डॉ. संदीप इरटवार, डायरेक्टर, न्यूरोसर्जरी, मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, नागपुर

नागपुर| ट्राइजेमिनल न्यूराल्जिया (TN) एक दुर्लभ लेकिन बहुत ही दर्दनाक नसों से जुड़ी बीमारी है, जो चेहरे को प्रभावित करती है। इसमें चेहरे पर अचानक बहुत तेज दर्द होता है, जिसे दुनिया के सबसे तीव्र दर्दों में से एक माना जाता है। अगर इस बीमारी का समय पर पता चल जाए और सही इलाज किया जाए, तो मरीज को काफी राहत मिल सकती है और उसकी जीवन गुणवत्ता बेहतर हो सकती है। इस बीमारी के बारे में जागरूकता जरूरी है, ताकि लोग समय पर इलाज ले सकें और अनावश्यक दर्द से बच सकें।

डॉ.संदीप इरटवार,डायरेक्टर, न्यूरोसर्जरी, मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, नागपुर ने कहा की,ट्राइजेमिनल न्यूराल्जिया एक पुरानी दर्द की बीमारी है, जो चेहरे की ट्राइजेमिनल नस से जुड़ी होती है। यह नस चेहरे से जुड़ी संवेदनाएं दिमाग तक पहुंचाती है। इस बीमारी में चेहरे को हल्का-सा छूना जैसे दांत ब्रश करना या मेकअप लगाना भी अचानक तेज दर्द शुरू कर सकती हैं। अगर इसका इलाज न किया जाए, तो दर्द बहुत ज्यादा बढ़ सकता है और मरीज के जीवन पर गंभीर असर डाल सकता है, यहां तक कि आत्महत्या करने जैसे विचार भी आ सकते हैं ।  

लक्षण………..

ट्राइजेमिनल न्यूराल्जिया से पीड़ित लोगों को चेहरे में अचानक बहुत तेज और बिजली जैसे झटके वाला दर्द महसूस होता है। यह दर्द कुछ सेकंड से कुछ मिनट तक रह सकता है और अक्सर चेहरे के एक ही तरफ होता है। यह दर्द रोज़मर्रा के कामों से शुरू हो सकता है, जैसे खाना खाना, चबाना, बात करना, शेव करना या चेहरा धोना। कई बार मरीज को कुछ समय के लिए आराम मिलता है, लेकिन बाद में यह दर्द फिर से वापस आ सकता है।

हालांकि इसके लक्षण हर व्यक्ति में अलग हो सकते हैं, लेकिन कुछ संकेत ऐसे हैं जिन पर तुरंत डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। जैसे बिना किसी दांत की समस्या के बार-बार चेहरे में दर्द होना, हल्के स्पर्श या हवा लगने से दर्द शुरू हो जाना, दर्द के दौरे बार-बार आना या उनका पहले से ज्यादा तेज होना, और सामान्य दर्द की दवाओं से आराम न मिलना।

जांच …………

ट्राइजेमिनल न्यूराल्जिया की पहचान मुख्य रूप से मरीज के लक्षणों के आधार पर की जाती है, लेकिन इसकी पुष्टि के लिए कुछ जांच भी की जाती हैं। डॉक्टर मरीज की मेडिकल हिस्ट्री और दर्द के पैटर्न को ध्यान से समझते हैं। वे यह देखते हैं कि दर्द किस तरह का है, चेहरे के किस हिस्से में होता है और किन कारणों से शुरू होता है। साथ ही, दूसरी बीमारियों को समझने के लिए न्यूरोलॉजिकल जांच भी की जाती है।

एमआरआई स्कैन (मैग्नेटिक रेजोनेंस इमेजिंग) इस बीमारी की पुष्टि करने में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इससे यह पता चलता है कि नस पर दबाव तो नहीं है या इसके पीछे कोई अन्य कारण जैसे ट्यूमर या मल्टीपल स्क्लेरोसिस तो नहीं है।

उपचार के विकल्प …….

ट्राइजेमिनल न्यूराल्जिया का इलाज थोड़ा मुश्किल हो सकता है, लेकिन इसके लिए कई प्रभावी उपचार उपलब्ध हैं। सबसे पहले दवाइयों से इलाज शुरू किया जाता है। इसमें एंटी-कन्वल्सेंट दवाएं दी जाती हैं, जो नसों की असामान्य गतिविधि को कम करने में मदद करती हैं, जबकि कुछ मामलों में मसल रिलैक्सेंट भी दिए जा सकते हैं। लेकिन, सामान्य दर्द की दवाएं इस बीमारी में आमतौर पर असर नहीं करती हैं।  

अगर दवाइयों से आराम नहीं मिलता, तो कुछ छोटे और कम जटिल प्रोसीजर किए जा सकते हैं। जैसे नर्व ब्लॉक, रेडियोफ्रीक्वेंसी एब्लेशन और बैलून कंप्रेशन, जो दर्द को कम करने में मदद करते हैं। कुछ गंभीर मामलों में सर्जरी की जरूरत पड़ सकती है। इसमें माइक्रोवैस्कुलर डिकंप्रेशन (MVD) किया जाता है, जिसमें नस पर पड़ रहे दबाव को कम किया जाता है। इसके अलावा स्टीरियोटैक्टिक रेडियोसर्जरी (गामा नाइफ) भी एक विकल्प है, जो बिना ऑपरेशन के रेडिएशन के जरिए इलाज करता है।

ट्राइजेमिनल न्यूराल्जिया के साथ जीवन ……..

ट्राइजेमिनल न्यूराल्जिया के साथ जीवन जीना मुश्किल हो सकता है, लेकिन अगर बीमारी की पहचान जल्दी हो जाए तो लक्षणों को बढ़ने से रोका जा सकता है। तनाव को कम करना और उन कारणों से बचना जो दर्द को बढ़ाती हैं, दौरे कम करने में मदद कर सकता है। सपोर्ट ग्रुप और काउंसलिंग भी मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मदद कर सकते हैं।ट्राइजेमिनल न्यूराल्जिया एक दुर्लभ बीमारी है, लेकिन इसका असर बहुत गंभीर होता है। इसके बारे में जागरूकता, समय पर पहचान और सही इलाज से मरीजों का जीवन बदल सकता है। किसी को भी इस दर्द को चुपचाप सहने की जरूरत नहीं है।