं। कई अभिभावकों का कहना है कि स्कूलों द्वारा निर्धारित दुकानों से सामग्री खरीदने के कारण खर्च और बढ़ जाता है।
एक अभिभावक ने बताया कि बच्चे की वार्षिक फीस के अलावा किताबें, यूनिफॉर्म और अन्य सामग्री पर ही 15 से 20 हजार रुपये तक खर्च हो गए हैं।

मध्यम वर्ग पर सबसे ज्यादा असर…………

विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ती महंगाई के दौर में शिक्षा का खर्च मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए सबसे बड़ी चिंता बनता जा रहा है। घर का किराया, बिजली, चिकित्सा और अन्य जरूरतों के बीच बच्चों की शिक्षा पर होने वाला अतिरिक्त खर्च परिवारों के मासिक बजट को प्रभावित कर रहा है।

बच्चों में उत्साह, अभिभावकों में चिंता………

स्कूल खुलने को लेकर बच्चों में उत्साह का माहौल है। नए बैग, नई कक्षाएं और नए शिक्षक बच्चों को आकर्षित कर रहे हैं। वहीं अभिभावक चाहते हैं कि बच्चों की पढ़ाई में कोई कमी न रहे, लेकिन बढ़ते खर्च उन्हें परेशान कर रहे हैं।

अभिभावकों की मांग………..

शहर के कई अभिभावकों ने मांग की है कि निजी स्कूल फीस वृद्धि पर नियंत्रण रखा जाए और किताबों व यूनिफॉर्म की खरीद में अभिभावकों को विकल्प दिए जाएं। उनका कहना है कि शिक्षा का अधिकार तभी सार्थक होगा जब गुणवत्तापूर्ण शिक्षा आम परिवारों की पहुंच में रहे।
नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत के साथ जबलपुर में जहां स्कूलों की घंटियां फिर से गूंजेंगी, वहीं हजारों परिवारों के लिए बच्चों की पढ़ाई का बढ़ता खर्च एक बड़ी चिंता का विषय बना रहेगा।