जबलपुर। जबलपुर शहर कोटे की रसोई गैस इंदौर और भोपाल शहर को सप्लाई की जा रही है| लिहाजा रसोई गैस की आपूर्ति पर संकट गहराता जा रहा है। हालात ऐसे हैं कि उपभोक्ताओं को बुकिंग के बाद 12 से 15 दिन तक गैस सिलेंडर के लिए इंतज़ार करना पड़ रहा है।
गैस एजेंसियों का कहना है कि इंदौर और भोपाल में गैस पाइप लाइन बिछाने के चलते सप्लाई मोड़ दी गई है, जिसका सीधा असर जबलपुर के घरेलू उपभोक्ताओं पर पड़ रहा है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार इंदौर और भोपाल में गैस लाइन बिछाने का काम तेज़ी से चल रहा है।
इस निर्माण के दौरान बड़ी मात्रा में गैस सिलेंडरों की सप्लाई वहीं डायवर्ट कर दी गई है। इसके चलते जबलपुर को मिलने वाला दैनिक कोटा कम कर दिया गया है। परिणामस्वरूप शहर की एजेंसियों को नियमित संख्या में सिलेंडर नहीं मिल रहे।
20-20 दिन नहीं मिल रही डिलीवरी ………..
नियमित 2–3 दिन में मिलने वाले सिलेंडर अब 2 सप्ताह के बाद भी मुश्किल से मिल रहे हैं। गैस की किल्लत से उपभोक्ता परेशान हैं, खासकर वे परिवार जिनमें बुजुर्ग हैं या रैस्टोरेंट चलाने वाले छोटे व्यापारी हैं।
टंकियों की काला बाज़ारी का धंधा तेज़ …
जहाँ गैस की वैध सप्लाई कम हुई है, वहीं काला बाज़ारियों के दिन लौट आए हैं। कई उपभोक्ताओं ने शिकायत की है कि कुछ लोग 857 रुपए में आने वाली टंकी 12 सौ से 15 सौ रुपए में ब्लैक में बिक रही है| यह कीमत सरकारी दर से 300–400 रुपये अधिक है। गोपनीय रूप से काम करने वाले एजेंट उपभोक्ताओं की मजबूरी का फायदा उठाकर भारी रकम वसूल रहे हैं।
प्रशासन एसआईआर में व्यस्त……
स्थिति को और गंभीर बनाने वाली बात यह है कि जिला प्रशासन और खाद्य विभाग के अधिकारी इन दिनों एसआईआर के चुनावी कार्यों में व्यस्त हैं। गैस की किल्लत और काले बाज़ारी पर नियंत्रण के लिए कोई विशेष निरीक्षण अभियान नहीं चलाया गया है। कई वार्डों में लोगों का आरोप है कि शिकायत करने पर विभाग यह कह देता है कि स्थिति जल्द सुधरेगी, लेकिन धरातल पर कोई कार्रवाई दिख नहीं रही।
नेता उदासीन, जनता परेशान…
गैस संकट पर न तो किसी राजनीतिक दल ने आवाज़ उठाई और न ही जनप्रतिनिधियों ने गैस एजेंसियों के साथ बैठक कर समाधान की कोशिश की।