जबलपुर। शहर के जिला कोर्ट परिसर के गेट नंबर 4 पर एक अधिवक्ता पर दिनदहाड़े चाकू से हमला किए जाने की घटना ने न्यायालय परिसर की सुरक्षा व्यवस्था पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हमले में अधिवक्ता रामनाथ रजक गंभीर रूप से घायल हुए हैं। उन्हें तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका उपचार जारी है। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ हत्या के प्रयास का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। बताया गया है कि आरोपी ने वकील को पत्नी का केस लड़ने से मना किया था| आरोपी की पत्नी ने परिवार न्यायालय में उसके खिलाफ केस लगाया है|
प्राप्त जानकारी के अनुसार घटना कोर्ट के मुख्य प्रवेश गेट के पास हुई, जहां आमतौर पर वकील, पक्षकार और पुलिसकर्मियों की आवाजाही बनी रहती है। ऐसे संवेदनशील स्थान पर चाकू से 10 से 12 वार किए जाना सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोलता है। अधिवक्ताओं का कहना है कि यदि कोर्ट गेट पर ही इस तरह की वारदात हो सकती है, तो परिसर के अंदर सुरक्षा का क्या भरोसा? वकीलों ने मांग की है कि कोर्ट परिसर में सीसीटीवी कैमरों की संख्या बढ़ाई जाए, प्रवेश पर सख्त चेकिंग हो और पुलिस बल की स्थायी तैनाती की जाए।
क्या है पूरा मामला…
घायल अधिवक्ता रामनाथ रजक के अनुसार, मंगलवार शाम करीब 4 बजे उनके क्लाइंट कंचन महोबिया के पति राकेश महोबिया कोर्ट आए थे। उन्होंने केस वापस लेने की धमकी दी और विवाद कर वहां से चले गए।
रामनाथ रजक ने बताया कि जब वे जिला कोर्ट से लौट रहे थे, तभी गेट नंबर 4 पर राकेश महोबिया ने उन्हें रोक लिया। आरोप है कि आरोपी ने उन्हें गाड़ी से खींचकर चाकू से ताबड़तोड़ हमला कर दिया। हमले के दौरान उसका एक साथी भी मौजूद था। वारदात के बाद आरोपी मौके से फरार हो गया। हमले में अधिवक्ता को गर्दन, हाथ, कान सहित शरीर के कई हिस्सों में गंभीर चोटें आई हैं।
वकीलों पर बढ़ते हमले……
घटना के बाद जिला अधिवक्ता संघ के सदस्यों में भारी आक्रोश है। कई अधिवक्ताओं ने इसे न्याय व्यवस्था पर हमला बताया है। वकीलों ने आरोपी की जल्द गिरफ्तारी, कड़ी कार्रवाई और कोर्ट परिसर में सुरक्षा बढ़ाने की मांग की है। गौरतलब है कि बीते कुछ समय में वकीलों पर हमलों की घटनाएं बढ़ती नजर आ रही हैं। कभी केस वापस लेने का दबाव, तो कभी आपसी रंजिश—इन कारणों से अधिवक्ताओं को निशाना बनाया जा रहा है। इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या न्याय की लड़ाई लड़ने वाले स्वयं असुरक्षित हैं?
कानूनी पेशे से जुड़े लोगों का कहना है कि अगर अधिवक्ता ही असुरक्षित रहेंगे तो आम नागरिकों का न्याय व्यवस्था पर भरोसा कमजोर होगा।