हीरक जयंती पर‘मिलन’ ने सजाई हास्य-व्यंग्य और कला की महफिल

जबलपुर। शहर की साहित्यिक और सांस्कृतिक चेतना को सात दशकों से अधिक समय से मंच प्रदान कर रही ‘मिलन’ संस्था के स्थापना दिवस एवं 75वीं वर्षगांठ (हीरक जयंती) का समापन समारोह शहीद स्मारक भवन में रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के बीच संपन्न हुआ। वरिष्ठ हास्य कलाकार के.के. नायकर के संयोजन में आयोजित समारोह में हास्य-व्यंग्य, मिमिक्री, गीत-संगीत और नृत्य ने दर्शकों को देर तक बांधे रखा। कार्यक्रम के दौरान विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाली विभूतियों एवं सामाजिक-सांस्कृतिक संस्थाओं का अभिनंदन भी किया गया।समारोह के मुख्य अतिथि महापौर जगत बहादुर सिंह ‘अन्नू’ रहे, जबकि अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार आचार्य भगवत दुबे ने की। विशिष्ट अतिथि के रूप में विधायक एवं पूर्व कैबिनेट मंत्री लखन घनघोरिया, विधायक अशोक रोहाणी, सारस्वत अतिथि डॉ. अलकेश चतुर्वेदी, ज्ञानेश्वरी दीदी एवं मदन तिवारी उपस्थित रहे।कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती के चित्र पर दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। डॉ. दीप शिखा पांडे ने सरस्वती वंदना और सुश्री श्रद्धा दास गुप्ता ने वंदे मातरम् की प्रस्तुति देकर समारोह को गरिमामय शुरुआत दी।मुख्य अतिथि जगत बहादुर सिंह ‘अन्नू’ ने कहा कि वर्ष 1951 में स्थापित ‘मिलन’ संस्था ने जबलपुर की साहित्यिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों को निरंतर मंच उपलब्ध कराया है। संस्था से अनेक साहित्यकार, कलाकार, हास्य-व्यंग्यकार और सांस्कृतिक प्रतिभाएं जुड़ीं, जिन्होंने अपनी रचनात्मकता के माध्यम से जबलपुर की सांस्कृतिक पहचान को समृद्ध किया।
इस अवसर पर डॉ. शोभा सिंह ने संस्था के पूर्व संस्थापकों एवं वरिष्ठ पत्रकार-साहित्यकार स्व. निर्मल नारद, स्व. दुर्गा शंकर शुक्ला, स्व. रघुनंदन ठाकुर, स्व. विजय पुंज, स्व. मोहन शशि एवं मूर्तिकार स्व. प्रहलाद प्रजापति का स्मरण किया। उन्होंने विशेष रूप से स्व. मोहन शशि के ‘मिलन’ की गतिविधियों को लंबे समय तक आगे बढ़ाने और कलाकारों एवं साहित्यकारों को मंच उपलब्ध कराने के लिए किए गए प्रयासों को रेखांकित किया।वरिष्ठ हास्य कलाकार एवं संस्था संयोजक के.के. नायकर तथा बलराम वर्मा की मिमिक्री और हास्य प्रस्तुतियों ने सभागार में जमकर ठहाके बिखेरे। वहीं श्रीमती अर्चना गोस्वामी, डॉ. आज्ञा मिश्रा, सुश्री राजेश्वरी सराफ, श्रीमती अंकिता गिनारा, सुश्री कौतुकी उपाध्याय एवं साथियों ने गीत-संगीत और सामूहिक नृत्य की पारंपरिक एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देकर दर्शकों की खूब वाहवाही बटोरी।समारोह में गीता ‘गीत’ द्वारा संपादित ‘गीत-पराग’ पत्रिका का विमोचन भी किया गया। इसके साथ ही धर्म-अध्यात्म, चिकित्सा, साहित्य, पत्रकारिता, शिक्षा, समाजसेवा, हास्य-व्यंग्य, संगीत एवं खेल सहित विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय पहचान बनाने वाली विभूतियों का सम्मान किया गया।सम्मानित होने वालों में ज्ञानेश्वरी दीदी, डॉ. अखिलेश गुमास्ता, एडवोकेट रविनंदन सिंह, पूर्व महाधिवक्ता डॉ. चंद्रा चतुर्वेदी, डॉ. इला घोष, दत्तात्रेय कुलकर्णी बंधु, राजेश पिल्ले एवं प्रिंस मिश्रा प्रमुख रहे।सामाजिक, सांस्कृतिक एवं धार्मिक क्षेत्र में सक्रिय श्री रामलीला समिति, विजन जबलपुर, संस्कारधानी एवं शिरडी साईं सेवा यात्रा को भी उनके योगदान के लिए सम्मानित किया गया।समारोह को सफल बनाने में डॉ. अनामिका तिवारी, डॉ. रानू रूही, श्रीमती कृष्णा राजपूत, जगदीश पटेल, सुशील श्रीवास्तव, डॉ. अंबर प्रियदर्शी, डॉ. अरुण पांडे, डॉ. छाया सिंह, डॉ. विनीत पांडे, श्रीमती रत्ना ओझा ‘रत्ना’, एडवोकेट तृप्ति त्रिवेदी, विजेंद्र कुमार उपाध्याय, डॉ. मकबूल अली, डॉ. विनोद बाजपेई, प्रतुल श्रीवास्तव, विवेक त्रिपाठी, अभिमन्यु जैन, यू.एस. दुबे, इरफान झांस्वी, विजय नेमा, संतोष नेमा, राजीव गुप्ता, राकेश खम्परिया, रीता दास, सन्नी शर्मा, मौसमी चौधरी एवं अज्ञेय ‘शशि’ का महत्वपूर्ण योगदान रहा।कार्यक्रम का  संचालन इंजी. विनोद नयन एवं मृगेंद्र नारायण सिंह ने किया। आभार प्रदर्शन बलराम वर्मा ने किया।