आज उत्तरायण में प्रवेश करेंगे भगवान सूर्य नारायण, नर्मदा तटों पर मकर संक्रांति का मेला 2 दिन भरेगा


जबलपुर। भगवान सूर्यदेव आज उत्तरायण में प्रवेश करेंगे। दक्षिणायन से उत्तरायण में प्रवेश के संक्रमण को ही मकर संक्रांति का नाम दिया गया है। ऐसी मान्यता है कि उत्तरायण में प्रवेश करने के बाद सूर्य की चमक और प्रखरता तेज होती है, जिससे हौले-हौले ठंड दूर होती है और लोगों के चेहरों में चमक आती है। जीवन में नये उत्साह का संचार होता है। मकर संक्रांति पर्व पर नर्मदा के स्नान का विशेष पुण्य महत्व है। इसलिए हर वर्ष मकर संक्रांति पर नर्मदा तटों पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु स्नान करने पहुंचते हैं। इस बार भी मकर संक्रांति के पुण्य स्नान को 14 जनवरी को बताया गया है। बहरहाल, वर्षों से 14 जनवरी को ही मकर संक्रांति मनाने की परंपरा है। इसलिए आज नर्मदा तटों पर स्नानार्थियों का मेला भरेगा। इसके बाद दो तीन दिनों तक मकर सक्रांति का मेला चलता रहेगा|

अब सुबह ही होगा सूर्य का संक्रमण…………

ज्योतिषाचार्य देवेंद्र पोद्दार ने बताया कि सूर्य का राशि परिवर्तन 14 जनवरी की अपरान्हकाल में हो रहा है। षटतिला एकादशी का संयोग भी बन रहा है साथ ही खरमास समाप्त हो रहा है| इसलिए स्नान के साथ दान करने का महत्व 15 जनवरी को मान्य होगा| इसके पूर्व छह वर्ष तक सूर्य का राशि परिवर्तन अनिश्चित होने से संक्रांति कभी 14 तो कभी 15 जनवरी को मनाई गई। सूर्य का राशि परिवर्तन 56 वर्षों (2080) तक सुबह ही होगा। उन्होंने बताया कि 1936 से मकर संक्रांति 14 जनवरी को मनाई जा रही थी। 1864 से 1936 तक 13 जनवरी और 1792 से 1864 तक 12 जनवरी को मनाई जाती रही है।

नर्मदा के घाटों पर नौका संचालन प्रतिबंधित…………

जिला प्रशासन ने मकर संक्रांति पर 14 और 15 जनवरी को गौरीघाट, जिलहरीघाट, तिलवाराघाट, लम्हेटाघाट, भेड़ाघाट एवं सरस्वती घाट में नौका संचालन को पूर्णतः प्रतिबन्धित कर दिया है।
अपर जिला दण्डाधिकारी जारी आदेश के अनुसार मकर संक्रांति पर स्नान और पूजा-अर्चना के लिये माँ नर्मदा के घाटों पर बड़ी संख्या में पहुँचने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा के मद्देनजर नौका संचालन पर लगाये गये इस प्रतिबंध से केवल नर्मदा तट पर बसे गांवों के निवासियों के परिवहन के लिये नियमित रूप से संचालित की जा रही नौकाओं को छूट रहेगी। शेष सभी नौकाओं के 14 और 15 जनवरी को संचालन पर पूर्णतः प्रतिबंध रहेगा।