नहाए खाए के साथ छठ पर्व की शुरुआत, कुल देवी देवताओं के पूजन के साथ व्रत प्रारंभ


जबलपुर। छठ महापर्व पूजा का रीति और परम्परा की दृष्टि से भी विशेष महत्व है। कार्तिक शुक्ल पक्ष की छठवीं तिथि को सूर्य उपासना का यह पवित्र पर्व उत्तर प्रदेश तथा बिहार प्रांत के पूर्वांचल वासियों द्वारा जिस तरह की आस्था और उपासना के भाव प्रदर्शन के साथ मनाये जाने की परंपरा है।

वह बिरले ही देखने को मिलता है। शनिवार 25 अक्टूबर को नहाए खाए के साथ पर्व का शुभारंभ हुआ। रविवार की संध्याकाल में कुलदेवी देवता का पूजन अर्चन कर छठ व्रतधारी गुड़ की खीर तैयार कर उसका भोजन करते है इसके उपरांत निर्जला व्रत रखते हैं।

आज होगा खरना ………..

नहाय खाय के अगले दिन यानी आज पंचमी तिथि को ‘खरना’ होता है। इस दिन व्रती सुबह स्नान आदि से निवृत्त हो कर सूर्य की पूजा करते हैं। पूरा दिन निर्जला व्रत रखा जाता है। दिन भर भजन कीर्तन होगा।

फिर शाम ढलते ही चंद्रमा को अर्घ्य दान, शशि पूजन बाद बखीर (गुड़ से बनी खीर) या लौकी की खीर के साथ रोटी का सेवन किया जाता है। इसमें नमक से सर्वथा परहेज होता है। इसे ही खरना कहते है।

यह शुद्धता और संकल्प का प्रतीक पर्व……..

सुबह जल्दी उठकर तिलवारा घाट माँ नर्मदा के जलाशय में स्नान किया स्नान के बाद पूरे घर और पूजा स्थल की अच्छी तरह से सफाई की सफाई के बाद स्वच्छ और नए वस्त्र धारण किए एवम छठ पूजा का व्रत रखने का संकल्प लिया आज पहला दिन, जिसे नहाय-खाय कहा जाता है, वही लौकी भात खाया जाता है जिसकी तैयारी की इस भोजन को सबसे पहले भगवान सूर्य को अर्पित करेगे और फिर इसे प्रसाद के रूप में ग्रहण करके व्रत की शुरुआत करेंगे|

व्रतीधारी प्रिया तिवारी ने बताया कि आज का दिन का मुख्य उद्देश्य शरीर और मन को शुद्ध करना है, ताकि हम व्रती अगले 36 घंटे के निर्जला (बिना पानी के) व्रत सहित पूरे कठिन अनुष्ठान के लिए तैयार हो सकें।