जबलपुरl मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति प्रमोद कुमार अग्रवाल की एकलपीठ ने छिंदवाड़ा जिले के बहुचर्चित जहरीले कफ सीरप कांड के आरोपि डा. प्रवीण सोनी सहित अन्य की जमानत अर्जियां निरस्त कर दीं। कोर्ट ने आरोपों को गंभीर श्रेणी का पाते हुए राहत से इनकार कर दिया। दो फरवरी को कोर्ट ने सुनवाई पूरी करने के साथ आदेश सुरक्षित कर लिया था, जिसे मंगलवार को सुनाया गया।
दरअसल, तमिलनाडु की सन फार्मा कंपनी द्वारा बनाये गए कोल्ड्रिफ कफ सररप को पीने से छिंदवाड़ा और उसके आसपास के जिलों के कुल 30 बच्चों की मौत हुई थी। दवा के रूप में ये कफ सीरप परासिया के शिशु रोग विशेषज्ञ डा. प्रवीण सोनी द्वारा लिखे गए थे। इस कफ सीरप को पीने से सर्दी-जुकाम से पीड़ित बच्चों की पहले किडनी फेल हुईं और फिर उनकी मौत हो गई थी।
डाक्टर की पत्नी के मेडिकल स्टोर से बिकता था सीरप
परासिया पुलिस को अनुसार जिस कोल्ड्रिफ कफ सीरप को दवा के रूप में डा. प्रवीण सोनी लिखते थे, वो कफ सिरप उनकी पत्नी ज्योति सोनी द्वारा संचालित अपना मेडिकल स्टोर से बिकता था। पुलिस ने मामले का खुलासा होने पर पांच अक्टूबर, 2025 को डा. प्रवीण सोनी को गिरफ्तार किया था। इसके बाद डा. सोनी के भतीजे राजेश और अपना मेडिकल स्टोर में फार्मासिस्ट के रूप में काम करने वाले सौरभ कुमार जैन को 13 अक्टूबर और फिर डा. सोनी की पत्नी ज्योति को तीन नवंबर, 2025 को गिरफ्तार किया गया था।
मृत बच्चों की ओर से की गई थी आपत्ति :
जहरीले कफ सीरप को पीकर अपनी जान गंवाने वाले 30 बच्चों की ओर से छिंदवाड़ा की महिला अधिवक्ता अश्मिता चांद ने हाई कोर्ट में आपत्ति दायर की थी। उनका कहना था कि जहरीले कफ सिरप ने मासूम बच्चों की जिंदगियां छीनने वाले वाले आरोपितों को जमानत का लाभ न दिया जाए।
सरकार ने किया था कड़ा विरोध :
सुनवाई के दौरान आरोपितों की ओर से दायर जमानत अर्जियों का राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता हरप्रीत सिंह रूपराह व शासकीय अधिवक्ता सीएम तिवारी ने कड़ा विरोध किया था। उनकी दलील थी कि डा. सोनी द्वारा लिखा गया कफ सीरप उसकी पत्नी ज्योति के मेडिकल स्टोर से ही यह कफ सिरप बिकता था। पैसों की लालच में यह षड्यंत्र रचा गया। जहरीले कफ सिरप से 30 बच्चों की जाने गईं। इसलिए आरोपितों को जमानत न दी जाए।