भोपाल/जबलपुर। मध्यप्रदेश विधानसभा में आज बजट 2026-27 पर चर्चा के दौरान जबलपुर पूर्व के विधायक श्री लखन घनघोरिया ने राज्य की वित्तीय स्थिति, बढ़ते कर्ज, कृषि बजट में कटौती, स्वास्थ्य सेवाओं की वास्तविकता, रोजगार एवं मनरेगा सहित विभिन्न विषयों पर विस्तृत एवं तथ्यात्मक वक्तव्य रखा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा प्रस्तुत बजट 4 लाख 38 हजार 317 करोड़ रुपये का है, किंतु इसके समानांतर राज्य पर बढ़ते कर्ज की स्थिति अत्यंत चिंताजनक है।
अपने वक्तव्य में श्री घनघोरिया ने कहा कि वर्ष 2003 के बाद से राज्य की वित्तीय दिशा में निरंतर परिवर्तन हुआ है और वर्तमान स्थिति में राज्य पर अनुमानित कर्ज लगभग 6 लाख करोड़ रुपये के आसपास पहुंच रहा है, जिसका अर्थ है कि प्रति व्यक्ति लगभग 60 हजार रुपये का कर्ज भार है। उन्होंने सदन में कहा कि बीते 26 महीनों में राज्य सरकार द्वारा 33 बार कर्ज लिया गया, जिसमें लगभग 1 लाख 69 हजार करोड़ रुपये का ऋण सम्मिलित है, अर्थात औसतन प्रतिदिन 216 करोड़ रुपये का कर्ज लिया गया । उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि 16 प्रतिशत वार्षिक ब्याज दर के आधार पर लगभग 33 हजार 734 करोड़ रुपये ब्याज के रूप में चुकाने पड़ेंगे।
कृषि एवं ग्रामीण क्षेत्र का उल्लेख करते हुए विधायक ने कहा कि वर्ष 2026 को कृषक कल्याण वर्ष घोषित किए जाने के बावजूद बजट में कटौती की गई है। उन्होंने पीएफएमएस योजना एवं जल जीवन मिशन में कटौती का भी उल्लेख किया । उन्होंने कहा कि यदि कृषि बजट में कमी की जाती है तो इसका सीधा प्रभाव किसानों पर पड़ेगा।
स्वास्थ्य क्षेत्र पर बोलते हुए श्री घनघोरिया ने कहा कि स्वास्थ्य बजट में मात्र 4.1 प्रतिशत की वृद्धि की गई है तथा स्वास्थ्य शिक्षा के लिए 128 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है । उन्होंने सदन में यह भी कहा कि सरकार द्वारा 3800 डॉक्टरों की स्वीकृति की बात कही गई है, जबकि पूर्व में 64 हजार पदों की कमी का उल्लेख किया गया था । मेडिकल कॉलेजों की संख्या को लेकर भी उन्होंने सरकार के दावों पर प्रश्न उठाए। इसके साथ ही मध्यप्रदेश सरकार द्वारा कराए गए रीजनल इंडस्ट्रियल कॉन्क्लेव की सार्थकता पर भी प्रश्न उठाया। उन्होंने कहा कि यदि एमओयू से संबंधित आंकड़ों का अवलोकन किया जाए तो मात्र 15-20% ही धरातल पर उतरे हैं। आंकड़ों का खेल करके सरकार जनता को ठग रही है।
मनरेगा के संदर्भ में विधायक ने कहा कि श्रमिकों को औसतन 49 दिन का ही रोजगार मिल पा रहा है, जबकि 100 दिन का प्रावधान है। उन्होंने वर्ष 2022-24 के बीच 44.64 लाख श्रमिकों के नाम सूची से हटाए जाने का मुद्दा भी सदन में उठाया । उन्होंने इसका नाम जी राम जी करने पर भी तंज कसा। इसके साथ ही प्रदेश में नशे के बढ़ते कारोबार पर भी गंभीर प्रश्न उठाए। उन्होंने कहा कि यदि जबलपुर की केवल बात करे तो वहां तकरीबन 400 करोड़ रुपए सालाना का गांजा बिक रहा है।
उन्होंने जबलपुर में प्रस्तावित/निर्मित फ्लाईओवर एवं पुलिया निर्माण की स्थिति पर प्रश्न उठाते हुए कहा कि शहर में यातायात दबाव को ध्यान में रखकर समुचित योजना नहीं बनाई गई विशेषकर पूर्व विधानसभा के लिए। उन्होंने गोहलपुर क्षेत्र की पुलिया का उल्लेख करते हुए कहा कि पुल निर्माण के बावजूद ट्रैफिक जाम की समस्या बनी हुई है और 3 घंटे तक जाम लगने की स्थिति उत्पन्न हो रही है ।
इसके अतिरिक्त उन्होंने जबलपुर में एलिवेटेड कॉरिडोर, फ्लाईओवर स्वीकृति और निर्माण संबंधी घोषणाओं का संदर्भ देते हुए कहा कि जिन कार्यों की घोषणा मंचों से की गई, उनकी जमीनी प्रगति और उपयोगिता पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।
इसके अतिरिक्त उन्होंने स्मार्ट मीटर, बिजली दरों एवं बिजली बिलों में वृद्धि का उल्लेख करते हुए कहा कि उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक भार डाला जा रहा है ।
अपने वक्तव्य के अंत में श्री घनघोरिया ने कहा कि बजट के आंकड़ों के साथ-साथ जमीनी वास्तविकताओं पर भी विचार किया जाना आवश्यक है, ताकि राज्य के नागरिकों, किसानों, युवाओं एवं श्रमिकों को वास्तविक राहत मिल सके। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि वित्तीय प्रबंधन, सामाजिक क्षेत्र के व्यय तथा रोजगार सृजन पर ठोस और पारदर्शी नीति अपनाई जाए।