जबलपुर। किसानों के गैर राजनैतिक, वर्ग विहीन, राष्ट्रीय संगठन भारत कृषक समाज के पदाधिकारियों ने कलेक्टर राघवेंद्र सिंह से भेंट कर किसानों की ओर से शिकायत दर्ज कराते हुए कहा कि गांव, खेत, किसान व कृषि के सभी विभागो से जुड़े अधिकांश अधिकारी, कर्मचारी किसानों व ग्रामीण जनो के फोन नही उठाते, यदि कभी कभार उठा लेते हैँ तो उनका व्यवहार अत्यंत रूखा एवं चिड़चिड़ा रहता है, व्हाट्सअप के मैसेज भी संज्ञान में नही लिए जाते, कार्यालयों में उनसे मिलना बहुत दूभर होता है। पहले तो चपरासियो की खुशामद करना पड़ती है, जैसे तैसे अंदर जाने मिलता है तो किसानों से अछूतों जैसा व्यवहार किया जाता है. अधिकारी के सामने खड़े रहकर गिड़गिड़ा कर,निराश होकर, अपने स्वाभिमान से समझौता कर लुटा, असहाय व दुखी मन से घर लौट आता है। अन्नदाता की यह स्थिति अत्यंत असहनीय व पीड़ा दायक है।
कलेक्टर से मांग की गई की वे कृषि से संबंधित सभी विभागों के अधिकारियों, कर्मचारियों को निर्देशित करें कि वे किसानों के साथ मधुर व्यवहार करें तथा अपने कार्यालय में सम्मान पूर्वक उनकी समस्या सुनकर निराकरण कर उन्हें संतुष्ट करें । साथ ही किसानों के फोन उठाएं तथा उन्हें उचित जवाब देवे, किसानों के व्हाट्सएप मैसेज संज्ञान में लिए जाएं। ग्रामीण क्षेत्र की समस्याओं के सम्बन्ध में अखबारो में प्रकाशित समाचारों को अधिकारी संज्ञान में लेकर कार्यवाही करें।
भारत कृषक समाज के अध्यक्ष इंजी. के के अग्रवाल ने कहा कि यह विडंबना है अन्नदाता को केवल दिखावे में अन्नदाता कहा जाता है, वास्तव में दिल से किसी ने उसे अन्नदाता स्वीकार किया ही नहीं, नहीं तो उसकी यह दुर्दशा नहीं होती। किसान को कभी अन्नदाता जैसा सम्मान नही मिला। श्री अग्रवाल ने बताया की किसानों का सम्मान पुनर्स्थापित करने एक अभियान चलाया जायेगा, जिसमे जिला तथा तहसील स्तर पर सभी कार्यालयों में अधिकारियों से भेंट कर चर्चा की जाएगी तथा इस सम्बन्ध में उनको पत्र सौपकर आश्वासन लिया जायेगा।
इसके अलावा किसानों ने अपनी अन्य मांगों में किसानों के लंबित भुगतान शीघ्र कराने, धान की पंजीयन अवधि बढ़ाने, नहरों से अंतिम छोर तक सिचाई हेतु पानी उपलब्ध कराने के साथ ही प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजनांतर्गत निर्मित ग्राम सिमरिया से छपरी लापता सड़क का मुद्दा प्रमुख रूप से उठाया । इस अवसर पर भारत कृषक समाज के रामकिशन पटेल, विवेक पटेल, संजय जैन, जितेंद्र देसी, सुशील जैन, हरनारायण सिंह राजपूत, रामेश्वर अवस्थी, प्रशांत जैन, महेन्द्र पटेल, संतोष बर्मन आदि उपस्थित थे।