जबलपुर| प्रदेश शासन किसानों को कृषि हेतु 10 घंटे निर्वाध रूप से विद्युत प्रदाय करने हेतु कटिबद्ध है लेकिन खेद है की अब भी किसानों को गुणवत्ता की बिजली 10 घंटे प्राप्त नहीं हो रही है। कई-कई क्षेत्रों में 4 से 6 घंटे ही बिजली प्राप्त हो पाती है।
भारत कृषक समाज महाकौशल प्रांत के अध्यक्ष इंजीनियर केके अग्रवाल ने यह आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री को ज्ञापन प्रेषित कर किसानों को खेती के लिए 10 घंटे से कम बिजली देने वाले अधिकारियों पर दंड के प्रावधान की मांग की।
ज्ञापन में संघ ने कहा कि वोल्टेज की समस्या, ट्रिपिंग तथा आए दिन की कटौती से किसान अपने खेतों की सिंचाई समय पर नही कर पाते। ट्रांसफार्मरों के बिगडऩे पर किसान दफ़्तरों के चक्कर लगा लगा कर परेशान हो जाता है।
बहुत एप्रोच लगाने व जद्दोजहद के बाद ट्रांसफार्मर बदले जाते हैं। कई-कई बार महीनों तक नही बदले जाते। खम्भों व लायनों की हालात बद से बदतर हो गई हैं।
यह स्थिति किसी से छिपी नहीं। संघ ने कहा कि किसानों द्वारा ज्ञापनों, बैठकों आदि के माध्यमों से उच्च अधिकारियों को स्थितियों से अवगत कराया जाता हैं।
स्थिति का विवरण विद्युत नियामक आयोग के संज्ञान भी लाया जाता हैं, पर खेद हैं कि जिम्मेदार अधिकारियों पर कभी कोई कार्रवाई नहीं होती।
संघ ने कहा कि इसकी जांच निष्पक्ष उच्च स्तरीय समिति से कराई जाए तो मैदानी वस्तु स्थिति से अवगत हो सकेंगे। संगठन ने मांग की कि इस विद्युत वितरण की दुर्दशा के लिए तथा किसानों को 10 घंटे से कम विद्युत प्रदाय करने वाले फीडरों के प्रभारियों व सभी जिम्मेदार अधिकारियों पर दंड का प्रावधान सुनिश्चित करने हेतु तुरंत आदेश जारी किया जाए।
संघ के अध्यक्ष इंजी. के के अग्रवाल ने बताया कि पत्र की प्रतिलिपि मुख्यमंत्री के साथ ही सांसद, विधायक, जनप्रतिनिधियों विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष एवं म.प्र. पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी जबलपुर के प्रबंध संचालक, संभागायुक्त, कलेक्टर एवं मुख्य अभियंता जेआर को प्रेषित की गई।