खरीदी केंद्रों से खाली हाथ लौटने किसान मजबूर, कलेक्टर फेसबुक लाइव में किसानों ने व्यक्त की अपनी पीड़ा


जबलपुर। कलेक्टर जबलपुर की फेसबुक लाइव कार्यक्रम में जिला उपार्जन समिति के समक्ष भारत कृषक समाज महाकौशल म.प्र. के अध्यक्ष इंजी. के.के.अग्रवाल ने गेहूँ उपार्जन में किसानों की समस्याएं एवं सुझाव प्रस्तुत किये। फेस बुक लाईव चर्चा में जिला उपार्जन समिति के अध्यक्ष संयुक्त कलेक्टर ऋषभ जैन, फ़ूड कंट्रोलर श्रीमती सीमा बोरसिया, सहा. फ़ूड कॉट्रोलर प्रमोद मिश्रा, डीडीए उमेश कटहरे,नान के जिला प्रबंधक संजय सिंह, डी एम ओ हीरेन्द्र सिंह आदि ने उपार्जन की वर्तमान स्थिति तथा प्रक्रिया की जानकारी दी।
जबलपुर जिले के किसानों की ओर से केके अग्रवाल ने उपार्जन व्यवस्था में जिला प्रशासन के प्रयासों तथा किसानों से सीधे संवाद की पहल की सराहना करते हुए कहा की समय पर यदि भोपाल से सहयोग प्राप्त हो पाये तो उपार्जन अधिक सुगम होगा व किसानों की परेशानियां कम हो सकेगी। इस हेतु जिला प्रशासन को भोपाल स्थित सॉफ्ट वेयर कम्पनी एनआईसी व शासन स्तर पर प्रभावशाली पहल करने व दवाब बनाने की आवश्यकता है। स्लॉट बुकिंग में अभी भी किसानों को बहुत दिक्क़ते हैं। कई जगह स्लॉट बुकिंग बंद है। गोदामें, वेयर हाउस फुल होने से स्लॉट बुक नहीं हो पा रहे हैं, और जिनके हो गये हैं उनकी तुलाई नही हो रही है उन्हे केंद्रों से वापिस किया जा रहा है। मैपिंग नहीं हो रही है। केन्द्रो में बारदानो की कमी है, किसानों के स्लॉट बुकिंग की अवधि समाप्त हो जाती है, तुलाई नहीं हो पाती, किसानों का उत्पाद बाहर खुले में पड़ा है। मौसम खराब है। ऐसी स्थिति में किसान क्या करें ? वह घबराहट मे है। किसानों को केंद्रों पर सुझाव देने वाला या उनका मार्गदर्शन करने वाला कोई नही है। नोडल अधिकारियों को नियमों व दिशा निर्देशों का ज्ञान नहीं है। वे केन्द्रो में उपस्थित भी नहीं रहते। न ही समस्याओं के निराकरण में ही सक्षम हैं। विशेष दिक्कत यह है की अधिकारी फोन रिसीव नहीं करते और न ही उनके व्हाट्सअप के जवाब देते है। इस पर सख्त निर्देश कलेक्टर द्वारा दिये जाने चाहिए। स्लॉट बुकिंग में गलतियों के सुधार या अवधि बढ़ाने या अन्य समस्याओं के लिए किसान फ़ूड कंट्रोलर के दफ्तर में चक्कर लगाते हैं, वहाँ भीड़ बढ़ रही है, उनको वहाँ से कई बार यहाँ वहाँ भटकाया जाता है, उन्हे ठीक से अटेंड नहीं जाता। वे निराश व असंतुष्ट होकर, आने जाने में लगने वाले खर्च व समय की बर्बादी तथा मानसिक पीड़ा से ग्रसित होकर खाली हाथ घर लौटने मजबूर हो रहे हैं। सभी केंद्रों में पल्लेदारी व अन्य खर्च किसानों को देना पड़ रहा है, इस पर अंकुश नहीं लग पा रहा है। किसान से शिकायत के प्रमाण व लिखित आवेदन की माँग की जाती है, जो संभव नहीं है। ऐसे शिकायत कर्ता किसानों को केन्द्रो द्वारा बुरे ढंग से प्रताड़ित किया जाता है। कोई सामने आकर शिकायत करने का साहस नहीं जुटा पाता। प्रशासन से किसानों की समस्याओं के निराकरण की अपील की गई। फेश बुक लाइव से जुड़कर सेकड़ो किसानों ने अपनी समस्याओं से समिति को अवगत कराया।