मेडिकल यूनिवर्सिटी का विभाजन जबलपुर की साख पर आंच


जबलपुर। मध्य प्रदेश मेडिकल यूनिवर्सिटी के संभावित विभाजन को लेकर जबलपुर में विरोध के स्वर तेज होने लगे हैं। नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच ने इसे शहर की प्रतिष्ठा और पहचान से जुड़ा मुद्दा बताते हुए कहा है कि यदि मेडिकल यूनिवर्सिटी का विभाजन किया गया तो इससे जबलपुर की साख पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। मंच ने सभी जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों और नागरिकों से एकजुट होकर इस प्रस्ताव का विरोध करने की अपील की है।
मंच के अध्यक्ष डॉ. पी.जी. नाजपांडे ने बताया कि विधायक लखन घनघोरिया ने विधानसभा सचिवालय में प्रश्न लगाकर उपमुख्यमंत्री तथा लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग से मेडिकल यूनिवर्सिटी के विभाजन के संबंध में जवाब मांगा है। इस प्रश्न का उत्तर 22 जुलाई को विधानसभा में दिया जाना प्रस्तावित है, जिससे इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चाएं तेज हो गई हैं।
डॉ. नाजपांडे का कहना है कि जानकारी मिली है कि अपर मुख्य सचिव अशोक वर्णवाल ने मेडिकल यूनिवर्सिटी के विभाजन के संबंध में आवश्यक सूचनाएं एकत्र करने के निर्देश दिए हैं। जिस तेजी से प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई हो रही है, उससे यह आशंका जताई जा रही है कि आगामी विधानसभा मानसून सत्र में इस संबंध में प्रस्ताव लाया जा सकता है।
उपभोक्ता मंच ने कहा कि मेडिकल यूनिवर्सिटी जबलपुर की पहचान और गौरव का महत्वपूर्ण केंद्र है। इसका विभाजन शहर के शैक्षणिक, प्रशासनिक और संस्थागत महत्व को प्रभावित कर सकता है। मंच ने सभी जनप्रतिनिधियों से दलगत राजनीति से ऊपर उठकर शहर के हित में एकजुट होने और मेडिकल यूनिवर्सिटी को यथावत बनाए रखने के लिए प्रभावी पहल करने की मांग की है।
इस अवसर पर रजत आर्य, एडवोकेट वेदप्रकाश अधौलिया, डी.आर. लखेरा, सुशीला कनौजिया, गीता पांडे, मनीष शर्मा एवं प्रफुल्ल सक्सेना सहित मंच के पदाधिकारियों ने भी जबलपुर के हित में सामूहिक प्रयास करने का आह्वान किया। उनका कहना है कि “एकजुटता से ही जबलपुर की साख बचेगी।