शिक्षाविद गिजुभाई  जयंती समारोह

आनंद की शुरूवात स्वयं से  करना चाहिए  : राहुल कोठारी ।

समर्पण भावना से कार्य करे शिक्षक : डा राजीव जैन


*भोपाल*:-  आत्मनिर्भर शिक्षक सन्दर्भ समूह द्वारा 15 नवंबर 2025 को महान शिक्षाविद गिजुभाई जी की 141 वीं जयंती तथा भगवान बिरसा मुंडा की 150 वीं जयंती तथा साथ ही राष्ट्रगीत वंदे मातरम के 150 वर्ष पूर्ण होने पर बाल आनंद दिवस समारोह पूर्वक मनाया  गया ।
सर्वप्रथम  अतिथिगणों द्वारा दीप प्रज्वलित कर मां शारदे को  नमन- वंदन किया और समूह की सक्रिय सदस्य श्रीमती रामसेवी द्वारा सरस्वती वंदना का गायन किया। डॉ. सूरज नागर द्वारा समूह का संकल्प गीत प्रस्तुत किया गया। उल्लेखनीय है कि समूह के लिए संकल्प गीत का सृजन करते हुए डॉ नागर जी ने शिक्षाविद  गिजूभाई जी के बाल देवो भव  के भावों को  प्रस्तुत किया था.
समारोह में उपस्थित सभी अतिथियों का स्वागत समूह की राज्य समन्वयक सुश्री उमा उपाध्याय सहित सक्रिय सदस्यों ने किया।
कार्यक्रम की प्रस्तावना में  समूह के संस्थापक  डॉ दामोदर जैन ने शिक्षाविद गिजुभाई का बच्चों के प्रति प्रेम,माता पिता ,शिक्षकों को अनुभव द्वारा शिक्षण एवं  शैक्षिक नवाचारों के बारे में प्रस्तुत  विचारों में  कहा कि कहानी के माध्यम से शिक्षण प्रारंभ करना और कहानी के माध्यम से ही शिक्षण का समापन करना चाहिए।   उन्होंने  कहा कि शिक्षक को पद से नहीं ,कद से श्रेष्ठ  होना चाहिए। डॉ  जैन ने  सभी शिक्षकों को  कहानी के उपयोग के लिए प्रेरित किया जिसकी परिकल्पना  राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2025 में भी है।  उन्होंने बताया कि सभी के अनुमोदन से समूह अब  “आत्मनिर्भर शिक्षक संदर्भ समूह ”  के रूप में कार्य  करेगा।  विद्यालय को आनंद घर बनाने की प्रेरणा देते हुए  उन्होंने कहा कि  वर्तमान शैक्षिक वातावरण में बदलाव जरूरी है। सभी शिक्षकों  के  मन में बड़प्पन होना चाहिए। आदेश  से नहीं बल्कि स्व निर्देश द्वारा विद्यालय को आनंद घर बनाया जा सकता है।  अब बच्चों के मन को समझ कर शिक्षण कार्य प्रारंभ किया जाना चाहिए। शाला के शुभारंभ में बालक आनंदित होकर के विद्या अध्ययन करें जिसके लिए राष्ट्रसंत विद्यासागर जी के द्वारा शिक्षक होने पर नहीं बल्कि बनने पर जोर दिया  गया था. विद्यार्थियों की सेवा सुरक्षा और शिक्षकों का अपना दोष मार्जन करके उन्हें स्वप्रमाणित होना चाहिए।  गिजुभाई के दर्शन और विचारों का प्रसार करना, विद्यालय को आनंद घर बनाना , निर्मल भाव से शिक्षण कार्य करना और शिक्षक को पढ़ना – लिखना दोनों अपनी आदत में सम्मिलित करना पड़ेगा।
     समारोह के अतिथि पूर्व स्कूल शिक्षा मंत्री  श्री दीपक जोशी  ने  अपने सारगर्भित उद्बोधन में कहा  ” शिक्षक ऐसा चाहिए जैसे गंगा नीर।”  उन्होंने बताया कि गंगा कैसी होना चाहिए। धर्म वीर भारती का उल्लेख करके उन्होंने बताया कि सामाजिक और शैक्षिक व्यवस्था में बदलाव होना जरूरी है। 3री कक्षा में पढ़ते समय उन्होंने अपने बचपन का दृष्टांत के  माध्यम से बताया  कि  श्रेष्ठ शिक्षक हमेशा विद्यार्थी का मार्गदर्शन करता है। छोटे-छोटे प्रयासों द्वारा शिक्षकों को अपने आचार संहिता स्वयं निर्माण करके उनके गौरव को पुन स्थापित करना होगा।
