पुस्तक ज्ञान जीवन की औषधि है- नयन


जबलपुर। साहित्यिक सामाजिक संस्था काव्य कलश के तत्वावधान में अर्चना गोस्वामी द्वारा सरस्वती वंदना प्रस्तुत की गई। वही शुभ मंगल भाव कवयित्री अर्चना गुदालु ने रखे समारोह में नगर के पांच साहित्यकार की पुस्तकों पर समीक्षा चर्चा की गई जिसमें आचार्य संजीव वर्मा सलिल की कृति जंगल में जनतंत्र, विजय बागरी की कृति महके नेह निकुंज, नवीन चतुर्वेदी की कृति सुनो धनंजय, डॉ अभिजात कृष्ण त्रिपाठी की कृति अब पछताए होत का, पुष्पा गुप्ता प्राजंलि की कृति कुंडलिया कुंज की समीक्षा क्रमशः सुरेंद्र पवार, डॉ.श्रीकांता अवस्थी,सुवीर श्रीवास्तव, डॉ कौशल दुबे, राजकुमार महोबिया द्वारा की गई कृतिकार का परिचय डॉ विनीता पांडेय विनीत, कृष्णा राजपूत,नीता सिंह, अर्चना मलैया, अभय तिवारी ने दिया। इसी क्रम में समीक्षाकार का परिचय क्रमशः विजेंद्र उपाध्याय, मिथलेश नायक, डॉ लक्ष्मी दीक्षित, ज्योत्सना शर्मा, सुभाष मणी बैरागी ने दिया।
समारोह के मुख्य वक्ता वरिष्ठ साहित्यकार इंजीनियर विनोद नयन ने कहा कि पुस्तक ज्ञान जीवन की औषधि है इनका अध्ययन समाज को संस्कारित करता है यह आयोजन एक नवाचार के रूप में किया गया जिसमें समीक्षकों ने सभी पुस्तकों पर एक से बढ़कर एक कथन प्रस्तुत किये। इस बौद्धिक आयोजन में नगर की वरिष्ठ और कनिष्ठ साहित्यकार उपस्थित रहे जिन्होंने चर्चा में बताया कि आज समाज में इस तरह की आयोजन की आवश्यकता है।
सभी का स्वागत काव्य कलश प्रदान कर संस्था के अध्यक्ष डॉ विनोद बाजपेई द्वारा किया गया| समारोह में अमरेंद्र नारायण सिंह, डॉ अनामिका तिवारी, निर्मला तिवारी, दीप्ति गर्ग, डॉ भावना दीक्षित, राजीव गुप्ता, सुरेश विचित्र, अभिमन्यु जैन, उदय भानु तिवारी,व्ही एस दुबे, प्रदीप बकोरे,राजेश शर्मा, इंदु सिंह कंचन, देव दर्शन सिंह, के के नायकर, रत्ना ओझा, गुप्तेश्वर द्वारका गुप्त,पदमा तिवारी, प्रकाश सिंह ठाकुर, डॉ गीता पाण्डे बेबी, गायत्री नीरज चौबे ,प्रीति नामदेव भूमिजा,डॉ आशा श्रीवास्तव आदि की उपस्थिति रही। संचालन बसंत कुमार शर्मा ने किया संयोजन डॉ मकबूल अली ने किया अंत डॉ रानू रूही द्वारा सभी के प्रति आभार व्यक्त किया गया।