जबलपुर। संस्कारधानी जबलपुर में कानून-व्यवस्था की धज्जियां उड़ चुकी हैं और अपराधियों के हौसले आसमान छू रहे हैं। गंभीर अपराधों में जेल भेजे गए शातिर बदमाशों के लिए जमानत अब सुधरने का मौका नहीं, बल्कि ‘अपराध का नया लाइसेंस’ बन चुकी है। हत्या, दुष्कर्म, चाकूबाजी, बमबाजी और रंगदारी जैसे मामलों के आरोपी जेल से बाहर आते ही सबसे पहले उन्हीं पीड़ितों और गवाहों को निशाना बना रहे हैं, जिनकी वजह से वे सलाखों के पीछे पहुंचे थे।
शहर में खौफ का आलम यह है कि पीड़ितों को सरेआम जान से मारने की धमकियां दी जा रही हैं, अदालत से केस वापस लेने का दबाव बनाया जा रहा है और विरोध करने पर दोबारा गोलियां और बम बरसाए जा रहे हैं। इन सबके बीच सबसे शर्मनाक स्थिति यह है कि जनता की सुरक्षा का दावा करने वाली पुलिस का अपराधियों पर से अंकुश पूरी तरह खत्म हो चुका है।
न पुलिस का खौफ, न ‘साहब’ फोन उठाते: आपात स्थिति में कोई नहीं मददगार
शहर की बदहाल कानून-व्यवस्था का सबसे कड़वा सच यह है कि जब कोई नागरिक मुसीबत में फंसता है, तो उसे ‘एट ए टाइम’ (तत्काल) कोई पुलिस सहायता नहीं मिलती।
* फोन नहीं उठाते टीआई और अफसर: पीड़ितों का आरोप है कि थानों के प्रभारी (TI) और जिम्मेदार पुलिस अधिकारी ऐन मौके पर फोन तक उठाना मुनासिब नहीं समझते।
* निगरानी के नाम पर खानापूर्ति: जेल से छूटने के बाद आदतन अपराधियों की नियमित मॉनिटरिंग के लिए पुलिस के पास ना कोई मजबूत रणनीति है और ना ही इच्छाशक्ति।
* स्टाफ और तकनीक का रोना: पुलिस महकमा थानों में स्टाफ की कमी और संसाधनों का बहाना बनाकर अपनी जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ रहा है। इसी ढिलाई का फायदा उठाकर बदमाश रिहा होते ही अपने पुराने आपराधिक नेटवर्क के साथ दोबारा असलहों से लैस होकर सड़कों पर तांडव मचा रहे हैं।
जमानत पर बाहर आए और फिर मचाया तांडव: तारीख-दर-तारीख खौफ की कहानी
पुलिस रिकॉर्ड और हालिया घटनाएं गवाही दे रही हैं कि जमानत पर छूटे बदमाशों ने कानून के खौफ को पूरी तरह हवा में उड़ा दिया है:
| तारीख | क्षेत्र / लोकेशन | आरोपी का नाम | खौफनाक वारदात / हरकत |
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| 2 फरवरी | बेदी नगर, गढ़ा | कुख्यात शिब्बू | हत्या के मामले में जेल से छूटते ही 24 घंटे के भीतर 2 गोलीकांड की वारदात को अंजाम दिया। |
| 24 मार्च | लेमा गार्डन, गोहलपुर | सलमान | दुष्कर्म के मामले में बेल पर बाहर आते ही पीड़िता पर केस वापस लेने और गवाही रोकने का दबाव बनाया। |
| 26 मार्च | रामनगर | सोहेल उर्फ बाबा | छेड़छाड़ के आरोपी ने अपने साथी के साथ मिलकर पीड़िता युवती के घर पर पथराव किया। |
| 27 फरवरी | पुराना शोभापुर, रांझी | प्रवीण रजक, शांटू यादव, अनिल सोनी | जमानत पर बाहर आते ही गवाह को धमकाया और जानलेवा हमला करने की कोशिश की। |
| 19 जनवरी | धनवंतरी नगर | शांतनु घोष | धोखाधड़ी और दुष्कर्म केस में जमानत पर छूटकर पीड़िता को खुलेआम धमकाया। |
| 6 मार्च | गढ़ा क्षेत्र | सत्यम कोरी | युवती को रास्ते में रोककर केस वापस लेने का दबाव बनाया, मना करने पर हत्या की धमकी दी। |
| 17 अप्रैल | चिकनी कुआं | मुर्गी उर्फ महेंद्र | हत्या का आरोपी जमानत पर आकर पीड़ित परिवार को अपने पक्ष में गवाही देने के लिए धमकाने लगा। |
| 29 मई | शोभापुर, रांझी | पवन रजक, प्रवीण रजक व साथी | रासुका से छूटते ही पवन रजक ने साथियों संग घर और शराब दुकान पर बमबाजी कर इलाका दहला दिया। |
चाकूबाजी का ग्राफ बेलगाम, रासुका और तड़ीपार भी साबित हो रहे ‘फुस’
1 जनवरी से 23 मई 2026 के बीच शहर में हुई चाकूबाजी की घटनाओं की समीक्षा करें तो रोंगटे खड़े करने वाला सच सामने आता है। अधिकांश वारदातों में वही आरोपी शामिल पाए गए जो हाल ही में जेल से जमानत पर छूटे थे।
हद तो यह है कि आदतन अपराधियों पर लगाए जाने वाले राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) और जिला बदर (तड़ीपार) जैसे कड़े कानूनी हथियार भी अपराधियों के हौसले तोड़ने में नाकाम साबित हो रहे हैं। तड़ीपार और रासुका से छूटने के बाद बदमाश दोबारा उसी इलाके में लौटकर बमबाजी और गोलीबारी कर रहे हैं, जिससे पुलिस के प्रशासनिक सुधार और पुनर्वास के तमाम दावों की पोल खुल गई है।
बड़ा सवाल: आखिर कब जागेगा पुलिस प्रशासन?
कानूनी जानकारों का स्पष्ट कहना है कि यदि जमानत पर रिहा आरोपी जमानत की शर्तों का उल्लंघन कर रहा है, गवाहों को धमका रहा है या दोबारा अपराध कर रहा है, तो पुलिस को तत्काल अदालत के समक्ष जमानत निरस्त करने की याचिका लगानी चाहिए।
> जनता का सीधा सवाल:
> * जब बदमाश खुलेआम घूम रहे हैं, तो संवेदनशील मामलों के पीड़ितों और गवाहों की सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी है?
> * आपात स्थिति में जब थाना प्रभारी फोन ही नहीं उठाएंगे, तो आम नागरिक न्याय और सुरक्षा के लिए किसके पास जाए?
क्या पुलिस प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है?
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