जबलपुर। मध्य प्रदेश राज्य कर्मचारी संघ के प्रदेश प्रवक्ता अनिल भार्गव (वायु) एवं जिला अध्यक्ष अटल उपाध्याय ने आरोप लगाया है कि आउटसोर्स कर्मचारियों को ठेके पर काम देने वाली स्थानीय एवं प्रदेश स्तर की कंपनियां अनावश्यक परेशान कर रही है।
नियमित कर्मचारियों के समान अनेक विभागों में कार्य कराया जा रहा है लेकिन जिलों में निर्धारित मजदूरों के मानदेय से भी कम मानदेय दिया जा रहा है। कलेक्ट्रेट, राजस्व, स्वास्थ, पी डब्ल्यू डी, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, हिरण जल संस्थाधन, आई टी आई, पी आई यू, प्रधानमंत्री मंत्री सड़क, आर ई एस, नगर निगम, पंचायत, जनपद में कार्य तो कराया जाता है लेकिन तन्खाह मजदूरों से भी कम दी जाती है,वह भी प्रत्येक माह समय पर नहीं दी जाती है।
मध्य प्रदेश राज्य कर्मचारी संघ के जिला अध्यक्ष अटल उपाध्याय ने बताया है कि आउट सोर्स कर्मी को माह में अवकाश भी नहीं दिए जा रहे है, अवकाश दिवसों में कार्यालय में कार्य संपादित कराए जाते है। कंप्यूटर ऑपरेटर , डेटा एंट्री, प्रोग्रामर को प्रतिमाह 8 से 10 हजार रुपए ही मानदेय के रूप में दिए जा रहे है।
इन कर्मचारियों से अति महत्वपूर्ण कार्य करवाए जाते है, कुछ कार्यालयों में नियमित कर्मचारियों के वेतन तैयार करने, राजस्व विभाग में नोटशीट, नामांतरण के आर्डर, जैसे महत्वपूर्ण कार्य करवाए जा रहे हैं।
संघ के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत श्रीवास्तव प्रदेशमहामंत्री जितेंद्र सिंह ने समस्त विभाग प्रमुखों से शासन के आदेश के तहत समस्त लाभ देने की राय दी है। आउटसोर्सिंग के नाम पर रखे जाने वाले कर्मचारियों को रखने की टेंडर प्रक्रिया जिलों एवं भोपाल स्तर से तय होती है।
स्थानीय अफसर इस मामले में खुलकर भी नहीं बोलते । पिछले 9 से 10 वर्षों से यह शोषण का शिकार हो रहे है, आउटसोर्स कर्मचारियों ने श्रम विभाग से भी कुशल श्रमिकों के समान वेतन दिलाने की अनेक बार गुहार लगाई है। लेकिन उन्हें समान कार्य का समान वेतन नहीं दिलाया गया है।
आज भी समान कार्य का समान वेतन नहीं दिया जा रहा है पी एफ अकाउंट मद में राशि नहीं काटी जा रही है। यह श्रम कानून का खुला उल्लंघन है।
मध्य प्रदेश राज्य कर्मचारी संघ के अटल उपाध्याय, देवेंद्र पचौरी, आलोक अग्निहोत्री, अरुण पटेल, रजनीश पांडेय, सतीष बरकड़े, योगेन्द्र मिश्रा,सुशील गुप्ता, राजाराम डेहरिया, राजू मस्के, नेतराम झारिया, मनीष कुलस्ते, के जी पाठक,अजीत वर्मा, अमित शुक्ला, आकाश गुप्ता ने आउटसोर्स कर्मचारियों को समान कार्य का समान वेतन की तर्ज पर मानदेय देने के साथ ही प्रति माह एक तारीख को मानदेय देने की मांग की है।