(जबलपुर) रोशनी और खुशियों का त्यौहार दीपोत्सव आज – घर-घर होगी लक्ष्मी पूजा , बाजारों में रौनक

जबलपुर,। घर-घर में खुशियां बिखेरने वाला रोशनी का पर्व दीपावली आज मनाया जायेगा। भारतीय संस्कृति के सबसे महत्वपूर्ण त्यौहार की शुरूआत यूं तो धनतेरस के साथ ही हो चुकी है। किन्तु इस 6 दिनी पर्व का सबसे अहम दिन आज है, जो दीपोत्सव के रूप में आनंद और उल्लास के साथ मनाया जाता है। आज जहां धन सुख ऐश्वर्य समृद्धता की देवी श्री लक्ष्मी का पूजन विधि विधान के साथ किया जायेगा। वहीं झोपड़े से लेकर महलों तक अनगिनत दीप रोशन किये जायेंगे, जिनके आगे अमावस्या की काली रात भी जगमगा उठेगी। इससे पहले कल नरक चौदस मनाई गई, लोगों ने अपने घर का कूड़ा कचरा हटाया और साफ सफाई की। दीपावली के अगले दिन परवां और उसके बाद गुरुवार 23 अक्टूबर को भाईदूज मनाया जायेगा।

श्री राम राज्यारोहण का महोत्सव………

कार्तिक अमावस्या पर मनाये जाने वाले दीपावली पर्व का इंतजार वर्ष भर से रहता है। कहते हैं कि इसी दिन अयोध्या की प्रजा ने 14 वर्ष वनवास से लौटे भगवान श्री राम के राज्यारोहण को महोत्सव के रूप में मनाया गया था। घर-घर शुद्ध घी के दीप जलाये गये थे और तभी से इस महापर्व पर दीपावली की सजावट का महत्व बढ़ गया है। वैसे दीपावली के आयोजन के पीछे और भी तथ्य हैं। कार्तिक के महीने में खेतों से कटा अनाज खलिहानों तक पहुंच जाता है। जिसे उपयोग से पूर्व यज्ञ द्वारा भगवान को समर्पित किया जाता है। वास्तव में फसलें समृद्धि में वृद्धि करती हैं और यही कारण भी समृद्धि की देवी लक्ष्मी का पूजन इस दिन किया जाता है। आज दीपावली पर्व पर घर-घर खुशियां मनाई जायेंगी। चाहे मिट्टी के दीपक हों आधुनिक युग की देन मोमबत्ती और विद्युत से रोशन होने वाले दीपक, घर-घर इसका उपयोग किया जायेगा। शाम को देवी लक्ष्मी का पूजन घरों और प्रतिष्ठानों में किया जायेगा। बच्चे-बड़े सभी नये कपड़े पहनकर एक-दूसरे के साथ अपनी खुशियां बांटेंगे। जमकर आकाश में घनघोर आतिशबाजी की गूंज उठेगी। दीपावली के अगले दिन अन्नकूट मनाया जायेगा। इस दिन व्यापारी वर्ग अपना नया पर्व मनाते हैं और व्यापार के पुराने खातों को नया बनाते हैं। ऐसा माना जाता है कि वर्षा के देवता इन्द्र देव की कृपा से ही घरों में धन-धान्य आता हैं और वर्षा के अंत पर लोग इंद्र का पूजन उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए करते हैं। प्रत्येक घरों में पकवान बनाये जाते हैं। लेकिन भगवान कृष्ण ने भोले-भाले ब्रजवासियों से कहा था कि इन्द्र के स्थान पर गोवर्धन पर्वत की पूजा करनी चाहिए। जिसके तराई के चारे से लाखों पशुओं का पालन होता है। इस पर नाराज इन्द्र देव ने शीघ्र वर्षा कर ब्रज को डुबो देना चाहा पर श्री कृष्ण जी ने गोवर्धन पर्वत को ही छतरी के रूप में ऊपर उठा लिया। लज्जित इंद्र ने श्री कृष्ण जी से क्षमा मांगी और तभी से इस दिन अन्नकूट मनाया जाने लगा। अन्नकूट के अगले दिन कार्तिक शुक्ल द्वितीय पर भाईदूज मनाया जाएगा। इस दिन बहनें अपने भाई का सत्कार करती हैं। ऐसा कहा जाता है कि यमराज ने अपनी बहन यमुना से कहा था कि आज के दिन जो बहन अपने भाई का सत्कार करेगी, वह चाहे जितना ही बुरा क्यों ने हो, उसे अपने पाप से मुक्त कर दूंगा। तभी से भैया दूज का उत्सव प्रचलित हुआ।

लक्ष्मी पूजन का शुभ मुहूर्त..

वैदिक पंचांग के अनुसार, इस बार दीवाली का पर्व 20 अक्टूबर को मनाया जाएगा। कार्तिक माह की अमावस्या तिथि की शुरुआत- 20 अक्टूबर को 03 बजकर 44 मिनट पर| कार्तिक माह की अमावस्या तिथि का समापन- 21 अक्टूबर को 05 बजकर 54 पर| लक्ष्मी पूजा मुहूर्त – शाम 7 बजकर 8 मिनट से रात 8 बजकर 18 मिनट तक| प्रदोष काल – शाम 5 बजकर 46 मिनट से रात 8 बजकर 18 मिनट तक| वृषभ काल – रात 7 बजकर 8 मिनट से रात 9 बजकर 3 मिनट तक| शुभ मुहूर्त में गणेश लक्ष्मी पूजन मंत्रों के जाप अनुष्ठान विशेष फलकारी होता है। मंत्र ॐ गणपतयै नमः, ॐश्री श्रियैं नमः, ॐ श्री विष्णवे नमः, ॐ श्री कुबेराय नमः।