जबलपुर,। मध्यप्रदेश में बिजली उपभोक्ताओं पर बढ़ाए गए फ्यूल सरचार्ज को लेकर विरोध के स्वर तेज होने लगे हैं। नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच ने आरोप लगाया है कि प्रदेश में ऊर्जा मंत्री और सरकार को पूर्व सूचना दिए बिना फ्यूल सरचार्ज में भारी वृद्धि कर दी गई, जिससे आम उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है।
मंच के अध्यक्ष डॉ. पी.जी. नाजपांडे ने इस संबंध में मध्यप्रदेश शासन, विद्युत नियामक आयोग एवं जिला प्रशासन को पत्र भेजकर उत्तर प्रदेश की तर्ज पर कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश के ऊर्जा मंत्री ने फ्यूल सरचार्ज वसूली पर तत्काल रोक लगाते हुए जांच समिति गठित की है और यह जानने के निर्देश दिए हैं कि बिना पूर्व जानकारी के सरचार्ज में बढ़ोतरी कैसे की गई।
डॉ. नाजपांडे के अनुसार मध्यप्रदेश में मार्च माह तक फ्यूल सरचार्ज शून्य प्रतिशत था, जिसे अप्रैल में बढ़ाकर 5.36 प्रतिशत तथा मई-जून में 3.91 प्रतिशत कर दिया गया। उनका आरोप है कि इस वृद्धि से पहले न तो राज्य सरकार को समुचित जानकारी दी गई और न ही उसकी अनुमति ली गई।
उन्होंने कहा कि विद्युत नियामक आयोग द्वारा किए गए संशोधनों के तहत फ्यूल सरचार्ज की स्वचालित वृद्धि का प्रावधान किया गया है, लेकिन राज्य सरकार को विद्युत अधिनियम के तहत प्राप्त अधिकारों का उपयोग करते हुए इस मामले में हस्तक्षेप करना चाहिए। मंच ने मांग की है कि प्रदेश में फ्यूल सरचार्ज की वसूली की समीक्षा कर उपभोक्ताओं को राहत प्रदान की जाए। जनसंगठनों ने धारा 108 का उपयोग करते हुए प्रदेश सरकार से मांग की है कि फ्यूज सरचार्ज की अनाप शनाप वसूली पर रोक लगाई जाए|
नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच ने चेतावनी दी है कि यदि इस मुद्दे पर शीघ्र निर्णय नहीं लिया गया तो प्रदेशभर के उपभोक्ताओं के हित में व्यापक जनआंदोलन शुरू किया जाएगा।
इस अवसर पर रजत भार्गव, टी.के. रायघटक, संतोष श्रीवास्तव, एडवोकेट वेदप्रकाश अधौलिया, एच.जी.एस. सोनकर, सुशीला कनौजिया, गीता पांडे, राजेश गिदरोनिया, यशवंत कोष्टा, अर्जुन कुमार, अशोक यादव एवं पी.एस. राजपूत सहित अन्य सदस्य उपस्थित रहे।