सीमाओं के बाद भी होम्योपैथी में उपचार का असीमित दायरा, डॉ सुनील मिश्र को लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड


जबलपुर । चिकित्सा जगत में आज इतनी प्रगति हो गई है कि यदि व्यक्ति जागरूक है और समय पर डायग्नोज़ हो जाए तो कैंसर जैसी लाइलाज बीमारी का उपचार भी संभव हो गया है और होम्योपैथी भी पीछे नहीं है। होमियो इनसाइट व एचएचएफ के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित होम्योपैथी के राष्ट्रीय स्तर के सेमिनार में मुंबई से आए डॉ मयूरेश महाजन ने मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित करते हुए कैंसर के मरीज के सफल उपचार का ब्योरा प्रस्तुत करते हुए कहा कि होम्योपैथी में भी सीमाओं के बावजूद उपचार का असीमित दायरा है। यदि समय पर डायग्नोज हो जाए तो होम्योपैथी में भी उपचार संभव हैं। सेमिनार के दूसरे मुख्य वक्ता डॉ. सुनील घोडग़े ने भी होम्योपैथी की बढ़ती विश्वसनीयता पर प्रकाश डाला। सेमिनार के वक्ता डॉ. विनोद बडग़ैयाँ एवं डॉ. शिल्पा ताम्रकार ने भी होम्योपैथिक विधा के प्रामाणिक एवं वैज्ञानिक पक्ष पर विचार साझा किए।
इस आयोजन में राष्ट्रीय होम्योपैथिक आयोग दिल्ली से डॉ. आनंद चतुर्वेदी मुख्य अतिथि रहे, जिन्होंने अपने उद्बोधन में सभी चिकित्सकों का मार्गदर्शन एवं कठिन परिश्रम का संदेश दिया। इसके साथ ही अनुश्री होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज के संचालक अनिरुद्ध विश्नोई, महात्मा गांधी होम्योपैथिक मेडिकल कालेज की संचालिका श्रीमती कृतिका वर्मा, मेडिकल यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार डॉ. पुष्पराज बघेल विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम में शहर के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. सुनील मिश्र को होम्योपैथी जगत में उनके योगदान के लिए लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का सफल मंच संचालन डॉ. हेमन्त शुक्ला द्वारा किया गया।
दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार में डॉ. विकास त्रिपाठी, डॉ. गिरीश त्रिपाठी, डॉ. राहुल श्रीवास्तव, डॉ. अभिषेक भारद्वाज, डॉ. कौशलेंद्र द्विवेदी, डॉ. विक्रम चावला, डॉ. सुनील पटेल, डॉ. विद्या भूषण खरे, डॉ. अतुल ताम्रकार, डॉ. राजेश कौरव, डॉ. हरिओम कौरव, डॉ. अवनीश तिवारी, डॉ. पवन पांडेय, डॉ. आदित्य पचौरी, डॉ. प्रणव शुक्ला के साथ साथ शहर के साथ साथ पूरे देश के महाविद्यालयों से आए वरिष्ठ चिकित्सक, पी जी एवं यू जी के छात्र छात्रायें शामिल हुए। सेमिनार का आयोजन टीम होमियो इनसाइट जबलपुर, एचएचएफ एमपी-सीजी, एचएमएआई, द्वारा किया गया। इस आयोजन में अनुश्री होम्योपैथिक मेडिकल कालेज जबलपुर का विशेष सहयोग रहा।