जबलपुर समर्थ रामदास स्वामी वांग्मय प्रचार प्रसार केंद्र अंतर्गत श्री दत्त भजन मंडळ के द्वारा विगत दिवस स्वर्गीय श.ना. कुलकर्णी पुणे एवं स्वर्गीय प्रभाकर गोरे स्मृती मे “समर्थ रामदास स्वामी के साहित्य मे परिलक्षित प्रपंच एवं परमार्थ की मीमांसा”विषय पर अखिल भारतीय निबंध स्पर्धा आयोजित की गयी थी. स्पर्धकों से कुल 88 निबंध प्राप्त हुए. पुरस्कार वितरण के लिए समर्थ चिंतन शिबिर का आयोजन किया गया. शिबिर का उद्घाटन समर्थ भक्त मोहन बुवा रामदासी अहिल्यानगर, अभय गोरे मुख्य संयोजक, डॉ.जितेंद्र जामदार, विजय भावे, विश्वास पाटणकर एवं सुरेश तोपखानेवाले द्वारा दीप प्रज्वलन से किया गया. अतिथी वक्ताओंका स्वागत श्री शरद आठले अभय गोरे ने किया मंच संचालन श्री विश्वास पाटणकर द्वारा किया गया. निबंध स्पर्धा हेतू कुल 11 हजार रुपये के नगद पुरस्कार एवं स्मृतिचिन्ह रखे गये थे. प्रथम क्रमांक सौ. कुंदा रवींद्र कुलकर्णी मनमाड द्वितीय पुरस्कार श्री अनिल वाकणकर बडोदा एवं तृतीय पुरस्कार सौ. उज्वला भंडारी धुळे ने प्राप्त किया. सभी स्थानीय स्पर्धक को स्मृतिचिन्ह भेट कीये गये. इस अवसर बोलते हुए समर्थ भक्त मोहन बुवा रामदासी,एवं डॉ. जितेंद्र जामदार, अभय गोरे ने बताया की समर्थ रामदास एक क्रांतिकारी संत थे. जब यवनों के आक्रमण भारत मे हो रहा थे, मंदिरो का विध्वंस हो रहा था,
तब समाज हतबल एवं निष्क्रिय हो चुका था. ऐसी विकट परिस्थिती मे समर्थ रामदास एक राष्ट्र की संकल्पना का आव्हान करते हुए अखंड जनजागृती का कार्य किया. ग्यारासों मठों की स्थापना की. हनुमान मंदिर, अखाडों की निर्मित करके राम की भक्ति और हनुमान की शक्ती का संचार लोगो मे कराया. समर्थ रामदास द्वारा किया गया समाज प्रबोधन तथा जनजागृती छत्रपती शिवाजी महाराज को हिंदवी स्वराज्य की स्थापना मे सहाय्यक रही. समर्थ रामदास का दासबोधग्रंथ एवं मनाचेश्लोक मनुष्य के लौकिक एवं पारलौकिक विकास के लिये महत्वपूर्ण मार्गदर्शक तत्व माने जाते है.
शिबिर मे शिल्पा सप्रे, डॉ.अनुश्री जामदार, मुक्ता पांडे, समृद्धी वर्तक, राधिका गोडबोले द्वारा मनाचेश्लोक विषय पर शोध पत्र प्रस्तुत किये गये. निबंध स्पर्धा परीक्षक डॉ. सारिका ठोसर एवं स्पर्धक सौ.आभार दातार वारा स्पर्धा के आयोजन पर अपने विचार रखें. शिबिर का समापन विणा खेर, मुक्ता ठोसर द्वारा “कल्याणकारी रामराया” प्रार्थना गा कर किया गया.
इस अवसर पर दत्त भजन मंडळ के अध्यक्ष विजय भावे, सचिव शरद आठले, कोषाध्यक्ष मनीष वैद्य, वासुदेवराव गुरव, सदानंद गोडबोले उपस्थित थे. कार्यक्रम को सफल बनाने में समीर कुलकर्णी, नितीन परांजपे सुधीर देव, विनोद परांजपे, मनोज परांजपे,प्रमोद परांजपे, विनय मैराळ,
विजय तेलंग, अर्णव खेर, अभय जोशी, विलास परांजपे, सुधाकर देशपांडे, का सहयोग रहा