     इस अवसर पर न्यू अहिंसा निकेतन शैक्षणिक एवं सामाजिक कल्याण समिति के संस्थापक अध्यक्ष डॉ. राजीव जैन ने कहा कि मंजिलें जितनी ऊंची होती है हासिल उतनी ही दूर होती है। संकल्प से सिद्धि की यात्रा पूरी करने के लिए दृढ़ विचार और समर्पण जरूरी है।पर्यावरण संरक्षण के कार्य को बताते हुए उन्होंने कहा कि शिक्षक को सहयोग,सामंजस और समर्पण की भावना से कार्य करना चाहिए। साथ ही संदेश दिया कि “लक्ष्य न ओझल होने पाए कदम मिलाकर चल।मंजिले तुम्हारे कदम चूमेगी आज नहीं तो कल।”।
     समारोह के  अध्यक्ष  सेवा निवृत्त उप संचालक  लोक  शिक्षण  भोपाल  श्री के पी एस तोमर कहा कि 2010 में IASE भोपाल में प्राचार्य के रूप में कार्य करते हुए  मैंने डॉ दामोदर जैन  के व्यक्तित्व  को  समझ  लिया था.  उन्होंने कहा कि  शिक्षक में अनंत क्षमताओं का विकास करने की स्थिति होती है .  उन्होंने बताया कि शाला सिद्धि कार्यक्रम का सूत्र वाक्य था कि विद्यालय में प्रदान की जाने वाली शिक्षा आनंद देने वाली होना चाहिए। बच्चों का मानस पढ़ करके शिक्षण शिक्षण कार्य किया जाए तो शिक्षण का उद्देश्य पूरा हो जाता है। शिक्षक यह निर्धारित करता है कि विद्यार्थी को कब,  कैसे और कहां आदि प्रश्नों का उत्तर किस प्रकार से दिया जा सके । छात्रों की उपस्थिति विद्यालय के वातावरण के आधार पर तय होती है। शिक्षक चमत्कार करने की क्षमता रखता है। उन्होंने स्वयं अपने जीवन का उदाहरण प्रस्तुत किया कि उन्होंने 1980 में एमएससी उत्तीर्ण करके अपने प्राइमरी शिक्षक से प्रेरित होकर शिक्षा के क्षेत्र में अपनी जीवन यात्रा प्रारंभ की। PSC परीक्षा पास कर 32 वर्ष  की  उम्र में ही प्राचार्य के रूप में कार्य करते हुए उपसंचालक के पद से सेवानिवृत हुए।
       समारोह के केंद्र बिंदु बाल  प्रतिनिधि मुस्कान ने कहा कि वह उनकी शिक्षिका के साथ लुकाछिपी का खेल  खेलती थी । हर बच्चा मासूम होता है और उसे सिखाने की जिम्मेदारी शिक्षक की होती है। मुस्कान किताबी मस्ती पुस्तकालय का संचालन करती है।  मुस्कान  अभी मानव सेवा के  क्षेत्र में श्रेष्ठ कार्य कर , अंतरराष्ट्रीय एंबेसडर के रूप में कार्य कर रही है। मुस्कान कहती है कि मुस्कुरा करके कार्य को मन से करें। शिक्षक अपने जन्म दिवस पर बच्चों के लिए स्टेशनरी बैंक  खोले।
      समारोह  के द्वितीय सत्र का प्रारंभ सुश्री दीपिका द्वारा वंदे मातरम गायन से किया गया।कार्यक्रम के  विशिष्ट अतिथि दक्षिण पश्चिम क्षेत्र के विधायक श्री भगवान दास सबनानी ने  कहा कि आज ही जनजाति गौरव दिवस का शुभारंभ हुआ था। जनजाति गौरव पुरुष बिरसा मुंडा ने अपनी छोटी आयु में भारत के स्वाभिमान की रक्षा के लिए  स्वतंत्रता आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और 25 वर्ष के जीवन काल में ही अविस्मरणीय कार्य किए। उन्होंने कहा कि विचारों व संस्कारों की पूंजी चिरस्थाई होती है। मानव की देह का सदुपयोग कर, परोपकार में सकारात्मक कार्य करके सामाजिक व्यवस्था का स्वरूप बदला जा सकता है। जनजाति समाज एक प्रेरक समाज के रूप में कार्य कर रहा है।  शिक्षक सन्दर्भ समूह शिक्षा के क्षेत्र में नए नए उपयोगी और रचनात्मक कार्यों को करने के लिए प्रयासरत है.
