होली का त्योहार बनेगा देशव्यापी आर्थिक उत्सव, स्वदेशी व्यापार को मिलेगा अभूतपूर्व प्रोत्साहन : कैट


जबलपुर। देश के प्रमुख व्यापारिक संगठन कनफेडरेशन का ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के अनुसार इस वर्ष होली का पर्व केवल सांस्कृतिक नहीं बल्कि आर्थिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण साबित होने जा रहा है। कैट के राष्ट्रीय महासचिव एवं सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने बताया कि वर्ष 2026 में होली के अवसर पर देशभर में लगभग 80,000 करोड़ से अधिक का व्यापार होने का अनुमान है, जो भारतीय बाजारों में बढ़ती उपभोक्ता मांग और उत्सव आधारित खरीदारी का स्पष्ट संकेत है।


उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष होली के दौरान देश में लगभग 60,000 करोड़ का व्यापार हुआ था, जबकि इस वर्ष अनुमानित व्यापार में लगभग 25 से 30 प्रतिशत की वृद्धि देखी जा रही है। यह वृद्धि दर्शाती है कि भारतीय अर्थव्यवस्था में त्योहारों की भूमिका लगातार मजबूत हो रही है और खुदरा व्यापार, लघु उद्योग, कुटीर उद्योग तथा पारंपरिक व्यवसायों को इससे नई ऊर्जा मिल रही है।


कैट के राष्ट्रीय अध्यक्ष बी. सी. भरतिया होली के इस व्यापारिक विस्तार का सबसे बड़ा आधार “Vocal for Local” की भावना है। इस वर्ष बाजारों में स्वदेशी उत्पादों — जैसे हर्बल गुलाल, प्राकृतिक रंग, पिचकारी, हस्तनिर्मित सजावटी सामग्री, परिधान, मिठाइयाँ, गिफ्ट आइटम एवं पूजा सामग्री — की मांग में उल्लेखनीय वृद्धि देखी जा रही है।
कैट प्रदेश अध्यक्ष सुनील अग्रवाल ने कहा कि स्थानीय निर्माताओं, कारीगरों और छोटे व्यापारियों को सीधा लाभ मिल रहा है।

प्रदेश उपाध्यक्ष जितेंद्र पचौरी ने कहा कि त्योहार आधारित व्यापार ग्रामीण और शहरी अर्थव्यवस्था के बीच सेतु का कार्य करता है। प्रदेश संरक्षक संदेश जैन ने कहा होली जैसे पर्व पर देशभर में लाखों छोटे व्यापारी, वितरक, ट्रांसपोर्टर, श्रमिक एवं स्वरोजगार से जुड़े लोग आर्थिक गतिविधियों से जुड़ते हैं, जिससे व्यापक स्तर पर रोजगार सृजन होता है।

कैट संभाग अध्यक्ष दीपक सेठी ने बताया कि इस वर्ष विशेष रूप से भारतीय उत्पादों की ओर उपभोक्ताओं का झुकाव बढ़ा है, जिससे आयातित सामान पर निर्भरता कम हुई है। यह आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक सकारात्मक संकेत है और स्थानीय उद्योगों को दीर्घकालीन स्थिरता प्रदान करेगा।

प्रदेश सचिव रोहित खटवानी ने कहा कि होली का बाजार केवल रंग-गुलाल तक सीमित नहीं है, बल्कि FMCG उत्पाद, वस्त्र, इलेक्ट्रॉनिक्स, सजावटी सामग्री, खान-पान, मिठाई, सूखे मेवे तथा उपहार उद्योग सहित अनेक क्षेत्रों में व्यापक व्यापारिक गतिविधियाँ उत्पन्न करता है।
कैट प्रदेश कार्यकारिणी कोऑर्डिनेटर (महिला विंग) सीमा सिंह चौहान ने कहा कि इस प्रकार होली अब बहु-क्षेत्रीय आर्थिक प्रभाव वाला पर्व बन चुकी है। हम सभी को त्यौहार में अपने गली – मोहल्ले, शहर की दुकानों से ही सामान खरीदना चाहिए,

कैट जबलपुर जिला अध्यक्ष राजीव बड़ेरिया ने कहा कि डिजिटल भुगतान, ई-कॉमर्स, और संगठित वितरण व्यवस्था के विस्तार से इस वर्ष व्यापार में पारदर्शिता और गति दोनों बढ़ी हैं। छोटे व्यापारी भी अब तकनीक का उपयोग कर बड़े बाजार तक पहुँच बना रहे हैं।

कैट के अन्य पदाधिकारी एवं सदस्यों ने अंत में व्यापारिक प्रतिनिधियों ने विश्वास व्यक्त किया कि होली 2026 का यह व्यापारिक उत्साह भारतीय अर्थव्यवस्था को नई गति देगा, स्थानीय उत्पादन को सशक्त करेगा और देशभर के व्यापार जगत में सकारात्मक वातावरण का निर्माण करेगा।