नर्मदा बाढ़ क्षेत्र से स्थायी निर्माण हटाए जाए, एनजीटी का सख्त आदेश, नदी किनारे डेयरियां भी न रहे


जबलपुर । नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल (सेंट्रल जोन) के न्यायमूर्ति शेवकुमार सिंह तथा एक्सपर्ट मेंबर सुधीर कुमार चतुर्वेदी ने ओ.ए. 71 में पूर्व में जारी किए निर्देशों को दोहराते हुए आदेश दिए कि नर्मदा के बाढ़ क्षेत्र का सीमांकन कर स्थायी निर्माणों को हटाया जाए, इस क्षेत्र में स्थायी निर्माणों पर रोक लगे|


उन्होंने ओ.ए.139 में जारी आदेशों का पालन करने के सख्त निर्देश दिए की नर्मदा, परियट तथा गौर के किनारे स्थापित डेयरियों को हटाया जाकर उन्हें नई जगह पर बसाया जाए, ताकि नर्मदा में गंदगी नहीं जा सके|


एनजीटी ने यह निर्देश डॉ.पीजी नाजपांडे द्वारा दायर याचिका के सिलसिले में 28 जनवरी को जारी किए है| याचिकाकर्ता ने शिकायत की है कि पिछले 3 वर्षों में नर्मदा के बाढ़ क्षेत्रों का सीमांकन नहीं हुआ, वहां के अतिक्रमण नहीं हटाए गए हैं|

याचिकाकर्ता के एड.प्रतीक जैन ने ट्रिब्युनल को ओ.ए.139 में जारी आदेशों का हवाला देकर बताया कि डेयरियों नहीं हटने से नर्मदा में उनकी गंदगी जा रही है|


एनजीटी ने आदेश में बताया कि पिछले 25 वर्षों के आंकलन के आधार पर नर्मदा का बाढ़ क्षेत्र सीमांकित किया जाए, नदी से 100 मीटर के भीतर तक प्लास्टिक पर पूर्ण प्रतिबंध हो|


कलेक्टर पर डेयरी संबंधी पूर्ण जिम्मेदारी सौंपते हुए कहा कि पूर्व के आदेश का पालन करें, जिसमें परियट के किनारे 40, गौर किनारे 12 तथा नर्मदा पर 25 डेयरियां पाई गई थी|

जबलपुर में 4 एसटीपी बंद पड़े …………

एनजीटी के आदेश में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के रिपोर्ट का उल्लेख है, जिसमें जबलपुर शहर में स्थापित 16 एसटीपी में से 12 कार्यरत तथा 4 बंद की स्थिति में बताये गए है| ललपुर, उमाघाट (गौरीघाट), रानीताल तालाब तथा गुलौआ तालाब के एसटीपी बंद पड़े है|