महंगाई का एक और झटका, दूध के दाम बढ़े, दूध की गुणवत्ता पर सवाल, प्रशासन से कार्रवाई की मांग


जबलपुर। पहले रसोई गैस, सब्जियां और रोजमर्रा की जरूरतों की बढ़ती कीमतों से जूझ रहे शहरवासियों को अब दूध के मोर्चे पर भी बड़ा झटका लगा है। निजी डेयरी संचालकों ने 1 जुलाई से दूध के दाम 3 से 5 रुपये प्रति लीटर बढ़ा दिए हैं। इसके बाद थोक स्तर पर दूध 75-76 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है, जबकि घर-घर सप्लाई होने वाला दूध 85 से 90 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गया है। इससे मध्यम और निम्न आय वर्ग के परिवारों का मासिक बजट बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।
जनसंगठनों ने आरोप लगाया है कि निजी डेयरियां मनमाने ढंग से कीमतें बढ़ाकर उपभोक्ताओं का आर्थिक शोषण कर रही हैं। इतना ही नहीं, महंगे दाम वसूलने के बावजूद दूध की गुणवत्ता पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

मिलावटी दूध बेचने का आरोप……….

नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच के अध्यक्ष डॉ. पी.जी. नाजपांडे ने आरोप लगाया कि कई निजी डेयरियों द्वारा दूध में 10 से 20 प्रतिशत तक पानी की मिलावट की जा रही है। उनका कहना है कि उपभोक्ता शुद्ध दूध के नाम पर मिलावटी दूध खरीदने को मजबूर हैं, जो आर्थिक शोषण के साथ-साथ लोगों के स्वास्थ्य से भी खिलवाड़ है। जनसंगठनों ने जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर दूध की बढ़ी हुई कीमतों की जांच, मिलावट पर सख्त कार्रवाई और निजी डेयरियों की मनमानी पर तत्काल रोक लगाने की मांग की। चेतावनी दी गई कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आम जनता के साथ व्यापक आंदोलन किया जाएगा।
ज्ञापन सौंपने वालों में रजत भार्गव, टीके रायघटक, डीके सिंह, संतोष श्रीवास्तव, सुशीला कनौजिया, गीता पांडे, पीएस राजपूत, सुभाष चंद्रा, केसी सोनी, एड. वेदप्रकाश अधौलिया, एड. जीएस सोनकर, मनीष शर्मा, प्रफुल्ल सक्सेना, एड. ब्रजेश साहू, राजेश गिदरोनिया आदि उपस्थित थे|