जीएसटी पर सेस घटा, फिर भी नहीं घटे बिजली के दाम, उपभोक्ता मंच का आरोप, फ्यूल सरचार्ज बढ़ा

जबलपुर। केंद्र सरकार ने 22 सितंबर से कोयले पर जीएसटी 5 प्रतिशत से बढ़ाकर 18 प्रतिशत की, लेकिन कोयले पर वर्तमान में लगने वाला 400 रुपए प्रति टन सेस हटा दिया|

परिणामस्वरुप बिजली उत्पादन में लागत घटेगी तथा इस बचत से फ्यूल सरचार्ज में कमी आने से बिजली सस्ती होगी, यह उम्मीद थी, इसका असर दो माह बाद ही दिखेगा क्योंकि फ्यूल सरचार्ज दो माह पूर्व के आंकड़ों पर तय किया जाता है|


लेकिन पावर मैनेजमेंट कंपनी द्वारा दो माह पूर्व के सितंबर के आधार पर नवंबर के फ्यूल चार्ज को तय कर जब 28 नवंबर को सर्कुलर जारी किया तब स्पष्ट हुआ कि जीएसटी 2.0 लगने तथा कोयले से सेस हटाने के बावजूद भी बिजली सस्ती नहीं हुई, नवंबर का फ्यूल सरचार्ज अक्टूबर के तुलना में घटा नहीं, बल्कि बढ़ गया है|


डॉ. पीजी नाजपांडे ने बताया कि नियामक आयोग द्वारा निर्धारित टैरिफ के आधार पर यदि उपभोक्ता 1 हजार रुपए प्रति माह बिल देता है तो उसे अक्टूबर के मायनस 4.73 प्रतिशत फ्यूल सरचार्ज के कारण 953 रुपए का भुगतान करना पड़ा जबकि अब नवंबर में मायनस 2.23 प्रतिशत फ्यूल सरचार्ज के कारण 978 रुपए देना पड़ेगा| स्पष्ट है उसे 25 रुपयों का नुकसान होगा|

प्रदेश सरकार जांच कराए…………

जनसंगठनों के रजत भार्गव, एड.वेदप्रकाश अधौलिया, टीके रायघटक, डीके सिंह, डीआर लखेरा, संतोष श्रीवास्तव, सुशीला कनौजिया, गीता पांडे, राममिलन शर्मा ने मांग की|

प्रदेश सरकार जांच कर आवश्यक कदम उठाए ताकि जीएसटी 2.0 तथा कोयले से सेस हटाने का लाभ उपभोक्ताओं तक क्यों नहीं पहुंचा| यह वस्तुस्थिति सामने आयेगी|