मक्के का दाम नहीं मिलने से किसान भड़के, जबलपुर की पाटन मंडी में किसानों ने किया चकाजाम


जबलपुर। सरकार द्वारा मक्के का समर्थन मूल्य 24 सौ रुपए क्विंटल तय किए जाने और मक्के से फ्यूल बनाने के लिए उपयोग किए जाने वाले इथेनॉल बनाए जाने का दावा किया गया था| लिहाजा किसान उत्साहित हो गया और जबलपुर सहित पूरे प्रदेश में मक्के का रकवा बढ़ गया|

किसानों ने मक्के का बंपर उत्पादन किया अब पिछले दिनों बारिश और वर्तमान में ठंड के सीजन में मक्के में नमी आ जाने के कारण किसानों को फसल का वाजिब दाम नहीं मिल पा रहा है| किसानों का आरोप है कि उन्हें दाम तो दूर की बात लागत भी नहीं मिल पा रही है|

ऐसे में नाराज किसानों ने जबलपुर की पाटन मंडी में मंगलवार की शाम अपने वाहन सड़कों पर खड़ा कर जाम लगा दिया| देर शाम व्यापारियों और किसानों के बीच मंडी प्रबंधन ओर किसान नेताओं के हस्तक्षेप के बाद मामला शांत हुआ, लेकिन बुधवार को किसान द्वारा बड़े आंदोलन किए जाने की घोषणा से प्रशासन की टेंशन बढ़ गई है|

अब नौबत यह है कि किसानों को समर्थन मूल्य तो मिलना दूर की बात हैं लागत भी नहीं निकल पा रही है| मक्के के दाम नहीं मिल पाने से पाटन मंडी में किसानों ने अपने अपने टेक्टर अड़ाकर चका जाम कर दिया| जिससे मार्ग के दोनों और लंबा जाम लग गया|

भारत कृषक समाज ने तत्काल मंडी सचिव से हस्तक्षेप की मांग की| लेकिन मंडी सचिव ने अपने हाथ खड़े कर दिए| दरअसल मंडी में मंगलवार को मक्के का रेट एक हजार क्विंटल खुला|

किसानों के प्रदर्शन के बाद, जब भारत कृषक समाज के पदाधिकारी इंजीनियर केके अग्रवाल ने जब मंडी सचिव सुनील पांडे से बात की उसके बाद मंडी सचिव द्वारा व्यापारियों से बातचीत की गई फिर व्यापारी 1730 रुपए में मक्का खरीदने तैयार हुए|

किसान अपने टेक्टर, मिनी ट्रक लेकर सड़क पर खड़े हो गए| उधर मंडी सचिव का कहना है कि उन्होंने दोनों पक्षों से बात करने के बाद 1730 रुपए में निलामी शुरु करा दी| लगभग आधे घंटे तक किसानों का प्रदर्शन चलने की बात उन्होंने स्वीकार की|

इधर दूसरी ओर पाटन के निवासी भारत कृषक समाज कार्यकारिणी वरिष्ठ सदस्य सीएल शर्मा ने कहा कि मंडी सचिव ने शुक्रवार और शनिवार को सिहोरा मंडी बंद रहने की बात कही थी, लिहाजा किसान पाटन मंडी में माल लेकर पहुंच गया|

किसानों का आक्रोश उस वक्त भड़क गया, जब व्यापारी पूल बनाकर यहां 1 हजार रुपए प्रति क्विंटल के भाव से अधिक देने को तैयार नहीं थे, लिहाजा विद्रोह की स्थिति बन गई और किसान प्रदर्शन करने लगे| श्री शर्मा ने कहा कि किसानों का शोषण कतई बर्दाश्त नहीं किया जायेगा|

आज बड़ी संख्या में किसान जबलपुर मंडी पहुंचेंगे और किसी कीमत पर 18 सौ रुपए क्विंटल के भाव से मक्का नहीं बिकने देंगे| श्री शर्मा ने कहा कि किसान की लागत नहीं निकल पा रही है|

व्यापारी जब गाय भैंस के लिए दाना छिलका 24 सौ रुपए क्विंटल बेच रहा हैं तो क्यों किसानों को 1 हजार रुपए क्विंटल मक्का बेचने के लिए विवश किया जा रहा हैं|