भोपाल/जबलपुर। मध्यप्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के दौरान आज जबलपुर पूर्व के विधायक श्री लखन घनघोरिया ने प्रदेश में दूषित पेयजल आपूर्ति के गंभीर विषय को जोरदार ढंग से उठाते हुए विशेष रूप से जबलपुर की स्थिति पर सरकार को कठघरे में खड़ा किया। उन्होंने इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र का उदाहरण देते हुए कहा कि यदि प्रदेश के तथाकथित स्वच्छ शहरों में भी जल गुणवत्ता को लेकर प्रश्न उठ रहे हैं, तो जबलपुर की स्थिति और अधिक चिंताजनक है, जहां लंबे समय से नागरिक दूषित और काले पानी की समस्या से जूझ रहे हैं।
विधानसभा में बोलते हुए श्री घनघोरिया ने कहा कि जबलपुर शहर के कई क्षेत्रों में नलों से काला और गंदा पानी आ रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह समस्या केवल सामान्य वार्डों तक सीमित नहीं है, बल्कि नगर निगम के महापौर के अपने वार्ड सहित लोक निर्माण मंत्री श्री राकेश सिंह के विधानसभा क्षेत्र के वार्डों में भी जल गुणवत्ता को लेकर गंभीर शिकायतें सामने आई हैं। इसके बावजूद अपेक्षित स्तर पर न तो परीक्षण रिपोर्ट सार्वजनिक की जा रही है और न ही जवाबदेही तय की जा रही है।
विधानसभा में अपने वक्तव्य के दौरान श्री घनघोरिया ने कहा कि जबलपुर के कई इलाकों में नलों से गंदा एवं काला पानी आ रहा है, जिससे नागरिकों में आक्रोश और भय का वातावरण है। उन्होंने सदन में वार्डों के नाम भी पढ़कर सुनाए, जिनमें नरसिंह वार्ड, पंसारी मोहल्ला, जोगी मोहल्ला, देवपुरी वार्ड, हाउसिंग कॉलोनी (पश्चिम विधानसभा क्षेत्र) सहित अन्य प्रभावित क्षेत्र शामिल हैं। उन्होंने सदन को अवगत कराया कि 29 फरवरी 2024 को नर्मदा लाइन (नेपियर टाउन क्षेत्र, मुख्य चौहारा, शिव मंदिर परिसर) से संबंधित शिकायत दर्ज की गई थी। बाद में नगर निगम द्वारा दिए गए बीओपी/जांच संबंधी उत्तर के बावजूद स्थिति में सुधार नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि एक बच्ची की मृत्यु का भी उल्लेख सामने आया, जिसके संदर्भ में जनता में गहरा आक्रोश है।
उन्होंने सदन में कहा कि यदि 24 घंटे तक पानी को एक पात्र में रखा जाए तो वह काला पड़ जाता है, जो पेयजल की शुद्धता पर गंभीर प्रश्नचिह्न है। उन्होंने मांग की कि सरकार स्पष्ट करे— यदि पानी शुद्ध है तो उसकी प्रमाणित जांच रिपोर्ट सदन के पटल पर रखी जाए, और यदि दूषित है तो संबंधित अधिकारियों पर दंडात्मक कार्रवाई की जाए।
बजट में जल आपूर्ति और अधोसंरचना पर बड़े प्रावधान किए जाते हैं, किंतु जमीनी स्तर पर नागरिकों को शुद्ध पानी नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि जब मंत्री और महापौर के वार्डों में ही समस्या बनी हुई है और समाधान नहीं हो पा रहा, तो आम नागरिकों की स्थिति का सहज अनुमान लगाया जा सकता है।
विधानसभा में हस्तक्षेप के दौरान श्री घनघोरिया ने स्पष्ट किया कि यह विषय राजनीतिक नहीं, बल्कि जनहित और जनस्वास्थ्य का प्रश्न है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की जनता को स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल मिलना उनका अधिकार है और सरकार की संवैधानिक जिम्मेदारी भी। उन्होंने अध्यक्ष महोदय से आग्रह किया कि इस महत्वपूर्ण विषय पर विस्तृत चर्चा कराई जाए, ताकि समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में प्रभावी कदम उठाए जा सकें। उन्होंने अंत में कहा कि जब तक प्रदेश के प्रत्येक नागरिक को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध नहीं हो जाता, तब तक वे इस मुद्दे को सदन से सड़क तक उठाते रहेंगे।