रादुविवि में अव्यवस्था पर विधायक लखन घनघोरिया सख्त, विश्वविद्यालय कोर्ट की बैठक में वार्षिक बजट का किया विरोध

जबलपुर। रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय की कोर्ट की बैठक में जबलपुर पूर्व के विधायक एवं विश्वविद्यालय कोर्ट के सदस्य श्री लखन घनघोरिया ने विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर आपत्ति जताते हुए विश्वविद्यालय के वार्षिक बजट का कड़ा विरोध किया। उन्होंने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा प्रस्तुत बजट वास्तविक स्थिति को दर्शाने वाला नहीं है और जब तक प्रशासन अपनी कार्यप्रणाली में पारदर्शिता, जवाबदेही और सुधार नहीं लाता, तब तक ऐसे बजट को अनुमोदित करना उचित नहीं है। श्री घनघोरिया ने विशेष रूप से विश्वविद्यालय के शीर्ष प्रशासनिक अधिकारियों, विशेषकर कुलगुरु की कार्यप्रणाली पर प्रश्न उठाते हुए कहा कि विश्वविद्यालय की गरिमा और शैक्षणिक गुणवत्ता लगातार प्रभावित हो रही है, जो अत्यंत चिंता का विषय है।

श्री घनघोरिया ने कहा कि पिछले कुछ समय से रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय लगातार विभिन्न प्रशासनिक और शैक्षणिक अनियमितताओं को लेकर चर्चा में रहा है। छात्रों की छात्रवृत्ति वितरण में देरी, डिग्री और अंकसूची जारी करने में लंबा विलंब, परीक्षा परिणामों में त्रुटियाँ, परीक्षा प्रक्रियाओं को लेकर उठते सवाल, तथा कई पाठ्यक्रमों के संचालन में आवश्यक संसाधनों की कमी जैसी समस्याओं ने विश्वविद्यालय की साख को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। उन्होंने विशेष रूप से कृषि विभाग की बदहाल स्थिति और बिना पर्याप्त संसाधनों के संचालित बीसीए एवं एमसीए जैसे तकनीकी पाठ्यक्रमों का उल्लेख करते हुए कहा कि यह स्थिति छात्रों के भविष्य के साथ अन्याय है।

विधायक श्री लखन घनघोरिया ने यह भी कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा कई मामलों में जनप्रतिनिधियों और शासन को सही जानकारी उपलब्ध नहीं कराई जा रही है, जिससे भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो रही है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि विश्वविद्यालय जैसे महत्वपूर्ण शैक्षणिक संस्थान में इस प्रकार की अव्यवस्था और गैर-जिम्मेदाराना रवैया स्वीकार्य नहीं हो सकता। उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन से मांग की कि वह अपनी कार्यप्रणाली में व्यापक सुधार लाए, छात्रों से जुड़े मुद्दों का त्वरित समाधान सुनिश्चित करे और विश्वविद्यालय की शैक्षणिक एवं प्रशासनिक गरिमा को पुनः स्थापित करने के लिए ठोस कदम उठाए।

श्री घनघोरिया ने कहा कि जनप्रतिनिधि होने के नाते उनका दायित्व है कि वे छात्रों और विश्वविद्यालय से जुड़े हितों की रक्षा करें। इसी भावना के साथ उन्होंने कोर्ट की बैठक में विश्वविद्यालय के बजट का विरोध किया और प्रशासन को स्पष्ट संदेश दिया कि जब तक व्यवस्था में सुधार नहीं होगा, तब तक जनप्रतिनिधि ऐसे प्रस्तावों का समर्थन नहीं करेंगे।