नर्मदा तटों में लगी आस्था व श्रद्धा की डुबकी, कार्तिक पूर्णिमा पर नर्मदा स्नान, ध्यान


जबलपुर। कार्तिक पूर्णिमा पर बुधवार को नर्मदा तटों पर आस्था और श्रद्धा का संगम उमड़ पड़ा। लाखों श्रद्धालुओं ने पुण्य सलिला जीवनदायिनी माँ नर्मदा के पावन तटों पर डुबकी लगाकर पुण्य स्नान किया।

इसके अलावा दीपदान, पूजन, हवन और भण्डारों का आयोजन भी नर्मदा तटों पर किया गया। बुधवार की सुबह से ही जबलपुर के नर्मदा नदी के पावन तटों गौरीघाट, उमाघाट, जिलहरीघाट, तिलवारा घाट, भेड़ाघाट, लम्हेटा घाट में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचने लगे थे।


संस्कारधानी जबलपुर से बड़ी संख्या में श्रद्धालु गंगा स्नान करने बनारस भी गये हुये हैं। ज्योतिषाचार्य पंडित पीएल गौतमाचार्य ने बताया कि कार्तिक पूर्णिमा के दिन देवता भी धरती पर आते हैं क्योंकि इस दिन देव दिवाली का पर्व भी मनाया जाता है।

कार्तिक पूर्णिमा पर गंगा स्नान का विशेष महत्व है, जबकि नर्मदा स्नान का तो है ही। ऐसी पौराणिक मान्यता है कि कार्तिक पूर्णिमा पर नर्मदा स्नान कर भगवान भोलेनाथ के दर्शन और पूजा करने से सौ गुना पुण्य लाभ प्राप्त होता है।

नर्मदा मार्ग पर रहा यातायात का दबाव…………..

नर्मदा तटों पर भारी भीड़भाड़ होने के कारण खासकर गौरीघाट मार्ग पर कल सारे दिन यातायात का दबाव बना रहा। चार पहिया वाहनों को रेतनाका के पास ही रोक दिया गया था, जबकि दुपहिया वाहनों के अवैध स्टेण्ड खुल गये थे, जिन्होंने लाठियों और रस्सियों के बैरियर बनाकर दुपहिया वाहन चालकों को भी रेल्वे लाईन फाटक के पास ही रोक दिया था। घाट के किनारे भीड़ का आलम यह था कि पैर रखने की जगह नहीं थी।