समारोह के मुख्य अतिथि भारतीय जनता  पार्टी के प्रदेश महामंत्री राहुल कोठारी जी ने कहा कि आत्मनिर्भर शिक्षक सन्दर्भ समूह के संस्थापक डॉ दामोदर जैन पिछले कई सालों से श्रेष्ठ प्रकल्प लेकर कार्य कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि रटने के स्थान पर सीखने की प्रक्रिया के प्रणेता शिक्षाविद गिजुभाई की संकल्पना को राष्ट्रीय  शिक्षा  नीति 2020  साकार कर रही है ।
श्री कोठारी जी ने कहा कि आनंद की शुरुआत  स्वयं से होना चाहिए। रचनात्मक शिक्षकों के इस रचनात्मक मैत्री समूह द्वारा  शिक्षा के क्षेत्र में सार्थक प्रयास किए जा रहे हैं। परिवार व संस्कार के प्रकल्प प्रारंभ होकर बच्चों के चेहरे पर मुस्कान आना चाहिए ।मैं समूह के द्वारा संचालित  प्रकल्पों का सहयोगी बन कर अपने आप को गौरवान्वित महसूस कर रहा हूं ।
कार्यक्रम के समापन में   श्री राहुल कोठारीजी सहित उपस्थित सभी अतिथियों द्वारा  शिक्षक  – सम्मान समारोह संपन्न हुआ।
कार्यक्रम में उपस्थित श्रीमती दीप्ति शुक्ला  ने कहा कि  वे 23 वर्षों से शिक्षण क्षेत्र में कार्य कर रही है । शिक्षक को केवल शिक्षक का कार्य करने दिया जाए तो शिक्षक  और छात्र दोनों मिलकर के आनंदित होकर  कार्य कर सकते हैं ।आनंद विभाग की  श्रीमती श्रद्धा गुप्ता जी ने मूल्य शिक्षा पर जोर दिया । उन्होंने कहा कि परिवार का विज्ञान संबंधों का विज्ञान के द्वारा मूल्य को बचाया जा सकता है।  राज्य शिक्षा केंद्र के मीडिया सलाहकार श्री अमिताभ अनुरागी जी ने मां सरस्वती  और शिक्षकों को प्रणाम करते हुए कहा कि समाज द्वारा मुस्कान और दीपिका जैसी प्रतिभा को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।  उन्होंने नीति आयोग दिल्ली का अपना संस्मरण सुना कर  बताया कि वे अपने आप को परम सौभाग्य शाली महसूस  करते हैं । श्री अनुरागी ने कहा कि जीवन में आनंद को खोजने रहना चाहिए। श्रेष्ठ शिक्षण मानवता की सेवा और ईश्वर की आराधना के समान है  इसलिए  शिक्षकों को तन मन से समर्पित होकर कार्य  करना चाहिए.

समारोह में  जैन इंजीनियर सोसाइटी के अध्यक्ष  इंजीनियर अमलराज जैन ने कहा कि  अब  समाज  को इंजीनियर नहीं ,कारीगर चाहिए ,  अब नेता नहीं ,  नागरिक चाहिए।