(जबलपुर) शांति समिति की मांग अनसुनी, मासूमों की मौत का जिम्मेदार कौन…..?

जबलपुर, । गोराबाजार क्षेत्र में विसर्जन जुलूस के दौरान हुआ बिजली हादसा अब सिर्फ एक दुर्घटना नहीं बल्कि जिला प्रशासन और बिजली विभाग की लापरवाही का बड़ा सबूत बन गया है। हाईटेंशन लाइन की चपेट में आकर दो युवकों की मौत और 12 के झुलसने की घटना ने शांति समिति बैठकों की उपयोगिता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

हर बड़े पर्व से पहले जिला प्रशासन शांति समिति की बैठक बुलाता है और नागरिकों व समितियों से सुझाव लेता है। लेकिन यह बैठकें अब महज दिखावा बनकर रह गई हैं। गढ़ा और गोराबाजार क्षेत्र की दुर्गोत्सव समितियों ने बैठक में साफ चेतावनी दी थी कि 11 केवी की लाइन सड़क से बहुत नीचे झूल रही है और कभी भी हादसा हो सकता है। प्रशासन ने संज्ञान लेने का आश्वासन दिया था, लेकिन हकीकत में कुछ नहीं किया गया। नतीजा यह हुआ कि सड़क पर झूलती वही लाइन अब दो मासूम जिंदगियों को लील गई।

गौरतलब है की गत रात कजरवारा भीटा क्रॉसिंग के पास काली विसर्जन जुलूस निकल रहा था। इसी दौरान 11 केवी की लाईन मूर्ति सवार ट्रक से टकरा गई। तारों में तेज चिंगारी उठी और करंट पूरे ट्रक में फैल गया। जुलूस की भीड़ और उत्साह के बीच इस खतरे को किसी ने गंभीरता से नहीं लिया। इसी दौरान कुछ युवक ट्रक पर चढ़ने लगे और देखते ही देखते 14 लोग करंट की चपेट में आ गए। करंट की तीव्रता इतनी थी कि दो युवकों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि 12 गंभीर रूप से झुलस गए।

चेतावनी के बाद भी विभाग ने नहीं की कार्रवाई………

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि दुर्गोत्सव समिति ने शांति समिति बैठक में यह मुद्दा बार-बार उठाया था कि लाइन को ऊंचा किया जाए, लेकिन बिजली विभाग के अधिकारियों ने गंभीरता नहीं दिखाई। आक्रोशित लोगों का कहना है कि यदि समय रहते तारों को ठीक कर दिया जाता तो इतनी बड़ी त्रासदी टाली जा सकती थी।

ये लोग झुलसे……………..

करंट से झुलसने वालों में राजू पटेल, मनीष पटेल, कपिल, राम मनोहर पटेल, विवेक यादव, मयंक नामदेव, मोहित पटेल, प्रशांत नामदेव, अतुल विश्वकर्मा, नितिन, हरसू पटेल और माखन चौधरी शामिल हैं। सभी को मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

प्रशासन और विभाग पर उठे सवाल…………..

घटना के बाद मौके पर पहुंचे जनप्रतिनिधि, पुलिस और बिजली विभाग के अधिकारी लोगों को सांत्वना देते और कार्रवाई का आश्वासन देते नजर आए, लेकिन स्थानीय नागरिकों का गुस्सा कम नहीं हुआ। उनका कहना है कि यह हादसा प्राकृतिक नहीं बल्कि विभागीय लापरवाही की वजह से हुआ है। अब सवाल यह है कि जब जनता और समितियों की चेतावनी को अनसुना कर दिया जाता है, तो शांति समिति बैठकों का क्या मतलब रह जाता है? यह हादसा केवल दो मौतों का आंकड़ा नहीं बल्कि प्रशासन और बिजली विभाग की कार्यशैली पर गहरा कलंक है।

इस साल हादसों का दशहरा………….

इस साल प्रशासनिक  लापरवाही के चलते 4 हादसे हुए सबसे पहली घटना बरगी हिल्स में, रोड की सजावट में पाईप में आए करंट से दो बच्चों की मौत हो गई, वहीं गढ़ा दशहरा जुलूस के दौरान शाहीनाका में मंच का ट्रेस गिरने से एक महिला की मौत हो गई और एक बच्ची घायल हो गई| उसके बाद कांचघर गोलीकांड ने सनसनी फैलाई और बाद में रविवार 5 अक्टूबर की देर रात कजरवारा टेमरभीटा में हाईटेंशन लाईन के करंट से दो युवकों की मौत हो गई, जबकि दो झुलस गए|