तेहरान/वॉशिंगटन। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने दावा किया है कि उसने एक और अमेरिकी एफ15ई लड़ाकू विमान को मार गिराया है। ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी ने कथित मलबे की तस्वीरें जारी करते हुए कहा कि यह विमान अमेरिका के लेकनहीथ स्क्वाड्रन से जुड़ा था और पूरी तरह तबाह हो गया। रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया कि पायलट के बचने की संभावना बेहद कम है। हालांकि अमेरिका ने इन दावों को सिरे से खारिज करते हुए इसे भ्रामक प्रचार बताया है।
ईरान के सरकारी टीवी से जुड़े एक स्थानीय चैनल ने यह भी कहा कि दक्षिण-पश्चिमी ईरान में एक अमेरिकी पायलट पैराशूट से उतरता देखा गया। चैनल ने लोगों से अपील की कि यदि पायलट जिंदा पकड़ा जाता है तो उसे पुलिस को सौंपा जाए और इसके बदले इनाम दिया जाएगा। एजेंसी ने यह भी दावा किया कि अमेरिका ने ब्लैक हॉक हेलीकॉप्टर और सी-130 विमान के जरिए बचाव अभियान चलाया, लेकिन उसे सफलता नहीं मिली। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है और अमेरिका की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है।
ईरान का कहना है कि पिछले 24 घंटों में यह दूसरा एफ15ई विमान है जिसे उसने निशाना बनाया है। इससे पहले 23 मार्च और 2 अप्रैल को भी इसी तरह के दावे किए गए थे। ईरान लगातार यह संदेश देने की कोशिश कर रहा है कि उसने अमेरिकी आधुनिक लड़ाकू विमानों को मार गिराने में सफलता पाई है।
वहीं, जारी की गई तस्वीरों पर अब सवाल उठने लगे हैं। विशेषज्ञों और एआई विश्लेषण के आधार पर सामने आया है कि तस्वीरों में एफ15ई की पहचान से जुड़े जरूरी तकनीकी फीचर स्पष्ट नहीं दिख रहे। मलबे पर अमेरिकी वायुसेना के सामान्य निशान जैसे स्टार चिह्न या टेल कोड नजर नहीं आते। तस्वीरों में दिख रहा ढांचा एफ15ई के डिजाइन से मेल नहीं खाता। कुछ हिस्सों पर यूरोप लिखा दिखाई देना भी संदेह पैदा करता है। विश्लेषकों का मानना है कि यह किसी पुराने या अलग मॉडल के विमान का मलबा हो सकता है। अब तक किसी स्वतंत्र और विश्वसनीय अंतरराष्ट्रीय स्रोत ने ईरान के दावे की पुष्टि नहीं की है।
अमेरिका ने 23 मार्च के दावे पर कहा था कि उसका एक एफ15ई विमान मिशन के बाद तकनीकी कारणों से मध्य पूर्व के एक बेस पर सुरक्षित उतरा था। 2 अप्रैल के दावे को भी अमेरिकी अधिकारियों ने खारिज कर दिया था। इससे स्पष्ट है कि दोनों देशों के बीच सैन्य तनाव के साथ-साथ सूचना युद्ध भी जारी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस तरह के दावे और जवाबी बयान जारी रहे तो क्षेत्रीय तनाव और बढ़ सकता है। खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे रणनीतिक क्षेत्र में किसी भी तरह की सैन्य गतिविधि वैश्विक तेल आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन सकती है। फिलहाल दुनिया की नजर इस घटनाक्रम पर टिकी हुई है और सच्चाई सामने आने का इंतजार किया जा रहा है।