क्या मिलावट सिर्फ त्योहार के 15 दिन होती है .. ग्राहकों और व्यापारियों दोनों में दहशत से कारोबार प्रभावित

त्योहारों के मौसम में प्रशासन द्वारा आग लगने पर कुआ खोदने की कहावत को चरितार्थ किये जाने से व्यापार से में खासा असर पड़ रहा है. यह बात सच है की मानव स्वास्थ्य से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं होना चाहिये. लेकिन यह भी समझना चाहिये की त्योहारों की तैयारियां महीनों पहले से शुरु हो जाती हैं. महीनों पहले से खोवा मावा ड्रायफ्रूट आदि की खरीदी और स्टॉक शुरु हो जाता है. जब सब माल बनकर बिक्री के लिये तैयार होता है, तब छापामार शैली में सेम्पलिंग से न तो उपभोक्ताओं का हित होता है और न व्यापारियों का, कार्यवाही में लगे लोगों का हित जरूर सध जाता है. दरअसल व्यापारिक संगठनों में समन्वय और प्रतिरोध की क्षमता कम होने के कारण डर और भय के माहौल में व्यापारी व्यापार करने मजबूर है. क्या सिर्फ मिठाई में मिलावट होती है. बारह महीने मिलावटी दूध बिकता है, मिलावटी खोवा बिकता तब कार्यवाही क्यों नहीं होती. पैक्ड माल जो मल्टीनेशनल कंपनियां तैयार करती हैं. उनकी सेम्पलिंग नहीं होती है. एक तरफ सरकार स्वदेशी वस्तुओं को बढ़ावा देने की बात कर रही है. दूसरी तरफ हड़कंप का माहौल बनाकर पैक्ड विदेशी माल विवश किया जा रहा है. शहर में ड्रायफ्रूट भी नकली बिक रहा है. शहर में फल और सब्जियां भी आक्सीटोसिन जैसे घातक कैमिकल का प्रयोग कर चमकदार बनाकर बेचे जा रहे हैं. जो रोजाना उपयोग की वस्तुए हैं. बहरहाल जबलपुर में मौजूद तीन तीन चैम्बर आफ कामर्स दर्जनों व्यापारिक संगठन चुप चाप प्रशासनिक अमले की मनमानी झेल रहे हैं. इससे व्यापारिक संगठनों पर भी सवालिया निशान उठ रहे हैं.

त्योहारों के मौसम में जबलपुर के बाजारों में रौनक के बीच प्रशासन की बढ़ती छापेमार शैली की कार्रवाई ने शहर के बाजारों में खलबली मचा दी है। शहर के कई इलाकों में एक के बाद एक दुकानों और मिठाई प्रतिष्ठानों पर की जा रही कार्रवाई से व्यापारी समुदाय नाराज़ है। उनका कहना है कि प्रशासन का यह कदम न केवल गलत समय पर उठाया गया है, बल्कि इससे स्थानीय कारोबार पर भी गहरा असर पड़ रहा है।


व्यापारियों का कहना है कि पिछले कुछ दिनों से खाद्य सुरक्षा और प्रशासनिक टीमों द्वारा लगातार छापेमारी की जा रही है। यह कार्रवाई ऐसे समय में की जा रही है जब पूरे शहर में दीपावली और शादी सीज़न की तैयारी चल रही है।


एक व्यापारी ने कहा, पूरी मंडी सालभर मेहनत करती है, त्योहारों के वक्त व्यापार का सीज़न आता है। अगर जांच करनी थी तो एक महीना पहले कर लेते — व्यापारी खुद सहयोग कर देते। लेकिन त्योहारों के ठीक पहले दुकान में अचानक घुसकर छापेमारी करना कारोबार के लिए नुकसानदायक है। जांच करना है तो अचानक एक कर्मचारी भेज कर सेम्पल ले जाओ, उसकी जांच करो, गलत पाया जाए सील करो, लेकिन अचानक भरी दुकान में घुस जाना गलत है. आमजन में यह संदेश जाता है की जैसे हम मिलावटखोर हैं और खरीददार वापस नहीं लौटते.

छापेमारी शैली गलत….

व्यापारियों ने प्रशासनिक कार्रवाई पर कई सवाल उठाए हैं, व्यापारियों का कहना है की त्योहारों के दौरान ग्राहकी अपने चरम पर होती है। इस वक्त की गई छापेमारी से व्यापार ठप हो जाता है। छापेमारी शैली के बाद यह माहौल बनता है कि स्थानीय देसी मिठाइयाँ और खाद्य पदार्थ मिलावटी हैं, जिससे लोग भरोसा खो देते हैं और ब्रांडेड पैक्ड सामान खरीदने लगते हैं। व्यापारी मानते हैं कि नियमों का पालन होना चाहिए, लेकिन अचानक दुकान में घुसकर छापेमारी करने के बजाय समन्वय से कार्रवाई होनी चाहिए थी।

देसी नहीं, पैक्ड सामान में ज्यादा मिलावट..

एक स्थानीय मिठाई विक्रेता ने बताया, “हमारे यहाँ देसी घी और दूध से मिठाई बनती है। असली मिलावट तो पैकेट वाले सामान में होती है। लेकिन प्रशासन जब हमारे यहाँ छापे मारता है तो ग्राहक डर जाते हैं, और हमारी बिक्री आधी रह जाती है।”

चेम्बर और संगठन मौन …

जबलपुर में तीन प्रमुख व्यापारी संगठन — महाकौशल चेम्बर ऑफ कॉमर्स, जबलपुर चेम्बर ऑफ कॉमर्स और संस्कारधानी चेम्बर ऑफ कॉमर्स — सक्रिय हैं, परंतु इस पूरे विवाद में तीनों का रुख अब तक मौन बना हुआ है। छोटे व्यापारिक समूहों और दुकानदारों का कहना है कि इन चेम्बरों को आगे बढ़कर व्यापारियों के हित में प्रशासन से बातचीत करनी चाहिए।

प्रशासन की दलील …….

प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि त्योहारों के समय मिलावट रोकथाम के लिए यह नियमित अभियान है। हालांकि व्यापारियों का आरोप है कि इन कार्रवाइयों से “मिलावट की जांच” से ज़्यादा “दहशत का माहौल” बनता है।
कई बाजारों में व्यापारी अब सामूहिक रूप से प्रतिनिधिमंडल बनाकर प्रशासन से चर्चा की तैयारी में हैं। उनका कहना है कि अगर जांच वाकई ज़रूरी है तो उसे सहयोग और योजना के साथ किया जाए ताकि छोटे व्यापारियों की रोज़ी-रोटी पर असर न पड़े