जबलपुर। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने बढ़ते साइबर अपराधों और उनकी जांच में हो रही देरी पर कड़ी नाराजगी जताते हुए स्पष्ट कहा है कि साइबर अपराधों में हर सेकेंड कीमती होता है और पुलिस को अपराधियों से भी तेज गति से काम करना होगा। अदालत ने माना कि मौजूदा जांच व्यवस्था साइबर अपराधियों की तुलना में काफी धीमी है, जिससे आरोपी आसानी से बच निकलते हैं।जस्टिस हिमान्शु जोशी की एकलपीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्रीय गृह मंत्रालय, दूरसंचार विभाग और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) को पक्षकार बनाने के निर्देश दिए हैं। साथ ही असम, पश्चिम बंगाल और झारखंड के पुलिस महानिदेशकों (DGP) को 21 जुलाई को व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होकर जांच की प्रगति और अंतरराज्यीय समन्वय की जानकारी देने के आदेश दिए हैं।
70 वर्षीय महिला से 6.25 लाख की साइबर ठगी का मामला
मामला जबलपुर निवासी 70 वर्षीय चैताली मित्रा से जुड़ा है। याचिका के अनुसार 26 अप्रैल 2025 को उनके बैंक खाते से करीब 6.25 लाख रुपए की साइबर ठगी कर ली गई थी। गोराबाजार थाने में शिकायत दर्ज कराने के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं होने पर उन्होंने हाईकोर्ट की शरण ली। मामले की पिछली सुनवाई में कोर्ट ने जबलपुर एसपी को भी तलब किया था।सुनवाई के दौरान उप महाधिवक्ता स्वप्निल गांगुली के साथ जबलपुर पुलिस अधीक्षक सम्पत उपाध्याय, गोराबाजार थाना प्रभारी भूपेंद्र आर्मो और विवेचना अधिकारी संजीव कुमार त्रिपाठी अदालत में उपस्थित हुए।एसपी ने कोर्ट को बताया कि बैंकों की नोडल एजेंसियों से शुरुआती जानकारी मिलने में 3 से 5 दिन लग जाते हैं। वहीं टेलीग्राम जैसे एन्क्रिप्टेड प्लेटफॉर्म से तकनीकी जानकारी और आईपी लॉग प्राप्त करने में भी कठिनाई आती है। इसके अलावा दूसरे राज्यों की पुलिस से समय पर सहयोग नहीं मिलने के कारण जांच प्रभावित होती है। इस दौरान आरोपी अपना स्थान बदलकर ठगी की रकम निकाल लेते हैं। उन्होंने बताया कि इस मामले में एक संदिग्ध की लोकेशन असम में मिली है।कोर्ट की सख्त टिप्पणी— अपराधी पुलिस से आगेहाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि वर्तमान कागजी और प्रक्रियात्मक व्यवस्था के कारण साइबर अपराधी पुलिस से कई कदम आगे चल रहे हैं। यदि साइबर अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण करना है तो बैंकों, दूरसंचार कंपनियों, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और विभिन्न राज्यों की पुलिस के बीच रियल-टाइम सूचना साझा करने की एकीकृत प्रणाली विकसित करना समय की आवश्यकता है।
अदालत ने इस संबंध में नए पक्षकार बनाए गए सभी विभागों और एजेंसियों से विस्तृत जवाब तलब किया है।
21 जुलाई को अगली सुनवाई
हाईकोर्ट ने असम, पश्चिम बंगाल और झारखंड के डीजीपी को 21 जुलाई को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर साइबर अपराधों की जांच, अंतरराज्यीय समन्वय और सूचना आदान-प्रदान की मौजूदा व्यवस्था पर अपना पक्ष रखने के निर्देश दिए हैं।