नवीन अधिवक्ताओं को स्टाइपेंड या राहत निधि देने की मांग,

जबलपुर। कानून की पढ़ाई पूरी करने के बाद न्यायालयों में प्रैक्टिस शुरू करने वाले युवा अधिवक्ताओं के सामने शुरुआती वर्षों में आने वाली आर्थिक चुनौतियों को देखते हुए मानव अधिकार एवं अपराध नियंत्रण संगठन ने मध्य प्रदेश सरकार से नवीन अधिवक्ताओं के लिए विशेष आर्थिक सहायता योजना शुरू करने की मांग की है। संगठन ने मुख्यमंत्री के नाम भेजे पत्र में मांग की है कि एक से पांच वर्ष तक की शुरुआती प्रैक्टिस करने वाले आर्थिक रूप से कमजोर अधिवक्ताओं को प्रतिवर्ष उचित राशि स्टाइपेंड अथवा अधिवक्ता राहत निधि के रूप में उपलब्ध कराई जाए।

कई महीनों तक नहीं होती नियमित आमदनी

संगठन का कहना है कि विधि की पढ़ाई पूरी करने के बाद जब युवा अधिवक्ता न्यायालयों में प्रैक्टिस शुरू करते हैं, तो शुरुआती दौर में पर्याप्त मामले और नियमित आय मिलना बड़ी चुनौती होती है। कई अधिवक्ताओं को कई-कई महीनों तक पर्याप्त आमदनी नहीं हो पाती। ऐसे में चैंबर, पुस्तकें, कानून संबंधी सामग्री, आवागमन और अन्य व्यावसायिक खर्चों का भार उठाना उनके लिए मुश्किल हो जाता है।

आर्थिक परेशानियों के चलते कई प्रतिभाशाली युवा अधिवक्ताओं को अपनी प्रैक्टिस बीच में छोड़कर दूसरे व्यवसायों की ओर रुख करना पड़ता है। संगठन ने कहा कि इसका सीधा असर न्याय व्यवस्था में आने वाली नई प्रतिभाओं पर पड़ता है।

‘न्याय व्यवस्था की मजबूत नींव हैं युवा अधिवक्ता’

संगठन ने कहा कि अधिवक्ता केवल एक पेशे से जुड़े व्यक्ति नहीं, बल्कि संविधान, न्याय, नागरिक अधिकारों और विधिक जागरूकता के महत्वपूर्ण प्रहरी हैं। युवा अधिवक्ता ही भविष्य में न्याय व्यवस्था को नई दिशा देने वाली पीढ़ी तैयार करते हैं। इसलिए उनके शुरुआती संघर्ष के दौर में सरकार का सीमित आर्थिक सहयोग उन्हें आत्मनिर्भर बनने तक महत्वपूर्ण सहारा दे सकता है।

जरूरतमंदों के लिए तय हो पात्रता

संगठन ने सरकार को सुझाव दिया है कि प्रस्तावित योजना में आय सीमा, बार काउंसिल पंजीयन, प्रैक्टिस की अवधि और अन्य आवश्यक पात्रता निर्धारित की जाए, ताकि सरकारी सहायता का लाभ वास्तविक रूप से जरूरतमंद और आर्थिक रूप से कमजोर नवीन अधिवक्ताओं तक ही पहुंचे। संगठन ने शुरुआती पांच वर्षों के लिए सहायता उपलब्ध कराने की मांग की है।

हजारों युवा अधिवक्ताओं को मिलेगा लाभ

संगठन का मानना है कि यदि प्रदेश सरकार इस दिशा में ठोस पहल करती है, तो मध्य प्रदेश के हजारों युवा अधिवक्ताओं को अपनी प्रैक्टिस स्थापित करने में मदद मिलेगी। आर्थिक दबाव कम होने से वे अधिक समर्पण के साथ न्यायिक कार्य कर सकेंगे और भविष्य में न्याय व्यवस्था तथा समाज निर्माण में प्रभावी भूमिका निभा सकेंगे।यह मांग राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अमित सिसोदिया के मार्गदर्शन एवं जबलपुर अध्यक्ष डॉ. अजय वाधवानी के नेतृत्व में संगठन द्वारा उठाई गई है। पहल में एडवोकेट भावना निगम, एडवोकेट आशीष त्रिपाठी, एडवोकेट आशुतोष चतुर्वेदी, एडवोकेट रोशन मंध्यानी, एडवोकेट अंकित मिश्रा, एडवोकेट अमित खत्री, एडवोकेट अमित शर्मा, डॉ. अभिषेक जैन, डॉ. अशोक मेथवानी, डॉ. कमल विश्वास, डॉ. श्रीकांत साहू, कमरुल इस्लाम खान सहित संगठन के पदाधिकारियों एवं सदस्यों की सहभागिता रही।