चरणबद्ध ओटी एरियर भुगतान से ओएफके कर्मी नाराज, सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार एक मुश्त के भुगतान की मांग


जबलपुर । सुप्रीम कोर्ट तक लंबी कानूनी लड़ाई के बाद ओवर टाईम (ओटी) का भुगतान किए जाने आदेश के बावजूद अब तक कर्मचारियों को एक मुश्त एरियर का भुगतान नहीं मिला, जिससे नाराज होकर आयुध निर्माणी खमरिया (ओएफके) में संयुक्त संघर्ष समिति में शामिल यूनियनों के पदाधिकारियों ने प्रदर्शन कर म्युनिशंस इंडिया लिमिटेड (एमआईएल) सीएमडी के केवल मार्च 2026 से भुगतान तथा आंशिक एरियर संबंधी एक फरमान के खिलाफ मुख्य महाप्रबंधक को अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक (सीएमडी) म्युनिशंस इंडिया लिमिटेड (एमआईएल) पुणे के नाम एक ज्ञापन सौंपते हुए सुप्रीम कोर्ट के आदेश अनुसार ओटी एरियर का एकमुश्त भुगतान की मांग की।


इस संबंध में संयुक्त संघर्ष समिति पदाधिकारियों के मुताबिक सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 20 जनवरी को पारित निर्णय के माध्यम से ओटी एरियर संबंधी विवाद पर अंतिम निर्णय दिया जा चुका है। इस निर्णय के उपरांत कर्मचारियों की अपेक्षा थी ‎ कि एमआईएल प्रबंधन बिना किसी देर के सभी पात्र कर्मचारियों को 1 जनवरी 2006 से देय समस्त लंबित ओटी एरियर एरियर का पूर्ण भुगतान सुनिश्चित करेगा किन्तु एमआईएल द्वारा हाल ही में 06 फरवरी को जारी पत्र में केवल मार्च 2026 से भुगतान तथा आंशिक एरियर की ही बात कही गई है। विशेष रूप से 30 सितंबर 2021 (निगमीकरण पूर्व अवधि) के बकाये को “फंड उपलब्धता” एवं “ एनडीसीडी की स्वीकृति” के नाम पर अनिश्चितकाल तक लंबित रखना न्यायसंगत प्रतीत नहीं होता।


समिति पदाधिकारियों के अनुसार अन्य रक्षा सार्वजनिक उपक्रमों ( डीपीएसयू) ने समान न्यायिक आदेशों का पालन करते हुए अपने कर्मचारियों को पूर्ण एरियर का भुगतान कर दिया है। ऐसी स्थिति में केवल एम आई एल द्वारा भुगतान को चरणबद्ध अथवा आंशिक रूप से लागू करना कर्मचारियों के साथ असमान व्यवहार किया जा रहा है।


यूनियन पदाधिकारियों ने एम आई एल प्रबंधन से अपील की है कि सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का पूर्ण एवं निष्पक्ष अनुपालन सुनिश्चित किया जाए और 01जनवरी 2006 से दिनांकित समस्त लंबित ओटी एरियर का एकमुश्त भुगतान करें। इस अवसर पर संयुक्त संघर्ष समिति के राजेंद्र चराडिया, अर्नबदास गुप्ता, रूपेश पाठक, अजय यादव, अमित चौबे, प्रेम लाल, पुष्पेंद सिंह, राजीव तिवारी, राजीव रंजन, संजय प्रधान आदि उपस्थित थे।