जबलपुर| टेलीकॉम सेक्टर के 7 संस्थानों का सेटअप होने के बावजूद भी टेलीकॉम मेन्युफैक्चरिंग जोन जबलपुर से छिनकर उसे ग्वालियर में देने से जबलपुर के साथ बहुत बडा भेदभाव हुआ है। इससे जनमानस में भारी असंतोष फैला है। इस असंतोष को दूर करने टेलीकॉम कस्टर तथा मेन्युफैचरिंग युनिट जबलपुर में निर्माण करने की शीघ्र ही घोषणा करें।
यह मांग जनसंगठनों ने बैठक आयोजित कर केन्द्र तथा राज्य सरकार से की है, तदानुसार केन्द्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया तथा मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र भेजे।
जबलपुर का टेलीकॉम सेक्टर डूब रहा है………
डॉ. पी.जी. नाजपांडे ने बताया कि अंग्रेजों के जमाने से बना हुआ जबलपुर का टेलीकॉम सेटअप अब डूबने की कगार पर पहुंचा है। एक के बाद एक उसके संस्थान छिन्न भिन्न हो रहे हैं। रिज रोड पर बना डॉ. भीमराव अम्बेडकर टीटीसी का कद घटा दिया गया। सिविल लाईन के संचार भवन का टेक्निकल डेवलपमेंट सर्कल खत्म हुआ है। हाई कोर्ट के बाजू में स्थापित क्वालिटी एश्योरेंस एंड इंस्पेशन कार्यालय को बंगलोर शिफ्ट कर दिया गया है, और अब तो मेन्युफैक्चरिंग जोन भी जबलपुर में छिना गया है।
नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच की ओर से इस संबंध में लगातार पत्राचार किये गये लेकिन विभाग ने जबाव देकर यह पल्ला झाडा की इस कार्यवाही के संबंध में केन्द्रीय मंत्रालय के निर्देश है। वर्ष 2015 में हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई थी, लेकिन मा. हाईकोर्ट ने यह पॉलिसी संबंधित मामले होने के कारण हस्तक्षेप नहीं किया।
बैठक में निर्णय लिया गया कि 15 अगस्त के बाद टेलीकॉम मेन्युफेरिंग जोन के मुद्दे पर सडक आंदोलन किया जायेगा।
बैठक में रजत भार्गव, टी. के. रायघटक, डी. के. सिंह, एड. बेदप्रकाश अधौलिया, सुशीला कनौजिया, सुभाष चन्द्रा, मनीष शर्मा, संतोष श्रीवास्तव, दिलीप कुन्डे, डॉ. रमेश चन्द्र सोनी, डी.आर. लखेरा, पी.एस. राजपूत, अशोक यादव, यशवंत कोष्टा, श्याम सोलंकी, के.सी. सोनी, निर्मला कुशवाहा, पूर्णिमा, अशोक नामदेव, विनयकराव सोरते, सुंदरलाल, एड. ब्रजेश साहू, अर्जुन, विनय दुबे, मनीषा साहू आदि भारी संख्या में नागरिक उपस्थित थे।